सुश्री मंजिरी “निधि”
(बड़ोदा से सुश्री मंजिरी “निधि” जी की गद्य एवं छंद विधा में विशेष अभिरुचि है और वे साथ ही एक सफल महिला उद्यमी भी हैं। आज प्रस्तुत है आपकी कविता ‘गीत – जीवन‘।)
☆ मंजिरी साहित्य # १४ ☆
गीत – जीवन ☆ सुश्री मंजिरी “निधि”
जीवन को अनमोल बनाओ l
संघर्षो से मत घबराओ ll
*
बधाओं से पार निकलना l
सतत वेग से आगे चलना ll
हसते और हँसाते जाओ l
संघर्षो से मत घबराओ ll
*
सुख दुःख पथ के अविरल राहीl
कर्म बनेंगे मंजिल चाही ll
नित सोपान चढ़ते जाओ l
संघर्षो से मत घबराओ ll
*
असत्य राह त्याग कर जाएं l
मन को सुख की राह दिखाएंll
जीवन बगिया तुम महकाओ l
संघर्षो से मत घबराओ ll
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© सुश्री मंजिरी “निधि”
बड़ोदा, गुजरात
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




