श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “गंजे को नाखून…“।)
अभी अभी # ८३९ ⇒ आलेख – गंजे को नाखून
श्री प्रदीप शर्मा
सुना है भगवान गंजे को नाखून नहीं देते। मैं निश्चिंत हूं, जब तक मेरे नाखून हैं, मैं गंजा नहीं हो सकता। क्या आपने कभी किसी गंजे के नाखूनों को गौर से देखा है? कैसे देखेंगे, भगवान उसे नाखून देता ही नहीं है। हमने बिना खून वाला (बहुत ही कम हीमोग्लोबिन ) इंसान तो देखा है लेकिन बिना नाखून वाला इंसान आज तक नहीं देखा। आप कैसे कह सकते हैं कि भगवान के यहां देर है अंधेर नहीं?
यह तो सरासर अंधेरगर्दी है।
बालक शब्द ही बाल से बना है। छोटे बाल, बालक, बड़े बाल, बालिका। एक जमाना था जब चोटी की सिने तारिकाओं की लंबी लंबी चोटी हुआ करती थी। अगर उनके बाल नहीं होते तो न तो जुल्फ लहराती और न वे जुल्फ से पानी झटकाती। जितने बड़े बाल, उतनी ही अधिक देखभाल, रखरखाव।।
तब कहां आज की तरह शैंपू और मॉश्चराइजर का बाजार था। बड़े बड़े बाल वाले बच्चों का परिवार होता था। लोमा हेयर ऑइल से बाल कमर से नीचे तक लहराते थे।
सुबह से ही नाखूनों की सहायता से बड़ी दीदी छोटी बहन के सिर से जुंओं की धरपकड़ शुरू कर देती थी। इन्हें मारना भी जरूरी हो जाता था।
समय बदलता चला गया। लोग लीक से हटते चले गए और रुसी पर आकर अटक गए। वैसे जूं और लीक में अंतर बताना विशेषज्ञों का काम है। सुना है शैम्पू से डर से आजकल जूं ने बाल उद्यान छोड़ दिया है और वह कानों में रेंगने लगी है।।
पहले लोगों के बाल बढ़ते थे, आजकल झड़ते हैं। पौष्टिक आहार की कमी, और पानी में भारीपन के अलावा ट्यूबवेल के पानी में कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण बालों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा है। लेकिन ईश्वर बड़ा दयालु है वह पुरुषों को भले ही गंजा कर दे, नारियों पर वह इतना मेहरबान जरूर है कि किसी का मैदान साफ नहीं करता क्योंकि वे बालों के साथ साथ नाखूनों की भी उचित देखभाल करती है। जहां सुंदर नाखून हैं, वहां सुंदर बाल हैं। पुरुष भले ही एक बार जूता पॉलिश करना भूल जाए, नारी नाखूनों में नेल पॉलिश लगाना नहीं भूलती।
मैं कोई सौंदर्य विशेषज्ञ नहीं, लेकिन नारी सौंदर्य में जितना महत्व बालों और नाखूनों का है उतना शायद किसी अन्य तत्व का नहीं। लेकिन आजकल उल्टी गंगा बह रही है। महिलाएं बाल छोटे रख रही हैं और पुरुष बाल बढ़ा रहा है। अगर स्त्री नहीं बन सकते, तो बाल बढ़ाकर बाबा ही बन जाओ। बाबा के प्रवचन में भी अधिकतर महिलाएं ही महिलाएं। एक दो गंजे पुरुष दिख जाएं तो बहुत।।
सुना है नाखून रगड़ने से बाल बढ़ते हैं। गंजा भी पुरुष ही होता है तो नाखून भी वही रगड़ेगा। अब इस भगवान की गंजों से क्या दुश्मनी है, कुछ समझ नहीं आता। पहले भगवान के आगे नाक रगड़ो। अगर मुझे गंजा कर ही दिया है तो नाखून तो सलामत रहने देते। बाबा रामदेव ने देखो, नाखून रगड़ रगड़ कर कैसे बाल लंबे कर लिए। काश हमारे भी नाखून होते तो हम उन्हें घिस घिसकर बाबा रामदेव बन जाते।
कुछ भी कहें बाल हों या नाखून, हमारे ही खून से ये पुष्ट होते हैं, फलते फूलते हैं। इनका रखरखाव ठीक से करें। सुना है ज्यादा चिंता से बाल उड़ते हैं, तो क्या पुरुष ही अधिक चिंता करता है और महिलाएं पूरी तरह निश्चिंत रहती हैं। वैसे पुरुष का भाग्य कौन पढ़ पाया है। लोग तो गंजा देखते ही कहने लग जाते हैं, जरूर भाग्यशाली और पैसे वाला होगा। देखो, उसकी पत्नी कितनी सुंदर है, हां वही, लम्बे, बड़े बालों वाली, और लंबे नाखूनों वाली।।
© श्री प्रदीप शर्मा
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