आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखकश्री. विश्वास देशपांडेयांनी लिहिलेल्या“आनंदयात्री रवींद्रनाथ”या पुस्तकाला नुकताच तितीक्षा इंटरनॅशनल, पुणे यांच्या तर्फे दिला जाणारा – –
“उत्कृष्ट ग्रंथ पुरस्कार”हा मानाचा पुरस्कार प्राप्त झाला आहे.
आपल्या सर्वांतर्फे श्री विश्वास देशपांडे यांचे मनःपूर्वक खूप अभिनंदन, आणि त्यांच्या यापुढील अशाच दैदीप्यमान साहित्यिक वाटचालीसाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.
आजच्या अंकातील ‘ पुस्तकावर बोलू काही ‘ या सदरात करून घेऊ.. या पुरस्कारप्राप्त पुस्तकाचा थोडक्यात परिचय.
संपादक मंडळ
ई-अभिव्यक्ती (मराठी)
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
काही तांत्रिक कारणामुळे शनिवार दि. ७/५/२६ ते दि. १०/५/२६.. असे ४ दिवस ई-अभिव्यक्ति दैनिकाचे लिंक स्वरूपातले प्रकाशन बंद राहील. पण त्या त्या दिवसाचे साहित्य ग्रुपवर थेट प्रकाशित केले जाईल.
सोंमवार दि. ११/५/२६ पासून लिंक स्वरूपात पुन्हा नियमित प्रकाशन केले जाईल.
– संपादक मंडळ
ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
चंद्रभान ‘राही’ के उपन्यास ‘अंतिम समय का सच’ और पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का गरिमामयी लोकार्पण ☆ साभार – श्री रमेश श्रीवास्तव
भोपाल । न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में विगत दिनों एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रभान ‘राही’ द्वारा रचित उपन्यास और त्रैमासिक पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का लोकार्पण एवं सारगर्भित साहित्य चर्चा संपन्न हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री अश्विनी दुबे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद से पधारे डॉ. सुरेश मिश्रा उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती संध्या सिलावट ने शिरकत की।
समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत संस्था की उपाध्यक्ष अनीता जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के विभिन्न चरणों में वक्ताओं ने रचनाकर्म और समकालीन साहित्य पर अपने विचार साझा किए:
लेखकीय वक्तव्य: उपन्यासकार चंद्रभान ‘राही’ ने अपने रचनाकर्म से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि उनका यह नवीन उपन्यास मनुष्य के जीवन के अंतिम सोपान (वृद्धावस्था) के मनोवैज्ञानिक द्वंद्व और संघर्षों पर केंद्रित है।
प्रख्यात समीक्षक इक़बाल मसूद ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने उपन्यास की शिल्पगत विशेषताओं और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज का आईना बताया।
अतिथि उद्बोधन: विशिष्ट अतिथि संध्या सिलावट ने उपन्यास के कलेवर और कथानक की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। वहीं, मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश मिश्रा ने ‘अमृत दर्पण’ पत्रिका के अखिल भारतीय स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि यह पत्रिका देश भर के रचनाकारों को एक मंच प्रदान कर रही है। उन्होंने उपन्यास को एक उत्कृष्ट और पठनीय कृति करार दिया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में अश्विनी दुबे ने कहा, “वही पत्रिका दीर्घजीवी और सफल होती है जो शासकीय अनुदान पर निर्भर न होकर स्वावलंबन के साथ साहित्य की सभी विधाओं को निष्पक्ष स्थान देती है।” उन्होंने राही जी के उपन्यास को मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ बताया।
