श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # २१७ ☆
☆ मुक्तक ।।राखी।।रक्षासूत्र।।रक्षाबंधन।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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=1=
नहीं खंडित हो कभी भी, यह भाई बहन का प्यार।
विस्तार तो है अनंत इसका, महिमा भी अपरम्पार।।
स्नेह – प्रेम का बंधन यह है, नहीं केवल रक्षासूत्र।
बस एक धागे में पिरो दिया, वचनबद्धता का संसार।।
=2=
भाई बहन के प्रेम – स्नेह, का प्रतीक है रक्षाबंधन।
एक सूत्र की ताकत का, यह यकीन है रक्षाबंधन।।
सदियों से यही एक विश्वास, चलता चला आया है।
इसी अटूट बंधन की ही एक, लकीर है रक्षाबंधन।।
=3=
एक धागा है राखी पर बांधा, प्यार अपरम्पार है।
एक सूत्र में भरा हुआ वचनों, का पूरा संसार है।।
प्रेम- स्नेह लगाव का गर्व है, यह पर्व रक्षा बंधन।
भाई करता बहन की सुरक्षा, हर बार लगातार है।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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