श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “सारा कमाल इश्क़ का…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १५९ ☆
सारा कमाल इश्क़ का… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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मौला करम किया वही क़ीमत बनी रहे
अज़दाद जो बनाये वो इज़्ज़त बनी रही
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सारा कमाल इश्क़ का तेरे किया हुआ
दरिया को मोड़ने की जो हिम्मत बनी रही
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रख्खी हर एक याद हिफाज़त से ज़ह्न में
अपने तमाम दोस्त से निस्बत बनी रही
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ये माँ की परवरिश का करिश्मा है देखिए
झूठों के बीच रहके सदाक़त बनी रही
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ग़ुरबत में हाथ में न जो फैलाया था कभी
मेरे ख़ुदा की मुझपे इनायत बनी रही
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अल्लाह ने दी नेक वो औलाद है मुझे
दस्तार मेरे सर की सलामत बनी रही
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इंसान बन मशीन गया दौरे- हाल में
घर को न वक़्त दे ये शिकायत बनी रही
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बचपन में जिसके साथ में खेले छुपा छुपी
ताउम्र उससे मिलने की चाहत बनी रही
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अहसास का न धागा कभी टूटने दिया
रिश्तों में वो हमारे थी लज्ज़त बनी रही
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मैंने अरुण हराम समझ घूस ली नहीं
इस दौर में भी घर मेरे बरक़त बनी रही
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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