समारोह का कुशल संचालन डॉ. आज़म ने किया। कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष श्री रमेश जी ने सभी पधारे हुए अतिथियों एवं साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर नगर के प्रबुद्ध साहित्यकार और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से सुदर्शन सोनी, सुरेश पटवा, अरुण अर्णव खरे, श्री धमीनिया, मंजू राही, चरणजीत सिंह कुकरेजा, अनिता तिवारी, शोभा जोशी, कमल प्रसाद कमल, महेश सोनी, अज़ीम आज़ाद और अशोक निर्मल शामिल थे। यह आयोजन अपनी बौद्धिक चर्चा और साहित्यिक शुचिता के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
श्री रमेश श्रीवास्तव अध्यक्ष, न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भोपाल।
समाचार साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘ विनम्र’
≈ संस्थापकसंपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स, लंदन में ग्रहण किया वातायन शिखर सम्मान साभार – डॉ जवाहर कर्णावट
यू.के. में पिछले 25 वर्षों से भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत सुप्रसिद्ध संस्था वातायन द्वारा हाउस आफ लॉर्ड्स, लंदन में आयोजित समारोह में वातायन शिखर सम्मान ब्रिटिश संसद के लार्ड उदय नागाराजु ने मुझे प्रदान किया ।इसके साथ ही वर्ष 2025 का वातायन शिखर सम्मान सुश्री सुलेखा चोफरा तथा साहित्य सम्मान ब्रिटेन की लेखिका डाॅ.अचला शर्मा तथ शैल अग्रवाल जी को प्रदान किया गया ।प्रारंभ में वातायन की संयोजक एवं सुप्रसिद्ध लेखिका दिव्या माथुर ने लॉर्ड नागराजु तथा भारतीय दूतावास की प्रथम सचिव डॉक्टर सलोनी सहाय का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन यूके हिंदी समिति के संस्थापक श्री पद्मेश गुप्त ने किया ।इस अवसर पर आईसेक्ट प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. अरुण अजीतसरिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘प्रवासी साहित्यकार :दिव्या माथुर’ तथा रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के प्रवासी भारतीय साहित्य शोध केंद्र द्वारा डॉ. वंदना मुकेश के संपादन में प्रकाशित ‘ब्रिटेन की चयनित रचनाएं ‘ पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम में लार्ड उदय नागराजु को विश्व रंग की पुस्तिका, श्री पद्मेश गुप्त को ‘विश्व में हिंदी’ पुस्तक तथा लंदन की लेखिका शिखा वार्ष्णेय जी को ‘विदेश में हिंदी पत्रकारिता’ पुस्तक भेंट की । आभार प्रदर्शन वातायन की अध्यक्ष श्रीमती मीरा गौतम ने किया। कार्यक्रम में श्री विजय आनंद (कॉन्फ्लुएंस पत्रिका) बीबीसी के प्रस्तोता श्री नरेश कौशिक, पॉडकास्टर और सिने इन्क यूके के निदेशक श्री परवेज आलम सहित ब्रिटेन के अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।
साभार – डॉ जवाहर कर्णावट
≈ संस्थापकसंपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
📖 दि. २५/४/२६ ते दि. ३०/४/२६ प्रकाशन बंद – सूचना 📖
कृपया सर्व सदस्यांनी नोंद घ्यावी – – –
काही अपरिहार्य कारणामुळे शनिवार दि. २५/४/२६ ते गुरुवार दि. ३०/४/२६.. असे ६ दिवस ई-अभिव्यक्ति दैनिकाचे प्रकाशन बंद रहाणार आहे. शुक्रवार दि. १/५/२६ पासून प्रकाशन पुन्हा नियमित सुरू होईल.
