श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # २१० ☆

☆ मुक्तक ।। जिओ मिसाल बेमिसाल किरदार बनकर ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

=1=

प्रेम की निगाह और दिल में अहसास रखो।

अपने ऊपर हमेशा  तुम विश्वास रखो।।

हर नजर में तेरे महोब्बत हो मिली हुई।

सदभाव को भी हमेशा अपने पास रखो।।

=2=

हर आदमी को समझने की नजर खास रखो।

हर आदमी की पीठ पर हाथ तुम शाबास रखो।।

मानवता का दामन  कभी छूटे नहीं तुमसे।

दिल में हमेशा संवेदना का ये आभास रखो।।

=3=

तरकश में तीर साथ आँखों में नीर भी रखो।

बसा कर दिल में अपने पराई पीर भी रखो।।

काम आओ सबके सुख- दुख दर्द में तुम।

दूर हर व्यसन से अपना यह शरीर भी रखो।।

=4=

मत गलत तुम कभी कोई तकरीर रखो।

हर किसी के लिए रहम की लकीर  रखो।।

जोड़ना ही जिंदगी और तोड़ना तो विनाश है।

बदल सके बुरे हालात ऐसी तरकीब  रखो।।

=5=

सोचो बड़ा मगर जरूरत को फकीर  रखो।

हौसलों की हाथ में हमेशा शमशीर रखो।।

हर दिल में जगह बनाओ अपने नाम की तुम।

मिसाल बेमिसाल जिंदगी एक नजीर रखो।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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