श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘प्रेरणा…‘।)
☆ शशि साहित्य # २८ ☆
कविता – प्रेरणा… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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कोई हमको याद करे,
क्यों बने मोहताज…
यादों में बस जाएं,
ऐसे रखें जज्बात…
कदमों के निशां ढूंढ़ें,
बनें सहज सुजान…
कर्मों से रौशन करें,
बन जाएं वो मशाल…
मेहनत की जयकार हो,
रचना है यह इतिहास…
प्रयास ये, कि संग सबका हो विकास…
नहीं थमना, नहीं रुकना अब,
समय मिलता है अल्प…
बने सबकी मुस्कान का कारण,
लेना है यह संकल्प…
स्वार्थ त्याग से ही होता है,
वंदित, जग में नाम,
यादों में बस जाएं,
बस… करना है ऐसे काम…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