– संपादक मंडळ
ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
– महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जयंती पर अंतर्राष्ट्रीय विमर्श संपन्न – ☆ साभार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ –
भारत-ऑस्ट्रेलिया साहित्य सेतु थिएटर ऑन डिमांड के तत्वावधान में १५ अप्रैल २०२६ को हिंदी साहित्य के शलाका पुरुष साहित्य रत्न, महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जयंती के मांगलिक अवसर पर चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय साहित्य विमर्श एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।
इस सारस्वत अनुष्ठान का संयोजन हरिऔध जी की प्रपौत्री तनया अपर्णा वत्स ने किया। इस अनुष्ठान का श्री गणेश सरस्वती वंदना पश्चात् हरिऔध जी की ९४ वर्षीया प्रपौत्री आशा वत्स जी द्वारा आशीर्वचन व अतिथि स्वागत से हुआ। इस अंतर्राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन में ४० कवियों ने हिस्सा लिया।
भारत के मध्य प्रदेश की संस्कारधानी ऐतिहासिक नगरी जबलपुर से जुड़े मुख्य अतिथि आचार्य इंजी. संजीव वर्मा “सलिल” जी । ५०० से अधिक ने छंदों का आविष्कार कर हिंदी पिंगल को समृद्ध करने वाले सलिल जी ने “हरिऔध” के उपनाम को उनके नाम का पर्याय बताते हुए कहा कि अयोध्या के सिंह तथा औध अर्थात अवध के हरि श्री राम एक ही हैं। साहित्य की सम सामयिक उपादेयता व प्रासंगिकता के निकष पर हरिऔध साहित्य को खरा बताते हुए आचार्य सलिल जी ने रचनाधर्मियों से आग्रह किया कि वे भाषिक शुद्धता पर लोकोपयोगी कथ्य को वरीयता देते हुए वह लिखें जो भावी पीढ़ी के लिए उपयोगी हो। विद्वान वक्ता ने हिंदी को विश्ववाणी बनाने के लिए हर विषय-विधा और विज्ञान की तकनीकी जानकारियों युक्त पुस्तकों और हिंदी में शिक्षण को हरिऔध जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए मध्य प्रदेश की तरह अन्यत्र भी इंजीनियरिंग-मेडिकल व अन्य विज्ञान विषय हिंदी में पढ़ाए जाने पर बल दिया।
आयोजन के अध्यक्ष श्रेष्ठ-ज्येष्ठ हिंदी साहित्यकार भगवान सिंह जी ने हिंदी को वर्तमान रूप में लाने के लिए हरिऔध जी के प्रयासों को सराहते हुए आम जन में प्रचलित भाषा का प्रयोग करने, लोकोक्तियों व मुहावरों का प्रयोग करने, भाषा में नए शब्द-प्रयोग करने को भाषिक विकास हेतु आवश्यक बताया।
उपाध्यक्ष की आसंदी से संबोधित करते हुए साहित्य भूषण डॉ. रामसनेही लाल शर्मा “यायावर” ने हरिऔध जी को मुक्तक (चौपदे) विधा का उन्नायक बताया।
मुख्य वक्ता विवेक अग्रवाल जी ने हरिऔध कालीन हिंदी की अब तक की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए सटीक शब्द चयन को हरिऔध जी की विशेषता बताया।
विशिष्ट अतिथि रामकिशोर उपाध्याय ने हरिऔध जी की कविताओं को मुर्दे में प्राण फूँकनेवाला बताया।
विशिष्ट अतिथि हिमांशु राय एच. रावल ने अनुष्ठान को पूर्वज पूजन निरूपित करते हुए अन्य साहित्यकारों पर भी ऐसे आयोजन किए जाने का आह्वान किया तथा कहा-
“माँ के चश्मे से जब जहाँ देखा।
कोई न हिंदू न मुसलमां देखा।”
सारस्वत अतिथि डॉ. संगीता भारद्वाज “मैत्री” भोपाल ने वत्स परिवार द्वारा अपने पूर्वजों की अनमोल साहित्यिक विरासत को संँभालने व आगे बढ़ाने की सराहना की। उन्होंने अनेकता में एकता पर दोहे प्रस्तुत किए-
“नव किरणें नवचेतना, खुशियाँ आईं आज।
