श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “गफ़लत न कीजियेगा निभाने में …“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६१ ☆
गफ़लत न कीजियेगा निभाने में… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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दुनिया की भीड़ भाड़ में अपना न मिल सका
जो भी मिला है मुझसे से वो पूरा न मिल सका
मंज़िल की चाह जब न तलब मेरी बन सकी
मंज़िल का मेरी मुझको भी रस्ता न मिल सका
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उस पीर की मज़ार पै जाते थे चश्मे-नम
इक शख़्स वापसी में पै रोता न मिल सका
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इस हाई वे से हो गई रफ्तार तेज़ पर
राही को बचने धूप से साया न मिल सका
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विरसे में जो था बाँट लिए भाई जब सभी
वो साथ देने माँ का ही जाया न मिल सका
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इस काहिली ने मुझपे सितम ढाया इस तरह
तक़दीर में जो मेरी वो लिक्खा न मिल सका
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मुफ़्लिस की मुफ़्लिसी के सितम की ये इंतिहां
बच्चे को उसका चाहा खिलौना न मिल सका
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गफ़लत न कीजियेगा निभाने में कुछ कभी
करता रफ़ू जो रब्त की धागा न मिल सका
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शानों पे जिनको मैंने चढ़ा दी अरुण उड़ान
अंतिम सफ़र को उनका ही शाना न मिल सका
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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