ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 39 – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 39 श्री गणेशाय नमः  सम्माननीय लेखक एवं पाठक गण सादर अभिवादन. परसाई-स्मृति अंक के पश्चात आपसे पुनः संवाद करने का अवसर प्राप्त हो रहा है.  24 अगस्त 2019 के पश्चात आप से ई-अभिव्यक्ति के माध्यम से  संपर्क  एवं रचनाएँ प्रकाशित न कर पाने का अत्यंत दुःख है. संभवतः ई-अभिव्यक्ति या ऐसी ही किसी भी लोकप्रिय होती हुई वेबसाईट की बढ़ती हुई लोकप्रियता एवं  बढ़ती हुई विजिटर्स की संख्या के कारण वायरस/हैकिंग जैसी तकनीकी  समस्याओं और उतार चढ़ाव से गुजरना होता है. हमारे लिए हमारे व्यक्तिगत डाटा के साथ ही हमारे सम्माननीय लेखकों एवं पाठकों का डाटा भी उतना ही महत्वपूर्ण है.  इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में रख कर हमने कुछ दिनों का विराम लेकर ई-अभिव्यक्ति को सुरक्षा की दृष्टि से और सुदृढ़ करने का प्रयास किया है.  अब आपकी वेबसाइट http://www.e-abhivyakti.com के स्थान पर सुरक्षित वेबसाइट (Secured Website)  https://www.e-abhivyakti.com हो गई है. किन्तु, आपको अपनी ओर से तकनीकी तौर पर कुछ भी नहीं करना है और जैसा पहले ऑपरेट या प्रचालित करते थे वैसे...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 38 – हेमन्त बावनकर

  ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 38    परसाई स्मृति अंक - 22 अगस्त 2019    आदरणीय गुरुवर डॉ राजकुमार सुमित्र जी और आचार्य भगवत दुबे जी के आशीर्वाद एवं मित्र द्वय श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी के अथक प्रयास तथा डॉ विजय तिवारी 'किसलय' जी के सहयोग से विगत 24 घंटों के समय में यह अविस्मरणीय अंक कुछ विलंब से ही सही आपको इस आशा से सौंप रहा हूँ कि आपका भरपूर स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहेगा। मैं श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी का हृदय से आभारी हूँ  जिन्होने इतने कम समय पर अमूल्य सामग्री/साहित्य/अप्रकाशित/ऐतिहासिक तथ्य एवं चित्र जुटाये। साथ ही उनके अतिथि संपादकीय के आग्रह स्वीकार करने के लिए हृदय से आभार। श्रद्धेय परसाई जी पर डिजिटल मीडिया में संभवतः यह प्रथम प्रयास होगा।   हेमन्त बवानकर  22 अगस्त 2019   (अपने सम्माननीय पाठकों से अनुरोध है कि- प्रत्येक रचनाओं के अंत में लाइक और कमेन्ट बॉक्स का उपयोग अवश्य करें और हाँ,  ये रचनाओं के शॉर्ट लिंक्स अपने मित्रों के साथ शेयर करना मत भूलिएगा। आप Likeके नीचे Share लिंक से सीधे...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 37 – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 37   मेरा सदैव प्रयत्न रहता है कि मैं ई-अभिव्यक्ति से जुड़े प्रत्येक सम्माननीय लेखक एवं पाठकों से संवाद बना सकूँ। मैं सीधे तो संवाद नहीं बना पाया किन्तु, सम्माननीय लेखकों की रचनाओं के माध्यम से अवश्य जुड़ा रहा।  एक कारण यह भी रहा कि हम  ई-अभिव्यक्ति को तकनीकी दृष्टि से और सशक्त बना सकें ताकि हैकिंग एवं संवेदनशील विज्ञापनों से बचा सकें। अंततः इस कार्य में आप सबकी सद्भावनाओं से हम सफल भी हुए। ई-अभिव्यक्ति में बढ़ती हुई आगंतुकों की संख्या हमारे सम्माननीय लेखकों एवं हमें प्रोत्साहित करती हैं।  हम कटिबद्ध हैं आपको और अधिक उत्कृष्ट साहित्य उपलब्ध कराने  के लिए।   हम प्रयासरत हैं कि आपको तकनीकी रूप से आगामी अंकों को नए संवर्धित स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सके। अब मेरा प्रयास रहेगा कि आपसे ई-संवाद अथवा अपनी रचनों के माध्यम से जुड़ा रहूँ । अंत में मैं पुनः इस यात्रा में आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ और मजरूह सुल्तानपुरी जी की निम्न पंक्तियाँ  दोहराना चाहता हूँ :   मैं अकेला ही चला था...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 36 – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 36    ई-अभिव्यक्ति में बढ़ती हुई आगंतुकों की संख्या हमारे सम्माननीय लेखकों एवं हमें प्रोत्साहित करती हैं।  हम कटिबद्ध हैं आपको और अधिक उत्कृष्ट साहित्य उपलब्ध कराने  के लिए। आपको यह जानकार प्रसन्नता होगी कि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक इतने कम समय में 36,000 से अधिक आगंतुक गण  ई-अभिव्यक्ति में  विजिट कर चुके होंगे।  इसके लिए हम अपने सम्माननीय लेखकों एवं पाठकों के हृदयतल से आभारी हैं। ई-अभिव्यक्ति एक ऐसा मंच है जिस पर नवोदित से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध साहित्यकारों द्वारा हम पर अपना विश्वास प्रकट कर अपनी रचनाएँ पाठकों से साझा की गई हैं।  हम पर वरिष्ठ साहित्यकारों का आशीर्वाद बना हुआ है जो हमें समय-समय पर मार्गदर्शन देते रहते हैं। हम प्रयासरत हैं ताकि साहित्यिक एवं तकनीकी रूप से आगामी अंकों को और नए संवर्धित स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सके। प्रासंगिक तौर पर यह उल्लेख करना मेरा कर्तव्य है कि हमारे नियमित स्तम्भ श्री जगत सिंह बिष्ट जी की "योग साधना" में श्री अनुपम खेर का...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद-35 – कविराज विजय यशवंत सातपुते (सोशल मिडिया चा यशस्वी वापर …. अभिव्यक्ती ठरली अग्रेसर!)

