श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा –  गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी,  संस्मरण,  आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – रसेदार सब्ज़ी)

☆ लघुकथा # १२० – रसेदार सब्ज़ी श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

शाम के पाँच बज चुके थे। सरकारी दफ़्तर में हिसाब-किताब देखते-देखते रामप्रसाद बाबू की आँख लग गई थी।

नींद में वह मुस्कुरा रहे थे—”आज घर जाऊँगा तो रसेदार सब्ज़ी बनी होगी। सुबह दाल बनाने को भी कह दिया था। दाँत अब पहले जैसे नहीं रहे, पर रसेदार सब्ज़ी के साथ रोटी आराम से खा लेता हूँ।”

तभी चपरासी ने आवाज़ दी, “बाबूजी! पाँच बज गए। घर नहीं जाना क्या?”

वह चौंककर उठे, झोला उठाया और रास्ते में आलू-टमाटर खरीद लिए। एक दुकान पर नज़र पड़ी तो पत्नी के लिए एक छोटा-सा पर्स भी ले लिया। मन ही मन सोचने लगे, “बहुत खुश होगी।”

घर पहुँचे। ताला खोला। भीतर सन्नाटा था।

उन्होंने सब्ज़ियाँ मेज़ पर रखीं और नया पर्स निकालकर दीवार पर टँगी पत्नी की तस्वीर के सामने रख दिया।

काँपती आवाज़ में बोले, “देखो… तुम्हारे लिए पर्स लाया हूँ।”

फिर रसोई में जाकर डिब्बे से सूखी रोटियाँ निकालीं, पानी में भिगोकर खाने लगे।

आँखों से आँसू लगातार गिरते रहे।

पत्नी को गुज़रे तीन वर्ष हो चुके थे, पर प्रेम ने आज तक यह स्वीकार नहीं किया था कि वह अब लौटकर नहीं आएगी।

उधर उसी समय उनका बेटा और बहू एक महंगे भोजनालय में परिवार के साथ भोजन कर रहे थे। तस्वीर खिंची और सामाजिक माध्यम पर लिखा गया—

“माता-पिता का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी दौलत है।”

कुछ ही देर में सैकड़ों प्रशंसाएँ मिल गईं।

इधर रामप्रसाद बाबू की थाली में आज भी सूखी रोटी थी… और उधर बेटे की तस्वीर में संस्कार।

विडंबना यह नहीं कि पिता अकेला था, विडंबना यह थी कि उसका बेटा कभी अकेला दिखाई नहीं देता था।

© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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