कोकण मराठी साहित्य परिषदेचे संस्थापक अध्यक्ष श्री. मधु मंगेश कर्णिक यांचे हस्ते, आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका डॉ शैलजा करोडे यांच्या ‘ मेंदीच्या पानावर ‘ या कवितासंग्रहाचे प्रकाशन नुकतेच पनवेल येथे झाले. या प्रसंगी अनेक ज्येष्ठ साहित्यिक उपस्थित होते. श्रीमती करोडे यांच्या साहित्यिक प्रवासातील हा एक महत्त्वाचा टप्पा आहे. ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन. यापुढेही त्यांची साहित्यिक वाटचाल अशीच चालू राहो यासाठी शुभेच्छा!🌹
या काव्य संग्रहातील एक कविता “स्त्री गणित आयुष्याचे” आज प्रकाशित करत आहोत.
आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखिका आणि अनुवादिका डॉ. मीना श्रीवास्तव यांच्या ‘एक चिरंतन चित्रपट : मुग़ल ए आझम’ या ग्रंथाला नुकताच ‘तितिक्षा आंतरराष्ट्रीय ग्रंथ पुरस्कार २०२६‘ अंतर्गत सर्वोत्कृष्ट लेखसंग्रह हा मानाचा पुरस्कार प्रदान करण्यात आला.
‘एक चिरंतन चित्रपट : मुग़ल ए आझम’ हे डॉ. मीना श्रीवास्तव यांचे पहिले मराठी पुस्तक आहे.
भारतीय चित्रपटसृष्टीतील सुवर्णपान मानल्या जाणाऱ्या ‘मुग़ल ए आज़म’ या कालजयी चित्रपटाच्या निर्मितीमागील तब्बल बारा वर्षांहून अधिक काळाचा संघर्ष, कलात्मकता, समर्पण आणि ऐतिहासिक प्रवास यांचा वेध या पुस्तकात घेण्यात आला आहे. या विषयावर मराठी भाषेत प्रकाशित झालेल्या मोजक्या आणि अभ्यासपूर्ण ग्रंथांपैकी हा एक महत्त्वाचा ग्रंथ मानला जातो. या बहुप्रतिष्ठित पुरस्कारामुळे मराठीतील चित्रपटविषयक अभ्यासपूर्ण लेखनाला न्याय मिळाल्याची भावना व्यक्त केली जात आहे.
या पुरस्काराबद्दल आपल्या सर्वांतर्फे डॉ. मीनाताईंचे मनःपूर्वक खूप खूप अभिनंदन आणि त्यांच्या पुढील अशाच यशस्वी साहित्यिक वाटचालीसाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.💐🙏
त्यांची पुरस्कार प्राप्त पुस्तक ‘एक चिरंतन चित्रपट : मुग़ल ए आझम’ पुस्तक परिचय आज प्रकाशित करत आहोत.
संपादक मंडळ
ई-अभिव्यक्ती मराठी
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /मंजुषा मुळे/ गौरी गाडेकर≈
– सुरेश पटवा की कृति “व्यंग्य-पच्चीसी” का लोकार्पण –
सुरेश पटवा के व्यंग्य संग्रह “व्यंग्य-पच्चीसी” का लोकार्पण मुकेश वर्मा की अध्यक्षता, डॉक्टर संजय सक्सेना के मुख्य आतिथ्य में दिनांक 14.06.2026 को शाम पाँच बजे दुष्यंत संग्रहालय में आयोजित है। सारस्वत अतिथि गोकुल सोनी, विवेक रंजन श्रीवास्तव होंगे। समीक्षात्मक विमर्श शारदा दयाल श्रीवास्तव और जयजीत अकलेचा प्रस्तुत करेंगे। संचालन – डॉक्टर आदित्य हरि गुप्ता करेंगे।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विजी श्रीवास्तव, मलय जैन, सुदर्शन सोनी, अरुण अर्णव खरे, यशवंत गोरे, डॉक्टर आदित्य हरि गुप्ता, डॉक्टर अशोक व्यास और शिवकुमार दीवान व्यंग्य पाठ करेंगे। जिसका संचालन व्ही के श्रीवास्तव करेंगे।
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साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव
≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
–युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच ने मनाया रामदेव धुरंधर का जन्मदिन एवं राजेश श्रेयस के उपन्यास चाक सी नाचती जिंदगी के मराठी अनुवाद, “कुंभाराच्या चाकासारखे नाचणारे जीवन” के आवरण पृष्ठ का लोकार्पण –
दिनांक 11 जून 2926 को युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच उत्तर प्रदेश इकाई ने मनाया रामदेव धुरंधर का जन्म दिन, श्रीराजेश श्रेयस के उपन्यास चाक सी नाचती जिंदगी के मराठी अनुवाद, कुंभाराच्या चाकासारखे नाचणारे जीवन के आवरण पृष्ठ का लोकार्पण ।