नया साल स्वागत करे,सफल सभी हों काज।।”
डॉ. नीलिमा रंजन भोपाल ने खुद की रचना पढ़ने का लोभ संवर्त करते हुए हरिऔध जी की “हिंदी भाषा” शीर्षक लंबी रचना के चयनित अंश का पाठ कर शब्द सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम का सुचारु संचालन अपर्णा वत्स जी ने तथा वक्ता परिचय सुप्रसिद्ध पटकथा लेखक पवन सेठी जी मुंबई ने दिया। अपर्णा वत्स ने धरती तथा भारत का वंदन किया-
“मेरी पावन धरा को प्रणाम।
धरती के कण-कण को प्रणाम।।
नमन देश के सपूतों को प्रणाम।
भारत के गौरव को प्रणाम।।”
चिंतक-विचारक पवन सेठी जी गर्भित रहा।
आदरणीय पवन सेठी जी ने कहा कि “प्रिय प्रवास” में हरिऔध जी ने राधा और श्रीकृष्ण की अनूठी रूपछटा दिखाई है। उन्होंने “ज्योति कलश” रचना का पाठ किया।विनय विक्रम जी ने “मन भ्रमर की मंजरी तुम/तार सप्तक गा रहा हूँ” प्रस्तुत कर सराहना पाई।
सुभाष जी, मेलबॉर्न ने कहा कि आज एक योद्धा का जन्मदिन है। अवसर है, कि हम चिंतन करें, विचार करें कि हम हिंदी में लिखें। आपने कहा- “इंग्लिश आई शहर में होकर आज सवार। गाँव में सोती रही हिंदी पैर पसार।।”
डॉ. अलका अग्रवाल के अनुसार प्रिय प्रवास में प्रकृति की सुंदरता का सुंदर वर्णन किया गया है। उन्होंने हरिऔध जी की पंक्तियाँ
“नहीं बदलने देंगे हम
हरियाली को पतझड़ में “
प्रस्तुत की।
आदरणीय कुसुम जी ने कहा-
देवनागरी लिपि है जिसकी।
उस हिंदी का है अभिनंदन।।
कवि प्रदीप श्रीवास्तव भोपाल ने कहा- “हिंदी माथे की बिंदी, हम अपना फर्ज निभाते हैं /हिंदी में है नहीं त्रासदी, सब सुखांत कथाओं में।
श्री सुरेश पटवा जी भोपाल ने कहा “प्रिय प्रवास” सिर्फ काव्य नहीं, एक अनुभूति है, विरह का एक भाव जिस पर हरिऔध जी ने महाकाव्य लिख दिया, जो हिंदी जगत के लिए बहुत बड़ी देन है।
श्री गोकुल सोनी भोपाल ने देशभक्ति परक सुंदर कविता प्रस्तुत की-
“वक्त आ गया निकलो घर से, लेकर आज तिरंगा।
जय जय हिंदुस्तान, जय जय देश महान।।”
कवि बी के श्रीवास्तव भोपाल ने कहा कि जो पूर्णता से कार्य करे वही श्रेष्ठ है।
हरिऔध जी का हर सृजन हर रचना सर्वश्रेष्ठ है।
कवि मनोज गुप्ता जी भोपाल ने अमावस की काली रात पर कहा- “मैंने तुमको तम से प्रति क्षण दूर रखा।”
कवयित्री सरला वर्मा जी भोपाल की पंक्तियाँ थीं-
“जो चक्षु चर्म न देख सके, वह कर्म तुम्हें दिखलाते हैं।
स्वर्णिम जीवन के अक्षर तो, पुण्यों से रोपे जाते हैं।।”
सोनम झा जी ने रचना पढ़ी-
“एक तिनका बहुत है तेरे लिए।।”
सुमन जैन जी ने अनेकता में एकता पर अपनी कविता प्रस्तुत की-
“मैं तो मन की स्याही हूँ,
जो माँ शारदे की कलम में घुसकर ,
उसकी पोथी में फैल जाती है।।
कवि पुरुषोत्तम तिवारी “सत्यार्थी” भोपाल ने पढ़ा-
“देह में है प्राण जब तक,
द्वंद से लड़ता रहूँगा।
मैं अंधेरों का विरोधी,
सूर्य नित गढ़ता रहूँगा।
आयोजन की श्रीवृद्धि करते हुए कालजयी कवि श्री कुँवर बेचैन जी के पुत्र तथा पुत्र वधू भावना कुँवर ने सहभागिता की। भावना कुँवर जी की निम्न पंक्तियाँ सराही गईं-
अपने दिल से प्यार का पैगाम ही भेजा गया।
और वह बस नफरतों के बीज ही बोता गया।।
कवि प्रगीत कुँवर जी ने स्वरबद्ध अपनी पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं-
“न जाने क्या हुआ चेहरे में हर दिन ।
बदलते ही रहा शीशे में हर दिन।।
चुभाया तीर जो बातों का उसने ।