कविराज विजय यशवंत सातपुते अतिथि संपादक – ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–35     (मैं कविराज विजय यशवंत सातपुते  जी का हृदय से आभारी हूँ। उन्होने मेरा आग्रह स्वीकार कर आज के अंक के लिए अतिथि संपादक के रूप में अपने उद्गार प्रकट किए। श्री दीपक करंदीकर जी, महाराष्ट्र साहित्य परिषद, पुणे के माध्यम से आपसे संपर्क हुआ और पता ही नहीं चला कि कब मित्रता हो गई।  ई-अभिव्यक्ति के मराठी साहित्य को इन ऊंचाइयों तक पहुंचाने में आदरणीय कविराज विजय यशवंत सातपुते जी का विशेष योगदान रहा है।  आपके माध्यम से वरिष्ठ, अग्रज एवं नवोदित साहित्यकारों को ई-अभिव्यक्ति से जोड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मराठी साहित्य का अपना एक समृद्ध इतिहास रहा है। यदि ई-अभिव्यक्ति इस यज्ञ में मराठी साहित्य और साहित्यकारों से पाठकों को कुछ अंश तक भी जोड़ने में सफल हुआ तो यह हमारा सौभाग्य होगा। - हेमन्त बावनकर)   सोशल मिडिया चा यशस्वी वापर ..           . . . अभिव्यक्ती ठरली  अग्रेसर. !     ई-अभीव्यक्ती डॉट कॉम हे हिंदी, मराठी व इंग्रजी भाषिक साहित्यिकांसाठी...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 34 – ☆बाल-साहित्य विशेषांक☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 34 ☆बाल साहित्य विशेषांक ☆           कई बार अनायास ही कुछ संयोग बन जाते हैं। हम प्रयास अवश्य करते हैं किन्तु, ईश्वर हमें संयोग प्रदान करते हैं और हम मात्र माध्यम हो जाते हैं।  अब इस अंक को ही लीजिये।  कुछ रचनाएँ ऐसी आईं जिन्होने इस अंक को लगभग बाल साहित्य विशेषांक का स्वरूप दे दिया। कहते हैं कि -  बाल साहित्य का सृजन अत्यंत दुष्कर कार्य है। इसके लिए हमें अपने बचपन में जाना होता है। शायद इसीलिए विश्व में बाल साहित्य का अपना एक अलग स्थान है। फिर एक पालक और दादा/दादी/नाना/नानी के तौर पर हम कई बाल सुलभ प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाते जिनके उत्तर बाल साहित्य में छुपे  रहते हैं। आज के अंक में  दैनिक स्तम्भ श्रीमद भगवत गीता के पद्यानुवाद केअतिरिक्त पढ़िये निम्न विशिष्ट रचनाएँ - लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अंकित प्रथम माता-पुत्री द्वय सुश्री नीलम सक्सेना चन्द्र एवं सुश्री सिमरन चंद्रा जी द्वारा रचित अङ्ग्रेज़ी काव्य संग्रह "Winter shall fade"...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 33 – ☆ हमारे सम्माननीय साहित्यकार – सम्मान/अलंकरण ☆ – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 33                  हमारे सम्माननीय साहित्यकार – सम्मान/अलंकरण  हमारे ई-अभिव्यक्ति संवाद में मैं आपको ई-अभिव्यक्ति परिवार से जुड़े कई सम्मानित साहित्यकार सदस्यों की विगत कुछ समय पूर्व प्राप्त उपलब्धियों के बारे में अवगत कराना चाहूँगा। जब हमारे परिवार के सदस्य गौरवान्वित होते हैं तो हमें भी गर्व भी का अनुभव होता। नीलम सक्सेना चंद्रा – नीलम सक्सेना चन्द्र जी को 1 मार्च 2019 को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा सोहनलाल द्विवेदी सम्मान से नवाजा गया। यह उनकी किशोर/किशोरियों की कहानी की पुस्तक “दहलीज़” हेतु मिला। यह सम्मान माननीय विनोद तावड़े जी, केबिनेट मंत्री महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रदान किया गया। 56वीं पुस्तक Authorpress India द्वारा प्रकाशित काव्य  एक कदम रौशनी की ओर नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित बच्चों की चित्रकथा “कसम  मटमैले मशरूम की । इस चित्रकथा की 20,000 प्रतियाँ प्रकाशित डॉ विजय तिवारी ‘किसलय’ – प्रसिद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था कादंबरी, जबलपुर द्वारा “स्व. शिवनारायण पाठक सम्मान”। इसके अतिरिक्त आपको नई दुनिया के ‘जबलपुर साहित्य रत्न’ सहित अनेक स्थानीय, प्रादेशिक एवं राज्यस्तरीय सम्मान एवं पुरस्कार...