लखनऊ, युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच उत्तर प्रदेश इकाई के तत्वाधान में भारतीय मूल के श्री रामदेव धुरंधर जी का जन्मदिन मनाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.जय प्रकाश तिवारी ने किया। मुख्य अतिथि ख्यातिलब्ध कथाकार श्री महेंद्र भीष्म, विशिष्ट अतिथि कुंवर वीर सिंह मार्तंड रहे। कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। वाणी वंदना श्री राम सनेही विश्वकर्मा सजल ने किया। मंच का कुशल संचालन युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस ने किया।
इसी अवसर पर डॉक्टर राजेश कुमार सिंह श्रेयस कृत उपन्यास चाक सी नाचती जिंदगी के मराठी अनुवाद (अनुवादक सुश्री रितु पाटिल) के आवरण पृष्ठ का लोकार्पण किया गया।
इसी अवसर पर संस्था द्वारा राष्ट्रीय नवल टाइम्स के संपादक नवल किशोर त्रिपाठी को अंग वस्त्र एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंचीय अतिथियों का सम्मान भी किया गया।
इस अवसर पर डा.सुभाष चंद्र रसिया, श्री नंद किशोर जलदूत,श्री नवल किशोर त्रिपाठी, श्री राजेश सिंह श्रेयस,डॉ.जय प्रकाश तिवारी, श्री अखिलेश द्विवेदी अलख,श्री अतुल राय, श्री अनिल मौर्य सचित्र, डॉ. श्री प्रकाश मिश्र,श्री आर एस विश्वकर्मा सजल, श्री राम राज भारती, श्री महेंद्र भीष्म, कुंवर सिंह मार्तंड आदि ने अपनी कविताओं एवं व्यक्तव्य से भारतीय मूल के मारीशस निवासी उपन्यासकार श्री रामदेव धुरंधर हार्दिक शुभकामनाएं दी गई।
संस्था के महामंत्री श्री नन्द किशोर वर्मा जलदूत सभी आगंतुकों साहित्यकारों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन किया।
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साभार – राजेश श्रेयस
≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
– अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक कृति पुरस्कार – कैलेण्डर वर्ष 2024 के पुरस्कारों की घोषणा –
(हमारे लिए यह गौरव का विषय है कि पुरस्कार की घोषणा की इस सूचि में ई-अभिव्यक्ति के श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी, संपादक (हिंदी) को उनकी सुविख्यात कृति “जलनाद” पर प्रादेशिक हरिकृष्ण प्रेमी (नाटक) सम्मान की घोषणा की गई है. ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई 💐
– हेमन्त बावनकर, संस्थापक संपादक
भोपाल। साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक कृति पुरस्कार कैलेण्डर वर्ष 2024 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। अखिल भारतीय प्रति पुरस्कार रुपये 1,00,000/- (रुपये एक लाख) एवं प्रादेशिक प्रति पुरस्कार रुपये 51,000/- (रुपये इक्यावन हजार) के साथ शाॅल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति के साथ रचनाकारों को अलंकृत किया जाता है। साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने बताया कि अधिकांश पुरस्कारों हेतु दो श्रेष्ठ कृतियों को संयुक्त रूप से जूरी द्वारा चयनित किया गया है।
अखिल भारतीय कृति पुरस्कार
