सूचनाएँ/Information ☆ ​म प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भोपाल एवं छिंदवाड़ा ईकाई के संयुक्त तत्वावधान में जनकवि मुकुटबिहारी सरोज की जन्मशती आयोजित ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ जहाँ गिरता है पसीना, वहाँ चाँद उगता ही है ! – मुकुटबिहारी “सरोज” ☆

म प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भोपाल एवं छिंदवाड़ा ईकाई के संयुक्त तत्वावधान में जनकवि मुकुटबिहारी सरोज की जन्मशती आयोजित

सतपुड़ा की उपत्यका में फैले नीलाभ अंधेरे, महुआ, आम, नीम, बाँस और पलाश के दहकते फूलों की सुंदरता तथा उष्मा से अनुप्राणित अगर कोई कार्यक्रम हो, वह भी काव्यांजलि का तो उसके मोहक स्वरूप की कल्पना सहजतः की जा सकती है।

मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल एवं छिंदवाड़ा ईकाई के संयुक्त तत्वावधान में जनकवि मुकुटबिहारी सरोज की जन्मशती का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सुख्यात बुन्देलखण्डी कवि महेश कटारे सुगम की अध्यक्षता में संपन्न इस सारस्वत आयोजन का शुभारंभ मानवीय समाज रचना के संकल्प से हुआ। प्रथम वक्ता हेमेन्द्र राय ने सरोज जी की पंक्ति से आह्वान किया—“इन हवाओं पर कभी विश्वास कर लेना न तुम”

“तब तलक मत लिख, जब तलक आँख पानी से न भर जाए”–कवि की इन पंक्तियों के साथ प्रसिद्ध गीतकार कवयित्री डाॅ मालिनी गौतम ने कहा–समय की धड़कनों को गहराई से सुनती हैं उनकी रचनाएं। जागरण के आग्रह की कविता है उनकी।

सरोज जी का काव्यपाठ का अनूठा अंदाज़ श्रोताओं को बाँधे रखता था। पिता श्री से जुड़े संस्मरणों को श्रोताओं से साझा करते हुये पुत्री मान्यता सरोज ने कहा कि उन्होंने आपातकाल का विरोध किया तो डी डी और रेडियों से ब्लैकलिस्ट कर दिये गए।

वे जैसा जीते थे वैसा लिखते थे। वे एक डेमोक्रेटिक पिता थे। अपने बच्चों पर पिता होने का भार नहीं ढोया।

डॉ मनीषा जैन ने उनके दो काव्य-संग्रह किनारे के पेड़ और पानी के बीज के हवाले से उनके विद्रोही व्यक्तित्व को रेखांकित किया–“जहां गिरता है पसीना। वहाँ चाँद उगता ही है। “सरोज की कविता जीवन का आसव है। “जिसमें मानव मन की पीड़ा है, आक्रोश है और कश्मकश है।

प्रो लक्ष्मीकांत ने उन्हें पूर्ण कवि निरूपित किया। उन्होंने कम लिखा पर पूरी ईमानदारी से जनमन तक पहुँच जाए ऐसी भाषा में लिखा। “जिसने सहा नहीं उसने कहा नहीं। “उनके कृतित्व पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध हो रहे हैं।

अध्यक्ष महेश कटारे सुगम की दृष्टि में वे किसान कवि थे। सर्वथा एवं सर्वदा अनुकरणीय।

मुख्य अतिथि इन्दिरा किसलय ने कहा कि समय के विशाल अंतराल के बावजूद उनकी कविताएं उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी कभी थीं। जिनमें दहक और महक दोनों हैं। यही उनके सृजन को कालजयी बनाती है। उनमें संघर्ष का शंखनाद तो है पर आशावाद भी उतना ही प्रबल है। व्यवस्थागत दिद्रूपताओं ने उनकी कविता को उर्वरक प्रदान किया– ” सृजन कभी मंजूर नहीं करता पहरे तलवार के”। “वे निष्कपट अभिव्यक्ति के बादशाह हैं। “

इस अवसर पर “यादों में सरोज” इस जन्मशती विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया।

द्वितीय सत्र में सर्व श्री महेश कटारे सुगम, इन्दिरा किसलय, मालिनी गौतम, अभिषेक वर्मा, लक्ष्मणप्रसाद डेहरिया, ओमप्रकाश नयन, हेमेंद्र राय, विनयप्रकाश जैन, अंजुमन आरजू, श्रृति कुशवाहा, महेश दुबे, प्रभात कटारे, अवधेश तिवारी, आशीष मोहन, तथा राकेश राज ने बेहतरीन कविताएं प्रस्तुत कीं। नन्ही बच्ची आन्या ठाकुर ने सरोज जी की कविताओं की धारासार प्रस्तुति दी।

चित्रकार कवि रोहित रूसिया ने सरोज जी के गीतों का सस्वर सरस पाठ किया। कार्यक्रम का प्रारंभ ही ओशिन धारे की सांगीतिक प्रस्तुति से हुआ जिसने वातावरण को सुरों की बारिश में भिगो दिया।

