श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशिसुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘अभी बाकी है…‘।)
☆ शशि साहित्य # २० ☆
कविता – अभी बाकी है… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
बहुत लुटाया है…
उससे ज्यादा बाकी है..
थाम कर हाथ चल दूं, खुद का,
राह अभी वह बाकी है..
आईने में देख खुद को,
मुस्कुरा सकूं,
सम्मान अभी वह बाकी है..
आसमान दामन में भर लूं,
अरमान अभी वह बाकी है..
जरा तौल लूं पंखों को,
उड़ान अभी तो बाकी है..
आवाज सुनकर थम जाऊं..
पुकार में अब क्या बाकी है????
भोर का सूरज चमक उठा,
ना अब अंधियारा बाकी है..
मन उम्मीदों से भरा हुआ है,
“उसको” गुहार सुनना पड़ेगी,
प्रार्थना दिल से जारी है..
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