अखिल भारतीय पं. माखनलाल चतुर्वेदी (निबंध) डाॅ. शकुंतला कालरा-दिल्ली की कृति ‘बच्चे और आप’ एवं श्री अखिलेन्द्र मिश्र-मुम्बई की कृति ‘अभिनय अभिनेता और अध्यात्म’, 2. अखिल भारतीय गजानन माधव मुक्तिबोध (कहानी) श्री चरणसिंह अमी-इंदौर की कृति ‘अतुकांत’ एवं डाॅ. पूजा हेमकुमार अलापुरिया-मुम्बई की कृति ‘कभी पैसा तो कभी किताब’, 3. अखिल भारतीय राजा वीरसिंह देव (उपन्यास) डाॅ. वीणा सिन्हा-भोपाल की कृति ‘अग्निगर्भ में जलती पंखुरियाँ’ एवं श्री सुयश त्यागी-भोपाल की कृति ‘छूटते किनारे’, 4.अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आलोचना) श्री पवन विजय-गाजियाबाद की कृति ‘मास्क मैनिफेस्टो’ एवं श्री लहरी राम मीणा-वाराणसी की कृति ‘सृजन के विविध रूप और आलोचना’, 5. अखिल भारतीय पं. भवानी प्रसाद मिश्र (गीत एवं हिन्दी गजल) श्री सुशील साहिल-गोंडा की कृति ‘यहाँ सब लोग हँसते बोलते हैं’ एवं श्री शैलेन्द्र पाण्डेय-सरायकेला की कृति ‘आईने के जाविये’, 6. अखिल भारतीय अटल बिहारी वाजपेयी (कविता) श्री अजीत कुमार पुरी-दिल्ली की कृति ‘आह्लादित है अयोध्या’ एवं डाॅ. कौशल दुबे-जबलपुर की कृति ‘तथागत’, 7. अखिल भारतीय कुवेरनाथ राय (ललित निबंध) श्री संजीव शर्मा-भोपाल की कृति ‘अयोध्या 22 जनवरी’ एवं श्री संजय सक्सेना-राजगढ़ की कृति ‘डायरी का मुड़ा हुआ पन्ना’, 8. अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर (आत्मकथा-जीवनी) पं. कमलकांत शर्मा-दतिया की कृति ‘शबरी दर्शन’ एवं श्री मनीष कुमार पाटीदार-महेश्वर की कृति ‘जिंदगी का सफर किशोर कुमार’, 9. अखिल भारतीय निर्मल वर्मा (संस्मरण) श्री रवीन्द्र कुमार दुबे-इंदौर की कृति ‘एक दुनिया ऐसी भी’ एवं ऋचा दीपक कर्पे-देवास की कृति ‘यादों का सुनहरा सफर’, 10. अखिल भारतीय महादेवी वर्मा (रेखाचित्र) डाॅ. प्रीति खरे-भोपाल की कृति ‘नानी का घर ढूँढ़ रही हूँ’ एवं श्री अशोक पटेल-शहडोल की कृति ‘वनगीता’, 11. अखिल भारतीय प्रो. विष्णुकांत शास्त्राी (यात्रा-वृत्तांत) डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी-जयपुर की कृति ‘ओकुहेपा’ एवं डाॅ. शिव कुमार व्यास-जबलपर की कृति ‘हिंदी में यात्रा वृत्तांत’, 12. अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (अनुवाद) डाॅ. श्रीनिवास शुक्ल ‘सरस’-सीधी की कृति ‘लोकपुराण’ एवं डाॅ. दंतू मुरली कृष्ण-भोपाल की कृति ‘जीवन गीता’, 13. अखिल भारतीय नारद मुनि (फेसबुक/ब्लाग/नेट) श्री मनोज जैन मधुर-भोपाल का पेज ‘फेसबुक/ब्लाॅग/नेट’ एवं श्री कृष्णमुरारी त्रिपाठी ‘अटल’-रायपुर का पेज ‘फेसबुक/ब्लाॅग/नेट’ को दिया गया है।
प्रादेशिक कृति पुरस्कार
प्रादेशिक वृन्दावन लाल वर्मा (उपन्यास) श्री ब्रजेश राजपूत-भोपाल की कृति ‘द एवरेस्ट गर्ल’ एवं गीता शुक्ला गीत-रीवा की कृति ‘चांद मायूस क्यों है’, 2. प्रादेशिक सुभद्रा कुमारी चैहान (कहानी) श्री सूर्यकांत नागर-इंदौर की कृति ‘ग्यारह कहानियाँ’ एवं कला जोशी-इंदौर की कृति ‘जागते सपने’, 3. प्रादेशिक श्रीकृष्ण सरल (कविता) श्री राजेंद्र कोचला अम्बर-इंदौर की कृति ‘इस देश के लिए’ एवं श्री गोकुल प्रसाद सोनी-भोपाल की कृति ‘सीता-स्वयंबर’, 4. प्रादेशिक आचार्य नंददुलारे वाजपेयी (आलोचना) श्री रमण रावल-इंदौर की कृति ‘युग पुरुष मोदी’ एवं डाॅ. सांत्वना श्रीकांत-भोपाल की कृति ‘भारतीय नारी स्थिति और गति’, 5. प्रादेशिक हरिकृष्ण प्रेमी (नाटक) श्री विजय ‘बेशर्म’-गाड़रवाड़ा की कृति ‘जिंदगी ही नाटक है’ एवं श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव-भोपाल की कृति ‘जलनाद’, 6. प्रादेशिक राजेन्द्र अनुरागी (डायरी) डाॅ. अभय अरविन्द बेडेकर-अलीराजपुर की कृति ‘कोरोना योद्धा की संघर्ष कथा’, 7. प्रादेशिक पं. