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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति के 2रे जन्मदिवस – सफर तीन लाख का और विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ☆

☆ ई-अभिव्यक्ति के 2रे जन्मदिवस - सफर तीन लाख का और विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ☆ प्रिय मित्रो, अक्टूबर माह और आज का दिन ई- अभिव्यक्ति परिवार के लिए कई अर्थों में महत्वपूर्ण है।  इसी माह 15 अक्टूबर 2018 को हमने अपनी यात्रा प्रारम्भ की थी। मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि 2 वर्ष 10 दिनों के इस छोटे से सफर में आपकी अपनी वेबसाइट पर 3 लाख से अधिक विजिटर्स विजिट कर चुके हैं। आज मैं अपने नहीं आपके ही विचार आपसे साझा करने का प्रयास कर रहा हूँ। जगत सिंह बिष्ट प्रिय भाई हेमन्त जी, सर्वप्रथम, ई-अभिव्यक्ति पर 3,00,000 विजिटर्स के कीर्तिमान हेतु हार्दिक बधाई। निश्चित रूप से, किसी भी पैमाने पर, 2 वर्ष के कम समय में यह एक मील का पत्थर है। यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस यात्रा की परिकल्पना के समय से ही मुझे इसका एक महत्वपूर्ण सहयात्री और क्षण-क्षण का प्रत्यक्षदर्शी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। सच कहूँ तो मुझे यह यात्रा...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ प्रेरणास्रोत श्रीमती उज्ज्वला केळकर जी के 78 वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें ☆

ई-अभिव्यक्ति -संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆प्रेरणास्रोत श्रीमती उज्ज्वला केळकर जी के 78वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें  ☆ प्रिय मित्रो, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ मराठी साहित्यकार श्रीमति उज्ज्वला केळकर जी मराठी साहित्य की विभिन्न विधाओं की सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपके कई साहित्य का हिन्दी अनुवाद भी हुआ है। इसके अतिरिक्त आपने काफी हिंदी साहित्य का मराठी अनुवाद भी किया है। आप कई पुरस्कारों/अलंकारणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपकी अब तक 60 सेअधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें बाल वाङ्गमय -30 से अधिक, कथा संग्रह – 4, कविता संग्रह-2, संकीर्ण -2 ( मराठी )। इनके अतिरिक्त हिंदी से अनुवादित कथा संग्रह – 16, उपन्यास – 6, लघुकथा संग्रह – 6, तत्वज्ञान पर – 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल ही में आपकी दो पुस्तकें और प्रकाशित हुई हैं जिनकी जानकारी हम शीघ्र ही आपसे साझा करेंगे। जीवन के इस पड़ाव में भी आपका सीधा सादा सरल एवं मृदु स्वभाव, सक्रिय एवं स्वस्थ जीवन तथा साहित्य के प्रति समर्पण हमें सदैव प्रेरणा देता है। आपने ई-अभिव्यक्ति के मराठी...
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ई-अभिव्यक्ति – संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति का आज का अंक अग्रज एवं वरिष्ठ मराठी साहित्यकार स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी को समर्पित ☆ हेमन्त बावनकर

स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे   अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि     ☆ ई- अभिव्यक्ति का आज का अंक अग्रज एवं वरिष्ठ मराठी साहित्यकार स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी को समर्पित ☆ (विदर्भ क्षेत्र से सुप्रसिद्ध वरिष्ठ मराठी साहित्यकार एवं अग्रज  स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी का कल दिनांक 20 अगस्त 2020 को प्रातः साढ़े सात बजे हृदय विकार के कारण चंद्रपुर में आकस्मिक निधन हो गया। आपका निधन हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है। हमने एक विनोदी स्वभाव के मिलनसार एवं सेवाभावी अग्रज साहित्यकार को खो दिया। संयोगवश विगत मार्च में लॉक डाउन पूर्व एक पारिवारिक कार्यक्रम में नागपुर में आपसे मिला था, जो मेरे लिए अविस्मरणीय है।   हमारे सम्माननीय पाठक ई-अभिव्यक्ति केअंतरराष्ट्रीय पटल पर आपके साप्ताहिक स्तम्भ – स्वप्नपाकळ्या को  कभी विस्मृत नहीं कर सकते । आप मराठी साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर थे। वेस्टर्न  कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड, चंद्रपुर क्षेत्र से सेवानिवृत्त अधिकारी  थे ।  अब तक आपकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दो काव्य संग्रह एवं एक आलेख संग्रह (अनुभव कथन) प्रकाशित हो चुके हैं।...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 51 ☆ ई- अभिव्यक्ति मित्र संपादक मंडल का स्वागत ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–51 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 51 ☆ ई- अभिव्यक्ति का परिवर्तित स्वरुप - मित्र संपादक मंडल का स्वागत ☆ प्रिय मित्रो, सर्वप्रथम  स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी जी को विनम्र श्रद्धांजलि। आप से विनम्र अनुरोध है कि कृपया निम्न लिंक पर जाकर श्रद्धांजलि स्वरुप मेरी कविता अवश्य पढ़ें। ☆ गीत नया गाता था, अब गीत नहीं गाऊँगा ☆ इन दो वर्षों  से भी कम समय में प्राप्त आप सबके स्नेह एवं प्रतिसाद से मैं पुनः अभिभूत हूँ और इन पंक्तियों को पुनः लिखना मेरे जीवन के अत्यंत भावुक क्षणों में से एक है। विभिन्न उपलब्धियों ने मुझे असीमित ऊर्जा प्रदान की एवं एक जिम्मेदारी का अहसास भी कि आपको और अधिक स्तरीय सकारात्मक साहित्य दे सकूं। ईश्वर ने ई-अभिव्यक्ति संवाद के माध्यम से मुझे आप सबसे जुड़ने के ऐसे कई अवसर प्रदान किये हैं जिसके लिए मैं उनका सदैव कृतज्ञ हूँ । इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आपकी अपनी वेबसाइट को  2 वर्ष से भी कम समय में 2,53,500+ विजिटर्स मिल सकेंगे इसकी मैंने कभी कल्पना...
