श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता संकेत…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २७३ 

☆ # “संकेत…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

कैसे मोहब्बत करें हम

कैसे शिकायत करें हम

जो देखो वह लूटने बैठा है

कैसे हिफाजत करें हम

 

हमारी वफ़ा का कोई मोल नहीं

हमारी सादगी तो बेमोल रही

वह हर वक्त जफ़ा करते हैं

उसके खिलाफ कोई बोल नहीं

 

वह मगरूर होते जा रहे हैं

वह नए सितम रोज ढ़ा रहे हैं

बिक रहे हैं लोग मंडी में

अपने कदमों में सबको ला रहे हैं

 

एक फरिश्ते ने आवाज़ उठाई है

भीड़ भी धीरे-धीरे आई है

खामोशी टूटने लगी है अब

उसने संघर्ष की राह दिखाई है

 

सागर में लहरें उठने लगी है

मायूस आंखों में उम्मीद जगी है

कहीं यह तूफान का संकेत तो नहीं

हर सीने में एक आग दबी है/

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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