डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – कविता – सावन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३३४ – साहित्य निकुंज ☆
☆ कविता – सावन ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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काले बादल घिर-घिर आए,
नभ ने ली अंगड़ाई,
बरखा बरसी रिमझिम-रिमझिम ,
धरती खूब नहाई।
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सौंधी-सौंधी खुशबू माटी की ,
मन को खूब रिझाया,
सूना-सूना मन का आँगन,
सावन गीत सुनाया।
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झूले पड़े डाली-डाली,
हँसती हर अमराई,
कूक-कूक कर कोयल ने ,
प्रेम-पाती पहुँचाई।
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मोती-सी बूँदें पत्तों पर,
फूलों पर मुस्कान,
छेड़ दिये सावन ने फिर ,
मन का मधुर गान।
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भीगी पलकों में छिपी है,
अनकही कितनी कहानी,
सावन केवल ऋतु नहीं है,
सावन है मन की रानी।
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आओ मिलकर गीत सुनाएँ,
इस मौसम की रीत,
बूँद-बूँद में प्रेम घुला है,
मन भावन संगीत।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120, नोएडा (यू.पी )- 201307
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≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