वही चुभता रहा सीने में हर दिन।।”
कवयित्री नीलम भटनागर जी ने कहा कि हरिऔध जी का प्रिय प्रवास पढ़कर और पढ़ाकर ही हम हिंदी में स्थान बना पाए हैं।
हिंदी हमारी पहचान है।
हमारी आन बान शान है।।”
इस भव्य कार्यक्रम का समापन करते हुए आशा वत्स जी की बड़ी पुत्री श्रीमती अंगिरा वत्स जी ने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी विद्वत जनों वरिष्ठ, कनिष्ठ साहित्यकारों का हृदय से आभार ज्ञापित किया तथा हरिऔध जी की पाँचवी पीढ़ी में ईशानी वत्स के हरिऔध-साहित्य से लगाव व जुड़ाव का उल्लेख किया।
०००
साभार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’, जबलपुर
≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
– स्मृतिशेष वरिष्ठ पत्रकार मोहन शशि नहीं रहे – भावपूर्ण श्रद्धांजलि – ☆ साभार – श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’ –
हमारे आदरणीय श्री मोहन शशि जी
हमारे मोहल्ले के श्याम कक्का, लीला कक्का, एवं मोहन कक्का यह ऐसे नाम थे, जो सभी के जुबान में रटे थे। हम सभी मित्रों की नगर के समाचार पत्रों की पाठशाला उनके घर पर हुआ करती थी। संपादक होने के कारण उनके घर जबलपुर के सभी अखबार आया करते थे और लेखन अभिरुचि बचपन से होने की वजह से मुझे पढ़ने का बड़ा शौक रहता था। श्री मोहन शशि अपने भाइयों में सबसे छोटे थे।
समाचार पत्र नवभारत में पत्रकार होने के नाते पूरे शहर में उनकी धाक थी। मिलन संस्था का एक बड़ा नाम था। मोहन शशि जी ने जबलपुर में नौटंकी, कव्वाली, बेलबाग की मुजरा पार्टी जैसे कार्यक्रमों की जगह शहर में सांस्कृतिक एवं साहित्य कार्यक्रमों से हवा का रुख बदला और बड़े-बड़े स्टेज बनाकर या गीत संगीत का वातावरण बनाया।
उन्हीं कार्यक्रमों से नगर में के के नायकर, यंग आर्केस्ट्रा के रजनीकांत, दत्तात्रेय-हेमंत कुलकर्णी बंधु, निरंजन शर्मा जैसे अनेक कलाकार उभर कर आए और पूरे देश में छा गए।
उनके बड़े भाई श्री श्यामलाल यादव बाद में पार्षद भी बने। मोहल्ले के लड़के बिगड़े न इसलिए आदर्श छात्र मंडल संस्था को बनाया। लालचबूतरा एक मंच बना। जिसमें वर्ष भर ढेर सारे कार्यक्रम होते रहते थे। जिसमें श्री लीलाधर यादव संयोजक बने। उस समय मिलन मित्रसंघ संस्था की धूम थी। सन् 1974-75 में श्री नाथ की तलैया में मिलन का एक भव्य कार्यक्रम होने वाला था। और उसी समय इलाहाबाद नाट्य संघ का कार्यक्रम भी तीन दिवसीय शहीद स्मारक में होने वाला था।
शशि जी इस कार्यक्रम में असुविधा महसूस कर रहे थे। तब उन्होंने हमारी संस्था को यह कार्यक्रम को करने का आफर दिया। हम लोगों ने कमर कसी मधुकर सरोज कोष्टा, शैलेश साहू, सुंदर लाल कोष्टा, महेश सिंह ठाकुर, मगन ठेकेदार सहित अनेक मित्र थे, मै (मनोज कुमार शुक्ल) सचिव था।
शहीद स्मारक में गेट के अगल-बगल दो खिड़कियां हुआ करतींः उसमें टिकट काउंटर के द्वारा अंदर प्रवेश मिलता था। अर्थात लोग टिकट खरीद कर ही कार्यक्रम को देखने जाते थे। इस तरह कार्यक्रम तीन दिनों तक चला जिसमें कई नाटक दिन में तीन नाटक संपन्न हुए। शशि जी समय निकालकर एक दो बार राउंड लगाते और खुश होते की आदर्श छात्र मंडल ने बखूबी अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। शहर में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर बनाने में मधुकर सरोज कोष्टा सिद्ध हस्त थे। जिनकी आज देश में कई जगह चित्र प्रदर्शनी लग चुकीं हैं।