चित्रकार ध्रुव के, सरोज के काव्यांशों पर आधारित पोस्टरों की धूम रही।

सचिव शेफाली शर्मा का सधा हुआ सहज संचालन मंत्रमुग्ध कर गया।

बीना, भोपाल, छिंदवाड़ा आदि स्थानों से पधारे कवियों ने भावपूर्ण कविताएं पेश कीं।

प्रबुद्ध गंभीर एवं जिन्दादिल साहित्यजीवी मान्यवरों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऊँचाई एवं अपूर्व गरिमा प्रदान की। सर्व श्री– गोवर्द्धन यादव, पवन शर्मा, रणजीतसिंह परिहार, डाॅ उर्मिला खरपुसे, डॉ अमर सिंह, अशोक जैन, शैलेन्द्र तिवारी, मोहिता जगदेव, हेमंत झा, राजकुमार चौहान, पद्मा जैन, दीप विश्वकर्मा, शरद मिश्रा, अंकुर वाल्मीकि, रामलाल सराठे, रश्मि, राजेन्द्र यादव, अनुराग श्रीवास्तव, अभिनव श्रीवास्तव, संजय औरंगाबादकर आदि प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति ने आयोजन को प्रकाम्य ऊँचाई प्रदान की।

“मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन” के अध्यक्ष एवं देशबंधु पत्र समूह के संपादक आदरणीय “पलाश सुरजन सर” इस महनीय आयोजन के श्रेयार्थी रहे।

दिनेश भट्ट के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

 साभार – सुश्री इंदिरा किसलय 

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ ​बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की कार्यशाला संपन्न ☆ साभार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की कार्यशाला संपन्न ☆ साभार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆

बच्चों के संवेगात्मक विकास में कहानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं – ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश’

भोपाल। बाल साहित्य शोध सृजन पीठ, साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा आयोजित बाल साहित्य लेखन कार्यशाला बड़ी सफलता के साथ संपन्न हुई। इस एक दिवसीय कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए रोचक, मनोरंजक, उपदेशात्मक और ज्ञानवर्धक साहित्य सृजन को प्रोत्साहित करना था।

मुख्य अतिथि शासकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मंगलेश्वरी नेशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों का साहित्य रोचकता से भरपूर, मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक होना चाहिए, ताकि बच्चे स्वाभाविक रूप से पढ़ने और सीखने की ओर आकर्षित हों।

बीज वक्तव्य देते हुए बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की निदेशक डॉ. मीनू पांडे ‘नयन’ ने कहा कि बाल साहित्य में कहानी, कविता, लोरी, पहेलियाँ, गीत आदि सभी विधाएँ शामिल हैं। इसमें बच्चों की बाल-सुलभ जिज्ञासाओं, कल्पनाओं और अभिव्यक्ति का स्थान होना चाहिए। यह रोचक और मनोरंजक होने के साथ-साथ उनके संवेगात्मक विकास में सहायक होना चाहिए।

प्रथम सत्र कहानी लेखन कार्यशाला पर केंद्रित रहा है। वरिष्ठ बाल साहित्यकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ने कहा कि कहानी बच्चों के संवेगात्मक विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने रोचक ढंग से दो-तीन कहानियाँ सुनाकर समझाया कि कहानी कैसे लिखी जाती है। बाल मन की कहानियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बच्चों से विविध विषयों पर कहानी लेखन करवाया। बच्चों ने मंच पर आकर अपनी रचनाएँ पढ़ीं। उनकी प्रेरणा से हिंदी की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अर्चना भट्ट ने भी एक बाल कहानी सुनाकर सभी को चकित कर दिया।

द्वितीय सत्र कविता और बाल गीतों पर आधारित था। वरिष्ठ साहित्यकार प्रेक्षा सक्सेना ने बाल गीतों पर दिशा-निर्देश दिए और क्षेत्रीय बोलियों के गीतों के माध्यम से बच्चों से सीधा संवाद किया। बच्चों ने विविध विषयों पर कविताएँ लिखकर मंच पर उत्साह से पाठ किया।

कार्यक्रम के संचालनकर्ता डॉ. शोभना तिवारी ने कहा कि बच्चों का साहित्य ज्ञानवर्धक होने के साथ उपदेशात्मक भी होना चाहिए, जिससे जीवन की नींव मजबूत हो और संस्कारों की अभिवृद्धि हो। रहीम और कबीर के दोहे इसके सशक्त उदाहरण हैं, जो प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक जीवन की संचित निधि बने रहते हैं।

वैदेही कोठारी ने पर्यावरणीय चेतना और प्रकृति संरक्षण पर जोर देते हुए प्रकृति-परक रचनाओं के लेखन को रेखांकित किया। श्वेता नागर ने पढ़ने की अभिरुचि बढ़ाने के लिए पुस्तकालय सृजन उत्सव आयोजित करने और डायरी लेखन के दिशा-निर्देश दिए। रश्मि पंडित ने मुहावरे और लोकोक्तियों की कार्यशाला चलाई तथा कहा कि ये शिक्षाप्रद, रोचक, ज्ञानवर्धक और मनोरंजक होते हैं।

