सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता !!वक्त!!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ८ ☆
☆ !! वक्त !! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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सृष्टि आरंभ से जो चला आ रहा, वो चला जा रहा नित्य ही साथ में।
बिन रुके बिन झुके बिन थके वो चले, बैठता भी नहीं वो कहीं पाथ में।
आदि में अंत में हर्ष में दर्द में, वो अकेला रहे सर्वदा साथ में।
वक्त होता सभी के सदा संग में, एक साथी नहीं वक्त के हाथ में।।
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नित्य संसार को वो निहारा करे, रोकता भी नहीं टोकता भी नहीं।
प्रेम को दर्द को राग को द्वेष को, जानता है मगर बोलता भी नहीं।
लोग बोले भला या बुरा बोल दे, ले तराजू कभी तोलता भी नहीं।
भोर में रात में धूप में छांँव में, कर्म को टाल दे सोचता भी नहीं।।
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बांधता वक्त सारे युगों को सदा, वक्त को बांध दे डोर ऐसी कहाँ।
राम भी कृष्ण भी वक्त को मान दें, जन्म ले वक्त से देख छोड़ें जहाँ।
वो बिना भेद के नित्य ही बाँटता, ज्ञान भी एक जैसा सभी को यहाँ।
कर्म को धर्म मानो चलो धर्म से, दंड भी मोक्ष भी ईश देते वहाँ।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




