श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “रोशनी के दीए जलते हैं…”।) 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २३७ ☆

☆ # “रोशनी के दीए जलते हैं…” # ☆

☆

देखो वहां पर रोशनी के दीए जलते हैं

चलो कुछ देर वहां पर चलते हैं

 

कितना सुकून है कितनी यहां शांति है

ना कोई पाखंड ना कोई भ्रांति है

हजारों दीपक एक साथ जल रहे हैं यहां

तम की दुनिया में रोशनी की यह नई क्रांति है

अंधेरे के पोषक तत्व अब हाथ मलते हैं

चलो कुछ देर वहां पर चलते हैं

 देखो वहां पर रोशनी के दीए जलते हैं

 

दिया और बाती का यह कैसा मेल है

दोनों में प्रेम भरता यह दिए का तेल है

जहां पतंगा खुशी-खुशी जल जाए, उफ्फ ना करें

प्रीत का यह कैसा अद्भुत खेल है

प्रीत को अमर करने पतंगे

 हर बार यूं ही जलते हैं

चलो कुछ देर वहां पर चलते हैं

देखो वहां पर रोशनी के दीए जलते हैं

 

यह जलते दीपक प्रेम का संदेश लाए हैं

अंधकार में डूबे दीलों में रोशनी का दिया जलाए हैं

तुम भी एक दीपक किसी के दिल में जलाओ दोस्तों

समझ लो जीवन भर तुम्हारे साथ उसकी दुआएं हैं

यही मुक्ति है यही मोक्ष है

फिर हम क्यों खुद को छलते है

चलो कुछ देर वहां पर चलते हैं

देखो वहां पर रोशनी के दीए जलते /

☆

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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