श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # २१५ ☆
☆ मुक्तक ।। एक दिन कहानी बन कर रह जाता है आदमी ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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=1=
जीवन में इतना भी नहीं होना सामान चाहिए।
क्यों भर रहे इतना कि कुछ लेना आराम चाहिए।।
जीवन के अंत समय बस दुआएं ही हैं साथ जाती।
जीवन में कुछ अच्छा कमाया हुआ नाम चाहिए।।
=2=
क्रोध में वह सब मत गवाओं कि जो पास आया है।
शांत रह कर के जिन रिश्तों को आपने कमाया है।।
संघर्ष को बनाएं अपना दोस्त येआगे ले जाएगा।
बुद्धिविवेक धैर्य परिश्रम सेआदमी ने सब पाया है।।
=3=
संसार में जो भी समस्या उसका बना निदान भी है।
मत गवाओं अपना जीवन जो अनमोल महान भी है।।
एक दिन हम सब कहानी बन कर ही रह जाएंगे।
लोग कहें बाद में कि यह एक अच्छा इंसान भी है।।
=4=
जिसने मुश्किलों का सामना किया वो आगे बढ़ा है।
जिसने भाग्य को ही कोसा वह आज वहीं खड़ा है।।
यह जीवन प्रभु वरदान जैसा कि एक बार है मिलता।
वही बनता विजेता जाकर कि जो हालातों से लड़ा है।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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