कार्यशाला में शहर के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के 55 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों का स्वागत हिंदी पंचांग से समन्वित पॉकेट डायरी और कलम भेंट करके किया गया। प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। अर्थ दशोत्तर प्रतिष्ठा तिवारी और हार्दिक अग्रवाल ने डॉ. मीनू पांडे को शाल, स्मृति चिन्ह और साहित्य भेंट कर स्वागत किया। सरस्वती वंदना प्रिया उपाध्याय ने प्रस्तुत की।

विभिन्न विद्यालयों के पचपन से अधिक छात्र-छात्राएं, उनके अभिभावक, माता -पिता, शिक्षक-शिक्षिकाएँ, महाविद्यालय के प्राध्यापक आदि सौ से भी अधिक सहभागी उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन डॉ. मीनू पांडे ने किया। यह कार्यशाला बाल साहित्य सृजन में नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाली सिद्ध हुई।

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कविता ☆ संसार दोघांचा + संपादकीय निवेदन – डॉ. सोनिया कस्तुरे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ डॉ. सोनिया कस्तुरे ☆

🎇अ भि नं द न 🎇

दक्षिण महाराष्ट्र साहित्य सभा, कोल्हापूर आणि शब्दांगण साहित्यिक सांस्कृतिक व्यासपीठ, मिरज यांच्या संयुक्त विद्यमाने साहित्य संमेलन मिरज येथे संपन्न झाले. या संमेलनात आपल्या समुहातील कवयित्री डॉ. सोनिया कस्तुरे यांना,  नाही उमगत ‘ ती ‘ अजूनही या त्यांच्या काव्यसंग्रहाला ‘ऋतुजा माने साहित्य पुरस्कार’ देऊन गौरविण्यात आले आहे.

ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे डॉ सोनिया कस्तुरे यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा 💐🌹💐

– संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

पुरस्कार प्राप्त काव्य संग्रहातील कविता

? कवितेचा उत्सव ?

☆ “संसार दोघांचा” ☆ डॉ सोनिया कस्तुरे

तू म्हणतोस संसार दोघांचा,

मग दोघ मिळून करु या ना…

*

तू चूल पेटवं, मी भाकरी करते,

तू भाजी चीर मी फोडणी देते,

मी कपडे धुते, तू वाळत टाक;

तू म्हणतोस संसार दोघांचा

मग दोघं मिळून करु या ना..!

*

भातुकलीत मी स्वयंपाक केला,

आता ही मीच सगळं करते ;

झोपडीत तर मी खूप राबते,

महालात ही मीच…

मी कोणत्याही पदावर असूदे

घर कामातून माझी सुटका नाही

तू म्हणतोस घर दोघांचं,

घर काम ही मिळून करु या ना,

तू म्हणतोस संसार दोघांचा

मग दोघ मिळून करु या ना..!

*

मी आई हे “सत्य”,

तू बाप हा “विश्वास”

मी जन्म देणं निसर्ग नियम,

तू संगोपनाला हातभार लाव ना,

 सत्य आणि विश्वास पेरत

मिळून मुलांना घडवूया ना…

तू म्हणतोस कुटुंब सर्वस्व तर

टी. व्ही, मोबाईल बाजूला ठेवून

पालक सभेला मिळून जाऊया ना…

तू म्हणतोस संसार दोघांचा

मग दोघ मिळून करु या ना..!

*

तुझ्या सुखदुःखाची मी सोबती

घराच घरपण मी, म्हणतोस,

मी थोडी “बाप” होते

तू थोडा “आई” हो ना…

मी तुझी आर्धांगिनी

तू माझं अर्धांग हो ना…

तू म्हणतोस संसार दोघांचा

मग दोघं मिळून करु या ना..!

*

© डॉ.सोनिया कस्तुरे

विश्रामबाग, जि. सांगली

भ्रमणध्वनी:- 9326818354

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ ☆ व्याख्यान : हिंदी लोकल से ग्लोबल — हिंदीतर प्रांत मातृभाषा दिवस, युवा रचनापाठ ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ व्याख्यान : हिंदी लोकल से ग्लोबल — हिंदीतर प्रांत मातृभाषा दिवस, युवा रचनापाठ ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

शुक्रवार, दिनांक 6 मार्च 2026 को हिंदी विभाग मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और वैश्विक हिंदी परिवार, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में हिंदीतर प्रांत मातृभाषा दिवस, युवा रचनापाठ और व्याख्यान का आयोजन मॉडर्न महाविद्यालय में किया गया थाl

कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि डॉ. जवाहर कर्णावट डॉक्टर दामोदर खडसे डॉ. सुनील देवधर, डॉ. नीलम जैन, डॉ. प्रेरणा उबाळे, स्वरांगी साने के हाथों सरस्वती पूजन संपन्न हुआ और युवा पाठ कार्यक्रम का उद्घाटन हिंदी विभाग की परंपरा के अनुसार पौधे को पानी देते हुए उसे सींचकर काव्यपाठ करने वाले हमारे हिंदी के प्रिय छात्रों के शुभ करकमलों से कार्यक्रम का उद्घाटन किया गयाl