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 32 – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 32                आज के अंक में दो कवितायें प्रकाशित हुई हैं । सुश्री सुषमा सिंह जी, नई दिल्ली  की "कविता" एवं श्री मनीष तिवारी जी, जबलपुर की "साहित्यिक सम्मान की सनक"।  आश्चर्य और संयोग है की दोनों ही कवितायें सच को आईना दिखाती हैं। सुश्री सुषमा सिंह जी की "कविता" शीर्षक से लिखी गई कविता वास्तव में परिभाषित करती है कि कविता क्या है?  यह सच है कि संवेदना के बिना कविता कविता ही नहीं है। मात्र तुकबंदी के लिए शब्दसागर से शब्द ढूंढ कर पिरोने से कविता की माला में वह शब्दरूपी पुष्प अलग ही दृष्टिगोचर होता है और माला बदरंग हो जाती है। इससे तो बेहतर है अपनी भावनाओं को गद्य का रूप दे दें। इसी परिपेक्ष्य में मैंने अपनी कविता "मैं मंच का नहीं मन का कवि हूँ"  में कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं जो मुझे याद आ रही हैं।   जब अन्तर्मन में कुछ शब्द बिखरते हैं जब हृदय में कुछ उद्गार बिलखते हैं   तब...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 31 – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–31                कई बार विलंब एवं अत्यधिक थकान के कारण आपसे संवाद नहीं  कर पाता। कई बार प्रतिक्रियाएं भी नहीं दे पाता और कभी कभी जब मन नहीं मानता तो अगले संवाद में आपसे जुड़ने का प्रयास करता हूँ। अब कल की ही बात देखिये । मुझे आपसे कई बातें करनी थी फिर कतिपय कारणों से आपसे संवाद नहीं कर सका। तो विचार किया कि - चलो आज ही संवाद कर लेते हैं। प्रोफेसर चित्र भूषण श्रीवास्तव 'विदग्ध' जी केंद्रीय विद्यालय, जबलपुर में मेरे प्रथम प्राचार्य थे। उनका आशीष अब भी बना हुआ है। ईश्वर ने मुझे उनके द्वारा रचित श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद की शृंखला प्रकाशित करने का सौभाग्य प्रदान किया। ईश्वर की कृपा से वे आज भी स्वस्थ हैं एवं साहित्य सेवा में लीन हैं। यदि मेरी वय 62 वर्ष है तो उनकी वय क्या होगी आप कल्पना कर सकते हैं? श्री जगत सिंह बिष्ट जी भारतीय स्टेट बैंक में भूतपूर्व वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं।...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 30 – हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–30               आज मई दिवस है, आप छुट्टियाँ माना रहे होंगे। वैसे तो मई दिवस मनाने के कई  कारण हैं । विश्व के विभिन्न भागों में कई लोग इसलिए भी मई दिवस मनाते हैं  क्योंकि वे  इस वसंत ऋतु की शुरुआत मानते हैं । किन्तु , मैंने जब से होश संभाला और जाना तब से मुझे पता चला कि मई दिवस को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। जब मैंने इसके तह में जाने की कोशिश की तो पता चला कि कई परेडों और हड़ताल के बात फ़ैडरेशन ऑफ ओर्गेनाइज्ड ट्रेड एंड लेबर यूनियनों नें अनौपचारिक रूप से अक्तूबर 1886  में तय किया कि काम का समय प्रतिदिन आठ घंटे निर्धारित किया जाए ताकि मजदूर पूरे दिन के कार्य में अत्यधिक श्रम और तनाव से स्वयम को बचा सके। अभी अभी प्राप्त श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी की कविता आपसे साझा करना चाहूँगा। "मजदूर दिवस " यदि पेट पीठ से मिला यदि बंडी में छेद मिला चिलचिलाती धूप...
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