श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “देखकर इक फ़क़ीर का हुज़रा…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६० ☆
देखकर इक फ़क़ीर का हुज़रा… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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ग़म हुए दूर हम ख़ुशी से मिले
आप आये तो ज़िंदगी से मिले
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इश्क़ में क्या बड़ा है क्या छोटा
काश सागर भी आ नदी से मिले
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बेअ‘दब बेटे का करुँ तो क्या
बाप की आज बेबसी से मिले
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देखकर इक फ़क़ीर का हुज़रा
ऐसा लगता कि सादगी से मिले
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गिर गया कितना आदमी लगता
जब भी मसली गई कली से मिले
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आ‘ब जिसमें मिले हो उस रंग का
आदमी ऐसा ही किसी से मिले
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करता दावा मिला वो दुनिया से
आदमी काश आप ही से मिले
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अश्क़ कितने अरुण छुपे इसमें
खिलखिलाती तेरी हँसी से मिले
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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