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा उबाळे ने कार्यक्रम के आरंभ में हिंदी विभाग में विभागाध्यक्षा के रूप में पिछले 10 वर्षों से अविरत चलने वाली विभिन्न गतिविधियों से परिचय कराया – जैसे, आज का शब्द, आज का मुहावरा, अरुणिमा साहित्यिक पत्रिका, राष्ट्रीय हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता, विज्ञापन लेखन प्रतियोगिता, काव्यपाठ, हिंदी फिल्म क्लब, फिल्म स्क्रीनिंग, विभिन्न विषयों पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशालाएं, बिदाई समारोह, पुराने छात्रों का स्नेहमिलन, विभिन्न व्याख्यानमालाएँ आदि की जानकारी अतिथि मान्यवर और उपस्थितों को दीl सभी का स्वागत उन्होंने शॉल और मॉडर्न महाविद्यालय की पत्रिका देते हुए कियाl

युवा रचना पाठ में उस्मान मोहम्मद (कश्मीर), शाहिद बशीर (कश्मीर), सदुर्शना अरूणागिरी (श्रीलंका), मुकेश रावत(कुमाऊं, हिमालय), साक्षी कांबले, योगेश काले, विद्या केलकर-सराफ (महाराष्ट्र), ने अपनी मातृभाषाओं में अनुक्रमत: कश्मीरी, तमिल, कुमाऊनी, हिंदी, मराठी, भाषा में सारगर्भित कविताएं पढ़ीl इन छात्रों की कविताओं ने सबका मन मोह लियाl इस समय हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय नेl युवा रचना पाठ होने के बावजूद भी हिंदी विभाग के आरंभिक समय की एक छात्रा को निमंत्रित किया थाl हिंदी विभाग के प्रथम अध्यक्ष डॉ. श्रीरंग संगोराम की छात्रा रह चुकी हैंl विद्या केलकर- सराफ (1979) ने मॉडर्न महाविद्यालय और हिंदी विभाग की स्मृतियों को तजा करते हुए अपनी कविता पढ़ीl साथ ही अनेक वर्षों बाद विभाग में आने की ख़ुशी जताईl भूतकाल और वर्तमान समय के हिंदी विभाग के छात्रों के काव्यपाठ का सुंदर मिलाप यहाँ दिखाई दियाl

डॉ. प्रेरणा उबाळे ने अतिथि मान्यवारों का परिचय करायाl इसके बाद महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्याध्यक्ष और आकाशवाणी पुणे के पूर्व सहायक निदेशक, हिंदी लेखक डॉ. सुनील देवधर ने व्याख्यान के आयोजन और हिंदी के वैश्वीकरण के संदर्भ में भूमिका सामने रखीl इस्रायल का उदाहरण देते हुए उन्होंने यह बताया कि हिब्रू भाषा कैसे अनिवार्य करने के बाद जीवंत हो उठीl

प्रस्तुत कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि डॉ. जवाहर कर्णावट, भोपाल ने “हिंदी लोकल से ग्लोबल” विषय पर अपना व्याख्यान दियाl उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि जब हमें हवा, भोजन और पानी शुद्ध चाहिए तो हिंदी शुद्ध क्यों नहीं ? उन्होंने यह प्रश्न उपस्थित किया कि हम हिंदी को देवनागरी के बजाए रोमन में क्यों लिखते हैं ? हिंदी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं के विश्व में विस्तार की जानकारी उन्होंने प्रदान की? डॉ. जवाहर कर्णावट ने विश्व के लगभग 60 देशों में यात्रा करते हुए वहां हिंदी की स्थिति का जायजा लेकर ‘विश्व में हिंदी’ शीर्षक पुस्तक की रचना की वह पुस्तक उन्होंने हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ. प्रेरणा को प्रदान कीl डॉ. जवाहर कर्णावट हिंदी भाषा, साहित्य के संदर्भ में संपूर्ण विश्व में अनुसंधान कार्य कर रहे हैंl उनके हिंदी से संबंधित समर्पण भाव से किए गए कार्य के कारण फिजी की संसद में उन्हें हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित किया जा चुका हैl

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. दामोदर खडसे, जिन्होंने भारतीय सभी मंत्रालयों, समितियों, संस्थाओं से जुड़कर हिंदी से संबंधित कार्य किया है तथा नई शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं के संदर्भ में जिनका ठोस योगदान रहा हैl उन्होंने अपने व्याख्यान में प्रवासी हिंदी साहित्यकार तथा विदेशों में व्याप्त हिंदी की स्थिति और गति के संदर्भ में अपने अनुभव कथन किएl

