श्री यशोवर्धन पाठक
☆ पुस्तक चर्चा ☆
☆ कथाकार सुश्री मृदुल कोस्टा की लघु कथा कृति – मृदुल दृष्टि ☆ समीक्षा – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
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यह सर्व मान्य है कि जबलपुर के पाथेय प्रकाशन ने पिछले वर्षों में अधिकाधिक साहित्यिक कृतियों को प्रकाशित करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। इसी तारतम्य में पिछले दिनों पाथेय प्रकाशन ने चर्चित लेखिका सुश्री मृदुल कोस्टा की एक ऐसी पठनीय कृति की प्रभावी प्रस्तुति की है जिसमें पाठकों को अपनी अपनी रुचि के अनुसार गद्य और पद्य की विभिन्न रचनायें पढ़ने को मिल सकती है।
मृदुल दृष्टि संकलन की अनेक रचनाएं ऐसी हैं जो लेखिका के हृदय में सहज मानवीय संवेदना से उत्पन्न हुई प्रतीत होती हैं। कृति का गहनता से अध्ययन मनन करने के बाद यह बात तो सामने आती है कि लेखिका की दृष्टि अत्यंत व्यापक है और उन्होंने पाठकों के प्रत्येक वर्ग की रुचि और पसंद के अनुरूप अपनी सृजित रचनाओं को पुस्तक में शामिल किया है। इस संग्रह में विभिन्न सारगर्भित और सामयिक विषयों पर आलेख, कहानियां, संस्मरण, कविताओं इत्यादि ऐसी रचनाओं सम्मिलित हैं जो कि पाठकों के लिए पठनीय तो हैं ही साथ में उनके जीवन के लिए दिशा दर्शक और प्रेरणा का विषय भी बन सकती हैं। इस कृति की एक अन्य खूबी यह भी है कि वह पाठकों को भटकाव या पलायन से रोकती है और परिस्थितियों से संघर्ष करने की अपील करती है। कुरीतियों में जकड़ी नारी हो या संघर्ष से घबराया – थका पुरुष, सभी के लिए अधिकांश रचनाओं में अविराम संघर्षजयी बनने का प्रोत्साहन देने की लालसा भी लेखिका में विद्यमान है और इस कारण वे प्रायः सकारात्मक दृष्टिकोण कायम रखती हैं। यद्यपि कहीं कहीं विषमताओं और विद्रूपताओं के प्रति खीझ भी स्पष्ट दिखती है लेकिन उसके बाद भी अनौचित्य से संघर्ष की उनकी मानसिक दृढ़ता कहीं कमजोर दिखाई नहीं देती है। मुझे विश्वास है कि यह कृति समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगिता और पठनीयता की दृष्टि से एक श्रेष्ठ कृति साबित होगी।
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© श्री यशोवर्धन पाठक
पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर
संपर्क – डा. मिली गुहा अस्पताल के पीछे, गुप्तेश्वर, जबलपुर, मोबाइल 9407059752
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