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (प्रदेश के लेखक की पहली कृति) श्री जवाहर कर्णावत-भोपाल की कृति ‘विदेश में हिंदी पत्राकारिता’ एवं डाॅ. राकेश सिंघई-इंदौर की कृति ‘वक्रोक्ति’, 8. प्रादेशिक ईसुरी (लोकभाषा विषयक) अर्चना मण्डलोई-इंदौर की कृति ‘गेरी-गेरी छाँव’ एवं श्री सौरभ लाड़-इंदौर की कृति ‘गरीब मनुस का उल्टा पांय’, 9. प्रादेशिक हरिकृष्ण देवसरे (बाल साहित्य) श्री राजा चैरसिया-कटनी की कृति ‘बचपन है फुलवारी’ एवं नीना सिंह सोलंकी-भोपाल की कृति ‘मुनिया की खुशी’, 10. प्रादेशिक नरेश मेहता (संवाद, पटकथा लेखन) डाॅ. मीनाक्षी दुबे-भोपाल की कृति ‘कथा कल्पतरु’, 11. प्रादेशिक जैनेन्द्र कुमार ‘जैन’ (लघुकथा) श्री देवेन्द्र सिंह सिसोदिया-इंदौर की कृति ‘शुभ मुहूर्त’ एवं डाॅ. यशोधरा भटनागर-देवास की कृति ‘एक मुट्ठी मिट्टी’, 12. प्रादेशिक सेठ गोविन्द दास (एकांकी) डाॅ. साधना शुक्ला-भोपाल की कृति ‘नाट्योन्मेष’ एवं श्री अभिमन्यु जैन-जबलपुर की कृति ‘लोकमाता अहिल्याबाई होलकर’, 13. प्रादेशिक शरद जोशी (व्यंग्य) श्री सुधीर देशपाण्डे-खण्डवा की कृति ‘परम सत्ता से पे्रम’ एवं डाॅ. सौरभ जैन-इंदौर की कृति ‘रील नाम सत्य है’, 14. प्रादेशिक वीरेन्द्र मिश्र (गीत) सुश्री मीरा भार्गव ‘सुदर्शना’-कटनी की कृति ‘परम सत्ता से प्रेम’ एवं श्री अमन अक्षर-मून्दी की कृति ‘एक लड़की’, 15. प्रादेशिक दुष्यंत कुमार (ग़ज़ल) श्री वृन्दावन राय सरल-सागर की कृति ‘गजलों का गुलशन’ एवं श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’-भोपाल की कृति ‘ये अँधेरों की पैरवी वाले’ को दिया गया है।
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(डाॅ. विकास दवे)
निदेशक
≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
कोकण मराठी साहित्य परिषद,विले पार्ले यांनी प्रकाशित केलेल्या काव्यतरंग या सामुहिक काव्यसंग्रहात , आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका दीप्ती कुलकर्णी यांची ‘शब्दसृष्टी ‘ ही कविता समाविष्ट करण्यात आली आहे .एकूण १७५ कवितांपैकी फक्त निवडक ७५ कविता या संग्रहात घेतल्या आहेत.कवितेच्या निवडीबद्दल दीप्ती कुलकर्णी यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन
☆ बच्चों में वैज्ञानिक सोच और कल्पनाशीलता बढ़ाने का अनोखा जरिया: ‘चंद्र बस्ती का रहस्य’ ☆ साभार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
यह समाचार आज के समय में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को कम करने और उनमें ‘वैज्ञानिक सोच’ (Scientific Temperament) पैदा करने जैसे सामाजिक सरोकार से जुड़ा है। नेशनल बुक ट्रस्ट की यह प्रस्तुति अभिभावकों और शिक्षकों के लिए बेहद मार्गदर्शन करने वाली साबित होगी। – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
रतनगढ़ (निप्र)। आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चे मोबाइल स्क्रीन और गेमिंग की दुनिया में खोए जा रहे हैं, वहीं उनकी कल्पनाशीलता को आसमान की उड़ान देने और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) विकसित करने के लिए एक बेहतरीन पहल की गई है। नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा प्रकाशित नया किशोर उपन्यास ‘चंद्र बस्ती का रहस्य’ बाल-मन को भविष्य के विज्ञान से जोड़ने में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
भविष्य की परिकल्पना को साकार करता उपन्यास:
आज पूरी दुनिया के वैज्ञानिक चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की नई-नई परिकल्पनाओं पर काम कर रहे हैं। भविष्य के इसी गर्भ में छिपे सपने को आज के बच्चों के सामने एक रोमांचक ताने-बाने में पिरोकर प्रस्तुत किया है जाने-माने बाल साहित्यकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ने। यह उपन्यास केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भविष्य के विज्ञान का एक सजीव खाका है।
अभिभावकों और शिक्षकों के लिए क्यों है बेहद उपयोगी?
