श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “चल रही राह ऐसी कुछ दुनिया“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६५ ☆

✍ चल रही राह ऐसी कुछ दुनिया… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

ख़त्म होगी मेरी सज़ा कब तक

ज़िंदगी की करूँ दुआ कब तक

 दर्दे-दिल दूर करने पी तो लूँ

रंग लाएगी ये दवा कब तक

 *

 हार मानी नहीं अभी मैंने

तू करेगा ग़ज़ल-सरा कब तक

 *

रह गुज़र ज़ीस्त की थका डाली

जिस्म अपना निचोड़ता कब तक

 *

मैं जलाता ही जा रहा दीपक

चल बुझाती है तू हवा कब तक

 *

चल रही राह ऐसी कुछ दुनिया

आख़िरश रुकना ज़लज़ला कब तक

 *

रंगे ज़िद्दत में जी रहा है तू

ज़ीस्त का समझे फ़लसफ़ा कब तक

 *

बेवफ़ाई के घन चलाते अरुण

प्यार का घर रहे टिका कब तक

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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