स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी द्वारा रचित – “कविता – सुभाष चंद्र बोस…” । हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।)
☆ काव्य धारा # २७५ ☆
☆ सुभाष चंद्र बोस… ☆ स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ☆
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तेइस जनवरी जन्म दिवस है उस भारत के लाल का
जिसका प्रेरक जीवन मन में पावन याद उभारता ।।
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इस दिन ने ही भारत मां को दिया सपूत सुभाष था
जिस पर भारत जनमानस का अडिग अमर विश्वास था।।
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जिन के गौरव से गौरान्वित भारत का इतिहास है
उन महानपुरुषों में से एक अनुपम वीर सुभाष है।।
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एक चरित्र अनोखा ऐसा जिसके प्रखर प्रकाश में
सभी दूसरे तारे धूमिल दिखते हैं आकाश में।।
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जिसे गृहस्थी, सुख-सपना सब दिखता था जंजाल सा।।
पा ऊंची शिक्षा भी जिसने रखी न वैभव लालसा ।।
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उपन्यास सी जिसकी जीवन गाथा कई आयाम की
जिसने कभी न की आकांक्षा कहीं किसी आराम की।।
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दृष्टि रही पाने स्वदेश की आजादी का रास्ता
लक्ष्य एक ही रहा, रखा न अधिक और से वास्ता।।
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दल के भीतर भी विरोध का गरल पान कर शांति से
होकर दूर भ्रांति से, जिसने जोड़ा नाता क्रांति से।।
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अपना दर्शन और दिशा ले आगे बढ़ते शान से
अमर आज भी है जो जग में, जन मन में सम्मान से।।
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© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी भोपाल ४६२०२३
मो. 9425484452
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