1978- 79 के दौरान हमारे एक कहानी संग्रह क्रांति समर्पण में श्री मोहन शशि ने भूमिका लिखी थी। इस कहानी संग्रह में पिता पुत्र की कहानियां थीं। श्री रामनाथ शुक्ल श्रीनाथ मेरे पिताजी थे। मिलन में मैं वर्षों कोषाध्यक्ष रहा। नौकरी की वजह से मैं इस शहर से उस शहर जाता रहा। जब गृह नगर आता तो उनसे अवश्य मिलता। तबसे लेकर आज तक उनका सानिध्य मुझे मिलता ही रहा है।
हमने नगर ही नहीं प्रदेश में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक वातावरण की अलख जगाने वाले एक पुरोधा को खोया है। ईश्वर उन्हें अपने चरणों में जगह दे।
साभार – श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’, जबलपुर
🙏💐ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से स्मृतिशेष मोहन शशि जी को विनम्र श्रद्धांजलि💐🙏
≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
– व्यंग्य यात्रा का भव्य सम्मान समारोह दिल्ली में सम्पन्न – ☆ साभार – श्री संजय भारद्वाज –
“शब्दाभिव्यक्ति को समृद्ध बनाती है साहित्य केंद्रित कला ” – संदीप राशिनकर
पुणे। किसी भी साहित्यिक विधा में निहित अभिव्यक्ति के सामर्थ्य को उसके साथ प्रकाशित कला ना सिर्फ समृद्ध करती है वरन् शब्द निहित अर्थों को भिन्न दृष्टि और वृहद आकार देती है। यह विचार के चर्चित चित्रकार संदीप राशिनकर ने दिल्ली के हिन्दी भवन में आयोजित महत्वपूर्ण व्यंग्य यात्रा के भव्य सम्मान समारोह में हुए अपने सम्मान के अवसर पर अपने उद्बोधन में व्यक्त किए।
उन्हें यहां व्यंग्य यात्रा शब्दान्वेषी कला भूषण सम्मान से सारस्वत अतिथि लीलाधर मंडलोई, अशोक त्यागी और अध्यक्ष प्रेम जनमेजय द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान निधि, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र स्वरूप के इस सम्मान के प्रत्युत्तर में आपने कहा कि शब्दों का अन्वेषण कर कलात्मक अर्थवत्ता के साथ साहित्य के प्रभाव को बहुगुणित करती साहित्य केंद्रित कलाओं का साहित्यिक पुरस्कारों में समावेश किया जाना, कला की साहित्यिक महत्ता को रेखांकित किया जाना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है। उन्होंने प्रेम जनमेजय एवं सम्मान समिति का इस पहल के लिए आभार माना। इस अवसर पर सर्वश्री विष्णु नागर, विनोद कुमार विक्की, हरीश पाठक, डॉ . संजीव कुमार, बी. एल.आच्छा और स्नेहलता पाठक को रवीन्द्रनाथ त्यागी, धर्मवीर भारती स्मृति विविध व्यंग्य यात्रा सम्मानों से सम्मानित किया गया।
सर्वश्री विष्णु नागर, समकालीन भारतीय साहित्य के संपादक बलराम, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, एनबीटी के निदेशक लालित्य ललित, अशोक गुप्ता, व्यंग्य चित्रकार माधव जोशी, श्रीया गवली, पंकज सक्सेना जैसे अनेक लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति में यह समारोह संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का सुचारू संचालन नीरज मिश्र और सम्मान समिति के संयोजक रणविजय राव ने किया। स्वागत सुश्री आशा कुंद्रा, सोनी लक्ष्मी राव ने किया और आभार माना अशोक त्यागी ने।
साभार – श्री संजय भारद्वाज, अध्यक्ष, हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे
≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