डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – माता पिता ।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३३० – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – माता पिता ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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दिखने में शालीन हो, मगर नहीं सद्भाव।
कंठ फूटता आपका, कितने देता घाव।।
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मीठे माँ के बोल हैं, मीठा है विश्वास।
सदा याद माँ की छुअन, अंतर्मन में खास।।
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अंतस में माता-पिता, सदा यही अहसास।
हम तो उनके अंश हैं, करते हैं अरदास।।
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जीवन के इस मोड़ पर, पिता नहीं है पास।
खले सदा उनकी कमी, मिलने का अहसास।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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