श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है सामाजिक विमर्श पर आधारित विचारणीय लघुकथा “नई दिशा”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २७४ ☆
🌻लघु कथा🌻 नई दिशा 👩🍼
मम्मी आपने बताया आप पापा के साथ शादी के पहले सोलह सोमवार का व्रत कई बार किया है। अंजली ने बड़े भोलेपन से मम्मी को प्रश्न किया मेरी सभी सहेलियों के यहाँ शिव अभिषेक बड़ी श्रद्धा से करते है। न आप करती है न मुझे व्रत करने देती। कहा जाता है – – – इसको करने से मनचाहे पति की प्राप्ति होती है।
मम्मी ने तुरंत बात काटते हुए कहा–बस इसलिये ही नही करने देती। मनचाहा नही वो चाहे ऐसे पति की कामना रखनी चाहिए।
हम नारियों को भगवान ने ममता से भरपूर बनाया है। हमें तो पत्थर से भी प्रेम हो जाता है। पर समय बदल गया है अंजली!!! अब पति की चाहत होना बहुत आवश्यक है।
सारी जिंदगी घूटन से अच्छा है वो चाहे ये मायने रखता है। मम्मी के इस निर्णय पर अंजली हैरान थी। परन्तु नई दिशा, नई सोच मिलने से उसका व्याकुल मन शांत हो चला।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈