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हिन्दी साहित्य – ई-अभिव्यक्ति संवाद ☆ अतिथि संपादक की कलम से ……. अब तक 365 !….✍️ ☆ – श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  मैं अत्यंत कृतज्ञ हूँ सम्माननीय श्री संजय भरद्वाज जी का जिन्होंने जाने अनजाने में मेरे ह्रदय में ज्ञान एवं अध्यात्म को ज्योति को प्रज्ज्वलित किया। मैंने सन्देश दिया था कि ई- अभिव्यक्ति के अंक का प्रकाशन अगले 7 दिनों तक व्यक्तिगत एवं तकनीकी कारणों से स्थगित रहेगा किन्तु, श्री संजय भारद्वाज जी की एक आत्मीय पोस्ट ने मेरे अंतर्मन को झकझोर दिया...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 50 ☆ ई- अभिव्यक्ति का आज का अंक अनुजवत मित्र स्वर्गीय आनंद लोचन दुबे जी को समर्पित ☆☆ हेमन्त बावनकर

प्रिय आनंद    अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि     ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 50 ☆ ई- अभिव्यक्ति का आज का अंक अनुजवत मित्र स्वर्गीय आनंद लोचन दुबे जी को समर्पित ☆ प्रिय मित्रों,  वैसे तो इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति एक विशिष्टता लेकर आता है और चुपचाप चला जाता है। फिर छोड़ जाता है वे स्मृतियाँ जो जीवन भर हमारे साथ चलती हैं। लगता है कि काश कुछ दिन और साथ चल सकता । किन्तु विधि का विधान तो है ही सबके लिए सामान, कोई कुछ पहले जायेगा कोई कुछ समय बाद। किन्तु, आनंद तुमसे यह उम्मीद नहीं थी कि इतने जल्दी साथ छोड़ दोगे। अभी 19 मई को ही तो तुमसे लम्बी बात हुई थी जिसे मैं अब भी टेप की तरह रिवाइंड कर सुन सकता हूँ। और आज दुखद समाचार मिला कि 20 मई 2020 की रात हृदयाघात से तुम चल बसे। प्रिय मित्रों, आप जानना नहीं चाहेंगे यह शख्सियत कौन है ? आपके लिए मित्र आनंद, भारतीय स्टेट बैंक, सिमरिया, कटनी शाखा का शाखा प्रबंधक था।...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 48 ☆ ई- अभिव्यक्ति को अपार स्नेह एवं प्रतिसाद के लिए आप सबका ह्रदय से आभार ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–45 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 49 ☆ ई- अभिव्यक्ति को अपार स्नेह एवं प्रतिसाद के लिए आप सबका ह्रदय से आभार ☆ प्रिय मित्रों, इन दो महीनों में प्राप्त आप सबके स्नेह एवं प्रतिसाद से मैं पुनः अभिभूत हूँ और इन पंक्तियों को पुनः लिखना मेरे जीवन के अत्यंत भावुक क्षणों में से एक हैं। अप्रैल माह में हमने दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां आपसे साझा की थीं।  इन उपलब्धियों ने मुझे असीमित ऊर्जा प्रदान की एवं एक जिम्मेदारी का अहसास भी कि आपको और अधिक स्तरीय सकारात्मक साहित्य दे सकूं। ईश्वर ने ई-अभिव्यक्ति संवाद के माध्यम से मुझे आप सबसे जुड़ने के ऐसे कई अवसर प्रदान किये हैं । आपकी अपनी वेबसाइट को  2 वर्ष से भी कम समय में 2,00,500+ विजिटर्स मिल सकेंगे इसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। यह हमारे सम्माननीय लेखक गण का सतत प्रयास है जो हमारे प्रबुद्ध पाठकों को जोड़ने में सफल रहे हैं और सतत रहेंगे ऐसी ईश्वर से कामना है। मैं आप दोनों के मध्य एक...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 48 ☆ ई- अभिव्यक्ति India Book of Records और  Directory of Most Popular Blogs in India में दर्ज ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–45 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 48 ☆ ई- अभिव्यक्ति India Book of Records और  Directory of Most Popular Blogs in India में दर्ज ☆ प्रिय मित्रों, मैं अभिभूत हूँ और इन पंक्तियों को लिखना मेरे जीवन के अत्यंत भावुक क्षणों में एक हैं। 