शिक्षाविदों और बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय यदि उन्हें कल्पना की उड़ान दी जाए, तो उनकी सोचने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। यह उपन्यास इस मामले में समाज के लिए बेहद उपयोगी है क्योंकि:
तनावमुक्त ज्ञान: यह बच्चों को भारी-भरकम विज्ञान की बातें बेहद मनोरंजक और सरल तरीके से सिखाता है।
रचनात्मकता का विकास: मोबाइल की लत छुड़ाकर बच्चों में फिर से पढ़ने (Reading Habit) की आदत को विकसित करता है।
भविष्य के वैज्ञानिक: यह कहानी बच्चों के मन में सवाल उठाती है कि “चंद्रमा पर जीवन कैसे संभव होगा?” जो उन्हें भविष्य का वैज्ञानिक बनने के लिए प्रेरित करता है।
‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ की सराहनीय प्रस्तुति:
भारत सरकार के नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा इस उपन्यास का प्रकाशन यह साबित करता है कि इसकी सामग्री बच्चों के लिए कितनी स्तरीय और सुरक्षित है। ‘चंद्र बस्ती का रहस्य’ को पढ़कर बच्चे न सिर्फ अंतरिक्ष विज्ञान के रहस्यों को करीब से जान सकेंगे, बल्कि वे यह भी समझ सकेंगे कि आने वाले समय में मानव सभ्यता का विस्तार कैसे होने वाला है।
यदि आप भी अपने बच्चों को गैजेट्स की दुनिया से बाहर निकालकर एक अद्भुत और ज्ञानवर्धक दुनिया की सैर कराना चाहते हैं, तो यह उपन्यास हर घर की लाइब्रेरी और स्कूल के पुस्तकालय में होना अनिवार्य है।
साभार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
≈ संस्थापक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
‘वुमेन वर्ल्ड रेकॉर्ड्स’ द्वारे “वुमेन आयकॉन अवॉर्ड ” हा विशेष असा एक पुरस्कार दरवर्षी दिला जातो, आणि त्यायोगे प्रेरणादायी आणि अपवादात्मक कार्य करणाऱ्या स्त्रियांच्या यशोगाथांचा आणि त्यांनी केलेल्या उल्लेखनीय कामाचा सन्मान करण्यात येतो.
… आणि अतिशय आनंदाची गोष्ट म्हणजे, २०२६ सालच्या या प्रतिष्ठित सन्मानासाठी पुणे येथील फाइन आर्टमधील प्रसिद्ध व्हिज्युअल प्रॅक्टिशनर डॉ. भारती माटे यांना निवडले गेले.
… डॉ. भारती माटे या आपल्या ई – अभिव्यक्ती साहित्य- मंचाच्या पहिल्या दिवाळी विशेषांकापासून गेली सतत चार वर्षं या अंकाचे अतिशय सुंदर आणि आकर्षक मुखपृष्ठ तयार करून देणाऱ्या आपल्या समूहातील ज्येष्ठ सदस्या आहेत.
डॉ. भारती माटे यांनी फाइन आर्ट पेंटिंगच्या क्षेत्रात अतिशय उल्लेखनीय आणि सर्जनशील कामगिरी करून दाखवली आहे. भारतीय संस्कृतीतील ‘रांगोळी’ सारख्या प्राचीन लोककलेला स्वतःच्या नवनव्या सिद्धहस्त प्रयोगांतून साकार केलेल्या भावपूर्ण आणि अर्थपूर्ण कलाकृतींद्वारे त्यांनी एक नवे आणि सुंदर रूप दिले आणि त्याद्वारे जमिनीवर असणारी रांगोळी त्यांनी कॅनव्हासवर आणली आहे …जी फ्रेम करून भिंतीवर लावता येते.