इस कार्यक्रम को डॉ. नीलम जैन प्रवासी हिंदी साहित्यकार का सानिध्य प्राप्त हुआl उन्होंने अपने भाषण में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, प्रवासी हिंदी साहित्य और वैश्विक हिंदी के संदर्भ में सबसे संवाद कियाl साथ ही प्रस्तुत कार्यक्रम के आयोजन हेतु डॉ. प्रेरणा को बधाई दीl

कार्यक्रम का आभारज्ञापन कवयित्री, पत्रकार डॉ. स्वरांगी साने ने कियाl वैश्विक हिंदी परिवार की प्रांत संयोजक के रूप में संयुक्त तत्वाधान में हिंदी विभाग से जुड़कर इस कार्यक्रम के आयोजन में वह सक्रियता से जुटी रहीl

इस अवसर पर हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय के प्रा. सूरज बिरादर, रेशमा कांबले, शुभम राऊत उपस्थित थे तथा विभाग के स्नातक और स्नातक स्तर के छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थेl इस कार्यक्रम में हिंदी कहानीकार डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, नाटककार डॉ. रमेश मिलन भारतीय संस्कृति की अध्येता डॉ. ममता जैन, हिंदी कवि हितेश व्यास, मंजू चोपड़ा, श्री. देशमुख आदि हिंदी-मराठी लेखक पत्रिकाओं के कुछ संपादक, अन्य महाविद्यालयों के प्राध्यापक भी उपस्थित रहेंl संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रेरणा उबाळे ने कियाl कार्यक्रम के अंत में काव्यपाठ करने वाले सभी छात्रों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गयाl संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत सुचारू ढंग से संपन्न हुआl सभी मान्यवरो ने स्व. शंकरराव कानिटकर हिंदी विभागीय ग्रंथालय को भेंट दीl ग्रंथालय को 600 पुस्तकें प्रदान करने वाले डॉ. दामोदर खड़से और अन्य विद्वानों ने अपनी पुस्तकें संजोकर रखने पर प्रसन्नता व्यक्त कीl

साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे

अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे

संपर्क- 7028525378

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कविता ☆ ढगांनी जसे ग्रासिले… + संपादकीय निवेदन – श्री राजकुमार कवठेकर – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

श्री राजकुमार कवठेकर

💐 अ भि नं द न 💐

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ गझलकार श्री राजकुमार कवठेकर यांचा क्लेशवृक्षाच्या छायेतहा दुसरा कवितासंग्रह आज १०मार्च २०२६ रोजी प्रकाशित होत आहे. हा संग्रह कोल्हापूरच्या अक्षरदीप प्रकाशनने प्रकाशित केला आहे.

ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे श्री. कवठेकर यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा 💐

  संपादक मंडळ

 ई अभिव्यक्ती मराठी

आज प्रकाशित होत असलेल्या संग्रहातील एक कविता –

? कवितेचा उत्सव ?

☆ “ढगांनी जसे ग्रासिले” ☆ श्री राजकुमार कवठेकर ☆

ढगांनी जसे ग्रासिले सुर्यबिंबा

 क्षणार्धात सर्वत्र सांजावले

चकाकून जाती विजांच्या शलाका

 थवे पाखरांचे घरी पातले

 *

धुळीचे कुठे लोळ गेले नभाला

 पुन्हा शांतले वृक्ष.. वेली.. पिले

भुईचे तसे तापलेल्या छतांचे

 उदासीन जे चित्त, आनंदले

 *

उभारून बाहो जणू वृक्ष वेली

 वरूणास व्याकूळ हाकारती

” पुन्हा यौवनाची अम्हा दे उभारी.. “

 तृणांकूर माळासवे प्रार्थती

 *

लडीवाळ बाळापरी पावसाच्या

 नभाच्या कुशीतून आल्या सरी

झळांचा बने थंडसा मंद वारा

 घुमे रानझाडीतुनी बासरी

 *

मघा साठले.. दाटले मोकळे हो

 पुन्हा ऊन हे कोवळे सांडले

तुझ्या आठवांचे ऋतू जीववेडे

 मलाही दिसांनी किती भेटले

© श्री राजकुमार कवठेकर

मिरज

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, क्षितिज पुणे एवं हिंदी आंदोलन परिवार का आयोजन – भ’ से भाषा, ‘भ’ से भारत’ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, क्षितिज पुणे एवं हिंदी आंदोलन परिवार का आयोजनभ’ से भाषा, ‘भ’ से भारत’  

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, क्षितिज पुणे एवं हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार 7 मार्च को ‘भ’ से भाषा, ‘भ’ से भारत’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों की विविध भाषाओं की कविताओं और लोकगीतों की वाचन, गायन, नृत्य एवं अभिनय द्वारा प्रस्तुति की गई।

