श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – हिसाब किताब।)
☆ लघुकथा # 76 – हिसाब किताब ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
झुमरी आजकल तू बहुत छुट्टियां लेने लग गई है अब तेरे पैसे काटने पड़ेंगे तब छुट्टियां कब होंगी। गुस्से में सुनीता जी ने झुमरी से कहा- इस महीने तूने 10 छुट्टियां कर ली है।
मैडम जी हम भी इंसान हैं और घूमने फिरने ना जाया करें क्या? इतवार को मुझे बड़े बंगले में काम रहता है, खाना बनाने का। मुझे अच्छी तनख्वाह मिलती है।
मेरा तो यही फंडा है कि मैं आप लोगों के यहाँ छुट्टियां करके उस घर में काम करती रहूं आपको पसंद हो तो मुझे काम पर रखो, नहीं तो मेरे पास काम की कोई कमी नहीं है और पैसे काटने की मुझे धमकी तो मत देना।
मैं काम करती हूं तब आप मुझे पैसे देती हैं कोई एहसान नहीं… करती।
सुनीता जी ने धीमे स्वर में कहा- जबसे बंगले में काम करने लग गई है तब से तेरे ज्यादा ही पर निकल आए और हिसाब किताब भी बहुत सिखाने लगी है…।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