ललित कलांच्या दालनात समृद्ध आणि सुंदर भर घालणाऱ्या या कामातले त्यांचे कौशल्य आणि त्यातली त्यांची सफाई विलक्षण आहे. व्हिज्युअल आर्ट्सबद्दलची त्यांची उत्कटता, त्यांच्या नवनवोन्मेषशाली कल्पना आणि सौंदर्यशास्त्राबद्दलचा त्यांचा गाढा अभ्यास आणि त्यासोबतच त्यांचा वचनबद्धपणा यामुळे या विशेष क्षेत्रात त्यांनी स्वतःचा मोठाच ठसा उमटवलेला आहे. याच्या जोडीनेच त्यांच्या या कलात्मक प्रवासाद्वारे उद्याच्या उदयमान कलाकारांना प्रेरणा देत असतांनाच, सांस्कृतिक आणि सर्जनशील अभिव्यक्तीना समृद्ध करण्यात त्या मोठेच योगदान देत आहेत.
त्यांना देण्यात आलेला हा जागतिक पातळीवरचा विशेष पुरस्कार म्हणजे त्यांच्या प्रतिभेचे, प्रयोगशीलवृत्तीचे, चिकाटीचे आणि फाइन आर्ट्सच्या जगातील त्यांच्या मौल्यवान योगदानाचे प्रमाणपत्र आहे. आणि आपल्या समूहासाठी ही नक्कीच अतिशय आनंदाची आणि अभिमानाची बाब आहे.
ह्याशिवाय कविता, ललित लेखन, भरतकाम, विविध विषयांवरील संशोधनात्मक लेखन, आणि ही अंगभूत कला आणखी विकसित करण्यासाठी करत असलेली विविध प्रांतांमधली डोळस भटकंती.. अशी त्यांची चौफेर मुशाफिरी नित्य चालूच असते.
आपल्या सर्वांतर्फे भारतीताईंचे अगदी मनःपूर्वक अभिनंदन आणि यापुढेही या वेगळ्याच क्षेत्रातली त्यांची विलक्षण म्हणावी अशी वाटचाल याहूनही जास्त दैदिप्यमान ठरो या त्यांना अगदी मनःपूर्वक शुभेच्छा.
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
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≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
आपल्या समूहातील ज्येष्ठ कवयित्री व लेखिका सुश्री संगीता कुलकर्णी यांना नुकताच सर्वद फाउंडेशन, मुंबई यांच्यातर्फे “सर्वद स्टार उत्कृष्ट साहित्यिका” हा मानाचा पुरस्कार प्रदान करण्यात आला आहे.
सर्वद फाउंडेशन, मुंबई ही संस्था मराठी भाषा आणि मराठी संस्कृती-संवर्धन या ध्येयाने कार्यरत असून, या ध्येयाशी निगडीत अनेक कामे या संस्थेमार्फत केली जातात, ज्या अंतर्गत राज्यस्तरीय साहित्य संमेलनही आयोजित केले जाते. या संस्थेतर्फे संगीताताईंना हा मानाचा पुरस्कार मिळणे ही खरोखरच कौतुकास्पद गोष्ट आहे.
तसेच “ठाण्याचे विचारदीप” या पुस्तकात त्यांचा साहित्य प्रवास उलगडणारा विशेष लेखही प्रकाशित केला गेला आहे ही सुद्धा अभिनंदनीय गोष्ट आहे.
ई अभिव्यक्ती समूहातर्फे संगीताताईंचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि साहित्य क्षेत्रातली त्यांची वाटचाल उत्तरोत्तर अशीच यशस्वी होत राहो या आपल्या सर्वांतर्फे त्यांना हार्दिक शुभेच्छा.
आजच्या ‘ मनमंजुषा ‘ सदरात वाचू या कवितेविषयीचे त्यांचे विचार.
संपादक मंडळ, ई-अभिव्यक्ती (मराठी)
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
साहित्य संवेदना प्रस्तुत ‘कवितेचे पान’ या साहित्यिक उपक्रमांतर्गत कवयित्री राधिका भांडारकर यांची अस्सा संसार सुखाचा बाई ही कविता सर्वोत्कृष्ट काव्यरचना म्हणून निवडण्यात आली आहे.
राधिका भांडारकर या आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका आहेत. त्यांचे ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे मन:पूर्वक अभिनंदन!
आपली लेखणी अशीच साहित्याचे अर्थपूर्ण विश्व समृद्ध करत राहो, हीच सदिच्छा व शुभेच्छा ❄️❄️