श्री यशोवर्धन पाठक
☆ पुस्तक चर्चा ☆
☆ कवियत्री सिद्धेश्वरी सराफ शीलू की काव्य कृति – आर्यावर्त की अनुपमायें (काव्य संग्रह) ☆ समीक्षा – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
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नारी तुम केवल श्रद्धा हो
विश्वास रजत नग पग तल में
पीयूष स्त्रोत सी बहा करो
जीवन के सुन्दर समतल में
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सुप्रसिद्ध कवि स्व श्री जयशंकर प्रसाद की ये काव्य पंक्तियां इस बात की प्रतीक हैं कि नारी शक्ति ने वीरता, कर्मठता और ममता के क्षेत्र में हमेशा से एक कीर्तिमान स्थापित किया है और राष्ट्र को विश्व के रंग मंच पर गौरवान्वित किया है। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्य साधना से संस्कारधानी को गौरवान्वित करने वाली सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रिय बहन सिद्धेश्वरी सराफ शीलू ने भी मातृ शक्ति पर आधारित ऐसी ही प्रभावी कविताओं की रचना की है जिनका काव्य संग्रह आर्यावर्त की अनुपमायें का विमोचन पाथेय के तत्वावधान में गरिमामय कार्यक्रम के साथ आज आयोजित है।
श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
वैसे तो सिद्धेश्वरी जी लम्बे समय से कविताएं लिख रही हैं और काफी अच्छा लिख रही हैं और पत्र -पत्रिकाओं में प्रकाशित इनकी कविताओं का ऐसा पाठक वर्ग है जिनके बीच इनकी कविताओं की पठनीयता सिद्ध भी हुई है। सिद्धेश्वरी जी की अधिकांश कविताएं राष्ट्रीयता, सामाजिकता और आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत हैं, इसीलिए उनकी कविताओं में भी राष्ट्र और समाज के लिए एक सार्थक और प्रेरक संदेश भी निहित है। शीलू जी के काव्य सृजन में देश की महान नारी की गौरव गाथा इस प्रकार से शामिल की गई है कि वह समाज के लिए अत्यंत प्रेरक प्रतीत होती है। क्रिकेट टीम की महिला कप्तान सुश्री हरमनप्रीत कौर की यशोगाथा का कुछ इस प्रकार वर्णन किया है –
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चयन हुआ है खेल में, जीत बनी पहचान
श्रेष्ठ नारी है बनी भारत की है शान
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सिद्धेश्वरी जी ने नारी शक्ति को अपनी कविताओं में इस प्रकार महिमा मंडित किया है कि इन कविताओं में ज्ञानवर्धक जानकारी भी उपलब्ध होती हैं। उन्होंने प्रथम महिला चिकित्सक श्री आनंदी बाई जोशी को भी अपनी कृति में शामिल किया है –
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बनी प्रेरणा हिन्द की, लिखा गया इतिहास।
स्वास्थ्य चिकित्सा भाग में, आनंदी है खास। ।
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इस देश की महिलाओं ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी सक्रियता और दक्षता का परिचय देते हुए कीर्तिमान स्थापित किया है और यही बात कवियत्री की काव्य पंक्तियों में दृष्टिगोचर होती है –
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शुभ कर्णम मल्लेश्वरी
ओलंपिक का खेल।
सिडनी ओलंपिक चली
दक्षिण भारत रेल। ।
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भारत की महान नारियों की महान गाथा का गौरव गान करते हुए शीलू जी की ये प्रथम महिला नौ सेना पायलट शिवांगी सिंह के विषय में भी कविता की एक झलक देखिए –
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सोने की गुड़िया सजी
नौ सेना के संग।
वीरों से हम कम नहीं
फौलादी हैं अंग।
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इस काव्य कृति में चर्चित साहित्यकारों ने भी अपनी प्रतिक्रियाओं के रूप में मंगल भाव व्यक्त किए हैं। प्रतिष्ठित साहित्यकारों के क्रम में श्री विजय नेमा अनुज जी, श्री संतोष कुमार सिंह जी, मथुरा, श्री अशोक पटसारिया नादान जी, टीकमगढ़, डा. संध्या जैन श्रुति जी, श्री राजेश पाठक प्रवीण जी, श्री संतोष नेमा संतोष जी की प्रभावी प्रतिक्रियाओं ने कृति की पठनीयता सिद्ध की है। श्री नर्मदा प्रकाशन से प्रकाशित इस काव्य संग्रह में मातृ शक्ति के रुप में 101 महान नारियों पर आधारित 5-5 दोहें शामिल हैं।
इन सशक्त और सार्थक काव्य रचनाओं का अध्ययन और मनन करने के पश्चात मेरा तो यह विश्वास है कि मातृ शक्ति के प्रति असीम श्रद्धा और नमन भाव से सृजित कवियत्री सिद्धेश्वरी सराफ शीलू जी की ये काव्य कृति साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद सिद्ध होंगी, इसलिए शासन के शिक्षा विभाग से मेरी अपेक्षा है कि इस काव्य कृति की महत्वपूर्ण कविताएं अगर पाठ्यक्रम में शामिल की जायें तो इन कविताओं की उपयोगिता और सार्थकता दोनों ही का महत्व प्रतिपादित होगा।
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© श्री यशोवर्धन पाठक
पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर
संपर्क – डा. मिली गुहा अस्पताल के पीछे, गुप्तेश्वर, जबलपुर, मोबाइल 9407059752
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈








