श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “चलो जिंदगी को…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २४० ☆
☆ # “चलो जिंदगी को…” # ☆
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चलो जिंदगी को
नई उमंग के साथ जीते हैं
पुरानी बोतल में नई मदिरा
रोज थोड़ी-थोड़ी पीते हैं
खुशियों से भरा संसार है
कांटे थोड़े फूल बेशुमार है
खुशबू ही खुशबू है चारों तरफ
चमन में बहार ही बहार है
क्यों याद करें जो पल हमारे बीते
चलो जिंदगी को
नई उमंगों के साथ जीते हैं
पतंगों सी हमारी प्रीत है
जल जाना प्रीत की रीत है
एक रात के मेहमान है हम
एक रात के सब यहां मीत है
फिर क्यों अपने जज्बातों को सिते हैं
चलो जिंदगी को
नई उमंग के साथ जीते हैं
सब दिखावे के यहां रिश्ते हैं
सब दिखावे के यहां फरिश्ते हैं
किसी को फिक्र नहीं है तेरी
क्यों तेरे जख्म दिन रात रिसते है
चल जो बची है मय
उसे बेहिसाब पीते हैं
चलो जिंदगी को
नई उमंग के साथ जीते हैं
पुरानी बोतल में नई मदिरा है
रोज थोड़ी-थोड़ी पीते हैं /
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© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