इसके लेखक, निर्देशक, सूत्रधार- संजय भारद्वाज थे। कार्यक्रम का निर्माण क्षितिज इन्फोटेनमेंट ने किया था। रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक डॉ. जवाहर कर्नावट आयोजन के मुख्य अतिथि थे। उद्घाटन सत्र के अपने वक्तव्य में हिंदी के वैश्विक होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए और अधिक काम करना होगा। आपने भाषाई स्वाभिमान को सदैव जगाए रखने पर भी बल दिया। कार्यक्रम का आरंभ संजय भारद्वाज की कविता और उदीयमान नृत्यांगना प्राची पुजारी के कथक की जुगलबंदी से हुई। तत्पश्चात विभिन्न भारतीय भाषाओं की कविताओं एवं उनके भावानुवाद, विभिन्न ललित कलाओं द्वारा मंच पर आते गए। प्रमुख रचनाकारों, वाचकों एवं कलाकारों में सुधा भारद्वाज, वीनु जमुआर, ऋता सिंह, विनीता सिन्हा, गौरी कुलकर्णी, अनिल अब्रोल, सतीश कुमार, आशीष त्रिपाठी, अपर्णा कडसकर, डॉ. ज्योति कृष्ण, कंचन त्रिपाठी, गौतमी चतुर्वेदी पांडेय, कंचन त्रिपाठी, ऊर्जा वाईकर, पूर्णिमा पांडेय, शशिकला गुंडलूपेट, अपूर्व शर्मा, प्राची पुजारी, अंगिता कुमार, अनुपम पांडेय, रितेश बुरूड आदि सम्मिलित थे। विशेष बात यह रही कि कविता या गीत प्रस्तुत करने वाले हर रचनाकार ने भारत के किसी राज्य विशेष का परिधान धारण किया था। कार्यक्रम में हिंदी, संस्कृत, मराठी, बंगाली, कन्नड़, पंजाबी, खोरठा, असमिया, बुंदेलखंडी, सधुक्कड़ी आदि भाषाओं की रचनाओं का पाठ हुआ। रंगमंचीय शैली में प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य तथा कलाप्रेमी उपस्थित थे। प्रमुख उपस्थितों में डॉ. केशव प्रथमवीर, डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, श्री हेमंत बावनकर, डॉ. विपिन पवार, डॉ. रमेश गुप्त, डॉ. कांतिदेवी लोधी, डॉ. रजनी रणपिसे एवं अन्य अनेक प्रतिष्ठित हस्ताक्षर सम्मिलित थे।

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ संपादकीय निवेदन – The Art Avenue International Brooklyn Galleria Excellence Award 2026 – डॉ. भारती माटे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

डॉ. भारती माटे

💐 अ भि नं द न !! 💐 हार्दिक अभिनंदन !!!💐

आपल्या ई-अभिव्यक्ती साहित्य मंचातर्फे आपण गेली चार वर्षे अतिशय देखणा असा दिवाळी विशेषांक प्रकाशित करतो आहोत. हे देखणेपण अंकाच्या मुखपृष्ठापासूनच वाचकांचे लक्ष वेधून घेते. या अंकांचे फार सुंदर आणि देखणे मुखपृष्ठ आपल्याला तयार करून देणाऱ्या चित्रकार सुश्री डॉ. भारती माटे यांचे आपल्या सर्वांतर्फे खास अभिनंदन करण्यासाठी आजचे हे खास संपादकीय… 

नुकताच डॉ. भारतीताई यांना “The Art Avenue International Brooklyn Galleria Excellence Award 2026 in the category of Paintings! “ हा आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार देऊन गौरवण्यात आलेलं आहे. 


या संस्थेविषयी आणि पुरस्काराविषयी अगदी थोडक्यात सांगायचे तर – –  

Art Avenue is the leading International Art Competition & Exhibition in INDIA I UK & INTERNATIONAL ARTIST’S International Brooklyn Award by Art Avenue is an independent Art Center of Excellence that offers a platform for everyone to create, collaborate and reflect upon social issues & others through the arts.

या निमित्ताने डॉ. भारती माटे यांच्या इथपर्यंतच्या यशस्वी वाटचालीबद्दल थोडेसे जाणून घेऊ या. 

डॉ.भारती माटे – –  स्टेट बँकेत ३३ वर्ष नोकरी आणि बँकेत असतानाच छंद म्हणून जोपासायला सुरुवात केलेल्या चित्रांचं पुढे व्यवसायात रूपांतर करण्यात त्यांनी सुयश मिळवलेले आहे.. आत्तापर्यंत तीन आर्ट रिसर्च प्रोजेक्ट केले – – –                     

पहिला प्रोजेक्ट :

मध्यप्रदेशातील भीमबेटक्याच्या गुफांमधील, सात कालखंडातील काढलेल्या चित्रशैली आणि चित्रांचा प्रवास. साधारणपणे ४००००-१००००० वर्षांपूर्वीची शिलाचित्रे, आणि त्याचे विशेष म्हणजे रंगीत चित्रे, (pigmented Rock art) ह्यावर संशोधनात्मक  लेखन  व चित्र निर्मिती.