1 ½ वर्ष  पूर्व जब गुरुवर डॉ राजकुमार तिवारी ' सुमित्र' जी के निम्न आशीर्वचन से ई-अभिव्यक्ति का शुभारम्भ किया था जिसे मैंने गुरुमंत्र की तरह लिया और प्रयास करता हूँ कि उसका सतत पालन करूँ - सन्दर्भ : अभिव्यक्ति  संकेतों के सेतु पर, साधे काम तुरन्त । दीर्घवायी हो जयी हो, कर्मठ प्रिय हेमन्त ।। काम तुम्हारा कठिन है, बहुत कठिन अभिव्यक्ति। बंद तिजोरी सा यहाँ,  दिखता है हर व्यक्ति ।। मनोवृत्ति हो निर्मला, प्रकट निर्मल भाव। यदि शब्दों का असंयम, हो विपरीत प्रभाव।। सजग नागरिक की तरह, जाहिर  हो अभिव्यक्ति। सर्वोपरि है देशहित, बड़ा न कोई व्यक्ति ।। –  डॉ राजकुमार “सुमित्र” यह वेबसाइट मैंने स्वान्तः सुखाय बिना किसी अपेक्षा के प्रारम्भ की जिसका साक्षी आपका अपार  स्नेह तथा प्रतिसाद है, जिसे मैं सदैव अपने ह्रदय में संजो कर रखूंगा । यह आपका...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 47 ☆ रिश्तों / संबंधों पर आधारित रचनाएँ आमंत्रित ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–45 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 47 ☆ रिश्तों / संबंधों पर आधारित रचनाएँ आमंत्रित ☆  प्रिय मित्रों, ये रिश्ते भी बड़े अजीब होते हैं, जो हमें पृथ्वी के किसी भी कोने में  बसे जाने अनजाने लोगों से आपस में अदृश्य सूत्रों से जोड़ देते हैं। अब मेरा और आपका ही रिश्ता ले लीजिये। आप में से कई लोगों से न तो मैं व्यक्तिगत रूप से मिला हूँ और न ही आप मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिले हैं किन्तु, स्नेह का एक बंधन है जो हमें बांधे रखता है। आप में से कई मेरे अनुज/अनुजा, अग्रज/अग्रजा, मित्र, परम आदरणीय /आदरणीया, गुरुवर और मातृ पितृ  सदृश्य तक बन गए हैं। ये अदृश्य सम्बन्ध मुझमें ऊर्जा का संचार करते हैं। मेरा सदैव प्रयास रहता है और ईश्वर से कामना करता हूँ  कि मैं अपने इस सम्बन्ध को आजीवन निभाऊं। और आपसे भी अपेक्षा रखता हूँ कि मेरे प्रति यह स्नेह ऐसा ही बना रहेगा। मेरा और आपका सम्बन्ध मात्र रचनाओं के आदान प्रदान तक ही सीमित नहीं है,...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 46 ☆ (1) मानवता का अदृश्य शत्रु कोरोना (2) सोशल मीडिया के गुमनाम साहित्यकारों के नाम ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–46 ☆ (1) मानवता का अदृश्य शत्रु कोरोना (2) सोशल मीडिया के गुमनाम साहित्यकारों के नाम ☆  प्रिय मित्रों, आज के संवाद के माध्यम से मुझे पुनः आपसे विमर्श का अवसर प्राप्त हुआ है। मानवता का अदृश्य शत्रु कोरोना  आज विश्व में मानवता अत्यंत कठिन दौर से गुजर रही है।  विश्व के समस्त मानव जिनमें साहित्यकार / कलाकार / रंगकर्मी भी संवेदनशील मानवता के अभिन्न अंग हैं और  अत्यंत विचलित हैं ' कोरोना' जैसी विश्वमारी य महामारी जैसे प्रकोप /त्रासदी से । इतनी सुन्दर सुरम्य प्रकृति, हरे भरे वन-उपवन, नदी झरने,  घाटियां, पर्वत श्रृंखलाएं और कहीं कहीं तो  शांत बर्फ की सफ़ेद चादर और भी न जाने क्या क्या हमें  प्रकृति ने उपहारस्वरूप दिया है । आज हम मानवता के अदृश्य शत्रु  "कोरोना" को बढ़ती विकराल श्रंखला को तोड़ने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं । आज हम स्वयं को एक भयावह वैज्ञानिक उपन्यास के पात्र की तरह पाते है और दुःस्वन जैसी निर्मित परिस्थितियों का एक अत्यंत सुखांत अंत होगा ऐसी हम ईश्वर से कामना...
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