श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “उसका ईमान मर गया…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६२ ☆
उसका ईमान मर गया… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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मन के भ्रम से उबर गया कब का
सच था मुझमें निखर गया कब का
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हार की फ़िक़्र,डर गया कब का
जीत का ज़ोम भर गया कब का
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राह की रौनकें जो रास आई
छोड़ वो हम सफ़र गया कब का
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सच का परचम उठा लिया जबसे
सबका ख़ौफ़ो-ख़तर गया कब का
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बात पर जिसकी हो फ़िदा इतने
उसका ईमान मर गया कब का
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छाँव हटते पिता की सिर से मेरे
दर्प सारा उतर गया कब का
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तोड़कर रब्त हाल वो पूछे
ख़्वाब हर इक बिखर गया कब का
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दौरे हाजिर का ये सितम है अरुण
आदमी मुझमें मर गया कब का
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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