श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “पवित्र बंधन…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २७८

☆ # “पवित्र बंधन…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

रक्षाबंधन

सिर्फ धागों का नहीं

दिलों का बंधन है

इस पवित्र बंधन को

शत-शत वंदन  है

इसमें छुपा है

भाई बहन का प्यार

सदियों से गवाह है

यह सारा संसार

कितने स्नेहमय लगें

यह रेशम के धागें

जिनकी कोई बहन नहीं

वे हैं कितने अभागे

इसमें छुपी है

बचपन से

यौवन तक की

साथ बिताई बातें

भूखे प्यासे रहकर

साथ काटी रातें

अभाव में भी खुश रहकर

कैसे पड़ता है जीना

एक दूजे का सहारा बनकर

हर दुख पड़ता है जीना

बहन के सुख दुख में

शामिल होता है भाई

राखी बंधवाकर

रक्षा करने की

उसने कसम है खाई

काल का चक्र भी

यह खुशियां ना लूटें

भाई बहन का रिश्ता

जन्म जन्म तक ना टूटें

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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