दुसरा प्रोजेक्ट :

सिंधू संस्कृतीतील कलाविष्कार – – त्यांनी साधारणपणे दहा ते बारा वर्षे ह्या प्रोजेक्टवर काम केलं.  त्याच्यातून आठ ते दहा एकल चित्र प्रदर्शने, 15 ते 20 ग्रुप शो, आणि हा प्रोजेक्ट लोकाभिमुख करण्याच्या दृष्टिकोनातून भेटपत्रे, चित्रे, चित्र प्रदर्शने, डायरी, कॅलेंडर अशा माध्यमातून लोकांपर्यंत पोहोचवण्याचा प्रयत्न केला.                 

 प्रोजेक्ट तिसरा :

ड्रायफ्रेस्कोज् ऑफ रंगावली ऑन कॅनव्हास.. .. .. त्यांनी जमिनीवर असणारी रांगोळी ड्रायफ्रेस्को पद्धतीने कॅनव्हासवर आणली. जमिनीवर असलेल्या रांगोळीला उभं करण्यात त्यांना यश प्राप्त करता आलं आहे . आपल्या दिवाळी अंकांची मुखपृष्ठे त्यांनी याच पद्धतीने चितारलेली आहेत. विशेष म्हणजे याच कलाविष्काराबद्दल Irvine, USA या अमेरिकन विद्यापीठाने त्यांना पी.एच.डी. प्रदान केलेली आहे. 

.. .. .. आजपर्यंत त्यांना दोन इंटरनॅशनलतीन नॅशनल आणि पाच स्टेट अवॉर्ड्स मिळाली आहेत.   त्याच्यात भर म्हणून आता नुकताच आर्ट अवेन्यू ब्रुकलीन इंटरनॅशनल कॉम्पिटिशन फॉर पेंटिंग अँड फोटोग्राफीमध्ये 2026 चे एक्सलन्स अवॉर्ड 2026′ त्यांना मिळालेले आहे.  

नुकत्याच मिळालेल्या या सुप्रतिष्ठित पुरस्काराबद्दल त्या सांगतात.. 

.. ..” या सदर प्रदर्शनात मी व माझे सहचित्रकार सुनील बलकवडे आम्ही दोघांनी वैयक्तिक सहभाग घेतला होता. पंतप्रधान श्री नरेंद्र मोदीजींच्या 75 व्या वाढदिवसानिमित्त केलेल्या ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘, या विषयावरील सात चित्रांच्या मालिकेला हे बक्षीस मिळालं. 

.. .. .. भारतामध्ये साधारणपणे साडेसहाशे लोककला आहेत..  रांगोळी ही त्यापैकीच एक.  त्यातल्या अनेक कला आता संपत चाललेल्या आहेत.  अशा वेळेला तिला काय करून जपता येईल अशा प्रयत्नांमधून ही फ्रेस्को चित्रशैली जन्माला आली, त्याच्यावर आम्ही साधारणपणे दहा ते बारा वर्षे काम केलं आणि आता हे कॅनव्हास आपण जगभर कुठेही पाठवू शकतो इतकी सिद्धता आता प्राप्त झालेली आहे.   आपण स्वतःच  एक प्रोजेक्ट घेऊन ‘रांगोळी’ ही संपत असणारी कला कशी सांभाळून ठेवू शकू ? या विचारातून या प्रोजेक्टला सुरुवात झाली. 

.. .. .. भारतीय चित्रकलेत रांगोळीचा चेहरा हा मुळातच प्रतीकात्मक आहे आणि प्रतिकात्मक रांगोळी मधील रेषा ही त्यांची चैतन्य केंद्रे आहेत.

.. .. .. भारतीय कला विश्वात आपल्याकडे मुळामध्ये वेद आणि उपनिषदिक वाड्गमय हे अपौरुषेय आहे, परम आध्यात्मिक वैभव आहे .. इतके की त्यातील शब्द, श्लोक, सुभाषिते असतील, मंत्र जप असतील, बिजाक्षर असतील किंवा काही चांगली वाक्यं असतील, तर अशा सगळ्या ‘ स्क्रिपचर्स ‘ माध्यमातून ती आपल्यापर्यन्त पोचतात, कारण ही स्क्रिपचर्स म्हणजे थॉट फॉर्मस् आहेत, आणि हे थॉट फॉर्मस् आपल्याला चित्रांमध्ये परिवर्तित करता येतात हे जेव्हा मला कळलंतेव्हा काम करताना खूप मजा यायला लागली, आणि त्यामुळे या चित्रमालिकेमध्ये सुद्धा आपण वेदांनी उदघोषित केलेल्या वाक्यातून प्रेरणा घेऊन ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘, चा विचार प्रत्येक वैयक्तिक चित्रातून मांडण्याचा प्रयत्न आम्ही केलेला आहे . नमुन्यादाखल सदर मालिकेतील एक चित्र सोबत जोडले आहे…ज्याचे शीर्षक आहे.. 

‘Save Nature, A Sacred Duty’. 

(कृपया enlarge करून पहावे). 


या पुरस्कारप्राप्त चित्राबद्दल मी इतकेच सांगेन की – 

“Our series of seven paintings on Vasudhaiva Kutumbakam—born from the sacred light of Prime Minister Narendra Modiji’s 75th birthday—has touched souls across oceans.

