स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता – काव्यधर्मी दृष्टि-चिन्तन… २।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २९४ ☆
☆ – काव्यधर्मी दृष्टि-चिन्तन… २ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
और हम
योजनाओं की के पीछे
भाग रहे हैं.
उपकारित कामों से
नींद की गोलियाँ रखी हैं
वे सोने का अभिनय कर रहे हैं।
मगर जान रहे हैं।
कैसी विडम्बना है-
सर्वोदय का दावा करने वाले
समस्याओं की भाषा कह रहे हैं।
सत्ताधारियों का सत्तामोह
आकांक्षियों का द्रोह
और विरोधियों का व्यामोह
देखने वाली नई पीढी
यदि हो रही है सौरभहीन
तो उसका क्या दोष है ?
उसका जो आक्रोश है
वह चाहे ठीक न हो
लेकिन गलत नहीं है.
कौन ऐसा माई का लाल है
जो स्वार्थी से आहत नहीं है।
तो आओ
हम अहिंसा को नई परिभाषा दें.
देश के पथराये मन प्राणों को
समाजवाद की आशा दो
हमें जन्मेजयी यज्ञ में
विषधरों का
हवन करना ही पड़ेगा.
समाजवाद के विध्वंसकों का
सरेआम हमें
दहन करना ही पड़ेगा।
यदि ऐसा नहीं किया
तो फिर क्या उपाय है?
सिरफिरे नेताओं
और
पचहत्तर घरानों की खातिर
करोड़ों लोगों को अभावों की भट्टी में
झोंकना कहाँ का न्याय है?
☆
स्व डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