This isn’t mere award—it’s affirmation that art bridges hearts, just as Modiji’s vision, unites Bharat with the world…  From Pune’s studios to Brooklyn’s galleries!! “ 

भारती माटे. 

***** 

इतका व्यापक आणि अत्यंत मोलाचा विचार आपल्या कलेच्या माध्यमातून जगभरात पोहोचवण्याचा भारतीताईंचा हा यशस्वी प्रयत्न खरोखरच अपवादात्मक आणि अत्यंत गौरवास्पद आहे.  

– – आपल्या सर्वांतर्फे सुश्री डॉ.भारती माटे यांचे अतिशय मनःपूर्वक अभिनंदन आणि या आगळ्या वेगळ्या वाटेवरचा त्यांचा यापुढील प्रवासही असाच यशस्वीपणे सातत्याने चालू रहावा यासाठी त्यांना असंख्य हार्दिक शुभेच्छा. 

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

 

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ प्रतिभाशाली कथाकार सोनी पांडेय को पांचवां सविता कथा सम्मान – अभिनंदन ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ प्रतिभाशाली कथाकार सोनी पांडेय को पांचवां सविता कथा सम्मान – अभिनंदन ☆ 

सविता कथा सम्मान का यह पांचवां वर्ष है। इसे प्रतिवर्ष चयनित महिला कथाकार को दिया जाता है। इसे श्रीमती सविता दानी की स्मृति में प्रारंभ किया गया है। यह देश का विशिष्ट सम्मान है। इस वर्ष इसे प्रतिभाशाली कथाकार सोनी पांडेय को दिया जा रहा है। सोनी पांडेय आजमगढ उत्तर प्रदेश में निवास करती हैं।

अन्विति पत्रिका, पहल और सविता कथा सम्मान आयोजन समिति के द्वारा आयोजित यह सम्मान समारोह आज 7 मार्च 2026 को संध्या 7 बजे डा हीरालाल कला वीथिका, रानी दुर्गावती संग्रहालय, भंवरताल जबलपुर में संपन्न होगा। प्रसिद्ध शिल्पकार व लेखिका शम्पा शाह, भोपाल यह पुरस्कार प्रदान करेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवियत्री सविता भार्गव करेंगी। कार्यक्रम का संचालन कथाकार श्रद्धा श्रीवास्तव करेंगी।

जबलपुर शहर के इस प्रतिष्ठा आयोजन में आप सादर आमंत्रित हैं। कृपया अवश्य पधारें। कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह राजेन्द्र दानी, शरद उपाध्याय, योगेन्द्र श्रीवास्तव, विवेक चतुर्वेदी, कुंदन सिद्धार्थ, हिमांशु राय व सभी साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं ने किया है।

💐 ई- अभिव्यक्ति परिवार की ओर से कथाकार सोनी पांडेय जी को इस विशिष्ट उप्लब्धि के लिए हार्दिक बधाई 💐

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ वैदिक प्रकाशन द्वारा मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी सर्वश्रेष्ठ लेखक पुरस्कार 2026 से अलंकृत  – अभिनंदन ☆ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ वैदिक प्रकाशन द्वारा मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी सर्वश्रेष्ठ लेखक पुरस्कार 2026 से अलंकृत  – अभिनंदन ☆

ई-अभिव्यक्ति के वरिष्ठ साहित्यकार मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी को एकल पुस्तिका “शब्द सरिता का प्रवाह / कविता संग्रह” में उनके अमूल्य साहित्यिक योगदान तथा  लेखन एवं संकलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट भूमिका के लिए वैदिक प्रकाशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ लेखक पुरस्कार 2026 से अलंकृत किया गया।


💐 ई- अभिव्यक्ति परिवार की ओर से मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी  को इस विशिष्ट उप्लब्धि के लिए हार्दिक बधाई
💐

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ शोक वार्ता – स्मृतिशेष कै. श्रीमती कुंदा कुलकर्णी आणि कै. सुहास सोहोनी — विनम्र श्रद्धांजलि ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ शोक वार्ता – स्मृतिशेष कै. श्रीमती कुंदा कुलकर्णी आणि कै. सुहास सोहोनी — विनम्र श्रद्धांजलि ☆

कळविण्यास अत्यंत दु:ख होते की आपल्या ‘ ई अभिव्यक्ती मराठी ‘ समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका श्रीमती कुंदा कुलकर्णी आणि ज्येष्ठ साहित्यिक श्री.सुहास सोहोनी यांचे नुकतेच निधन झाले .

ईश्वर त्यांच्या आत्म्यास सद्गती देवो ही प्रार्थना 🙏

श्रीमती कुलकर्णी व श्री.सोहोनी यांच्या कुटुंबीयांच्या दु:खात आम्ही सर्व सहभागी आहोत.या दु:खद प्रसंगाला त्यांनी धीराने सामोरे जावे .🙏

संपादक मंडळ .

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≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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