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मराठी साहित्य – कादंबरी ☆ साप्ताहिक स्तम्भ #5 ☆ मित….. (भाग-5) ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते. हमें यह प्रसन्नता है कि श्री कपिल जी ने हमारे आग्रह पर उन्होंने अपना नवीन उपन्यास “मित……” हमारे पाठकों के साथ साझा करना स्वीकार किया है। यह उपन्यास वर्तमान इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति ( स्त्री/पुरुष) से मित्रता के परिणाम को उजागर करती है। अब आप प्रत्येक शनिवार इस उपन्यास की अगली कड़ियाँ पढ़ सकेंगे।)  इस उपन्यास के सन्दर्भ में श्री कपिल जी के ही शब्दों में – “आजच्या आधुनिक काळात इंटरनेट मुळे जग जवळ आले आहे. अनेक सोशल मिडिया अॅप द्वारे अनोळखी लोकांशी गप्पा करणे, एकमेकांच्या सवयी, संस्कृती आदी जाणून घेणे. यात बुडालेल्या तरूण तरूणींचे याच माध्यमातून प्रेमसंबंध जुळतात. पण कोणी अनोळखी...
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मराठी साहित्य – कादंबरी ☆ साप्ताहिक स्तम्भ #4 ☆ मित….. (भाग-4) ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते. हमें यह प्रसन्नता है कि श्री कपिल जी ने हमारे आग्रह पर उन्होंने अपना नवीन उपन्यास “मित……” हमारे पाठकों के साथ साझा करना स्वीकार किया है। यह उपन्यास वर्तमान इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति ( स्त्री/पुरुष) से मित्रता के परिणाम को उजागर करती है। अब आप प्रत्येक शनिवार इस उपन्यास की अगली कड़ियाँ पढ़ सकेंगे।)  इस उपन्यास के सन्दर्भ में श्री कपिल जी के ही शब्दों में – “आजच्या आधुनिक काळात इंटरनेट मुळे जग जवळ आले आहे. अनेक सोशल मिडिया अॅप द्वारे अनोळखी लोकांशी गप्पा करणे, एकमेकांच्या सवयी, संस्कृती आदी जाणून घेणे. यात बुडालेल्या तरूण तरूणींचे याच माध्यमातून प्रेमसंबंध जुळतात. पण कोणी अनोळखी...
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मराठी साहित्य – कादंबरी ☆ साप्ताहिक स्तम्भ #3 ☆ मित….. (भाग-3) ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते. हमें यह प्रसन्नता है कि श्री कपिल जी ने हमारे आग्रह पर उन्होंने अपना नवीन उपन्यास “मित……” हमारे पाठकों के साथ साझा करना स्वीकार किया है। यह उपन्यास वर्तमान इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति ( स्त्री/पुरुष) से मित्रता के परिणाम को उजागर करती है। अब आप प्रत्येक शनिवार इस उपन्यास की अगली कड़ियाँ पढ़ सकेंगे।)  इस उपन्यास के सन्दर्भ में श्री कपिल जी के ही शब्दों में – “आजच्या आधुनिक काळात इंटरनेट मुळे जग जवळ आले आहे. अनेक सोशल मिडिया अॅप द्वारे अनोळखी लोकांशी गप्पा करणे, एकमेकांच्या सवयी, संस्कृती आदी जाणून घेणे. यात बुडालेल्या तरूण तरूणींचे याच माध्यमातून प्रेमसंबंध जुळतात. पण कोणी अनोळखी...
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मराठी साहित्य – कादंबरी ☆ मित….. (भाग-2) ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते. हमें यह प्रसन्नता है कि श्री कपिल जी ने हमारे आग्रह पर उन्होंने अपना नवीन उपन्यास “मित……” हमारे पाठकों के साथ साझा करना स्वीकार किया है। यह उपन्यास वर्तमान इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति ( स्त्री/पुरुष) से मित्रता के परिणाम को उजागर करती है। अब आप प्रत्येक शनिवार इस उपन्यास की अगली कड़ियाँ पढ़ सकेंगे।)  इस उपन्यास के सन्दर्भ में श्री कपिल जी के ही शब्दों में – “आजच्या आधुनिक काळात इंटरनेट मुळे जग जवळ आले आहे. अनेक सोशल मिडिया अॅप द्वारे अनोळखी लोकांशी गप्पा करणे, एकमेकांच्या सवयी, संस्कृती आदी जाणून घेणे. यात बुडालेल्या तरूण तरूणींचे याच माध्यमातून प्रेमसंबंध जुळतात. पण कोणी अनोळखी...
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मराठी साहित्य – कादंबरी ☆ मित….. (भाग-1) ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते. हमें यह प्रसन्नता है कि श्री कपिल जी ने हमारे आग्रह पर उन्होंने अपना नवीन उपन्यास "मित......" हमारे पाठकों के साथ साझा करना स्वीकार किया है। यह उपन्यास वर्तमान इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति ( स्त्री/पुरुष) से मित्रता के परिणाम को उजागर करती है। अब आप प्रत्येक शनिवार इस उपन्यास की अगली कड़ियाँ पढ़ सकेंगे।)  इस उपन्यास के सन्दर्भ में श्री कपिल जी के ही शब्दों में - "आजच्या आधुनिक काळात इंटरनेट मुळे जग जवळ आले आहे. अनेक सोशल मिडिया अॅप द्वारे अनोळखी लोकांशी गप्पा करणे, एकमेकांच्या सवयी, संस्कृती आदी जाणून घेणे. यात बुडालेल्या तरूण तरूणींचे याच माध्यमातून प्रेमसंबंध...
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मराठी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तंभ –केल्याने होतं आहे रे # 4 ☆ फुलवा ☆ – श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे

श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे   (वरिष्ठ  मराठी साहित्यकार श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे जी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने के कारण आपके साहित्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्कारों की झलक देखने को मिलती है. इसके अतिरिक्त  ग्राम्य परिवेश में रहते हुए पर्यावरण  उनका एक महत्वपूर्ण अभिरुचि का विषय है. श्रीमती उर्मिला जी के    “साप्ताहिक स्तम्भ – केल्याने होतं आहे रे ”  की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है  उनकी शिक्षाप्रद कहानी फुलवा .  आज भी गांवों में और यहां तक क़ि शहरों में भी लोग अंधश्रद्धावश अपना सब कुछ खो देते हैं .  यह कहानी हमें प्रेरणा देती है क़ि यदि समय रहते किसी को अंधश्रध्दा से बचाया जा सके, तो उसे एक नवजीवन प्रदान किया जा सकता है और इससे बड़ी कोई भी समाजसेवा नहीं है. )    ☆ साप्ताहिक स्तंभ –केल्याने होतं आहे रे # 4 ☆   ☆ कथा - फुलवा  ☆   आठवड्याचा बाजार भरला होता. कोणती भाजी घ्यावी अन् काय काय घ्यावं ह्या विचारात शिंदेबाई बाजार बघत फिरत होत्या,तेवढ्यात त्यांच्या समोर एक वयस्कर बाई...
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मराठी साहित्य – मराठी कथा – ☆ वेग वाढला आणि शर्यत संपली ☆ – श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे    (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते. हम भविष्य में श्री कपिल जी की और उत्कृष्ट रचनाओं को आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे. आज प्रस्तुत है  उनकी एक हृदयस्पर्शी कहानी  वेग वाढला आणि शर्यत संपली. हम सड़क पर भावावेश में  अपने वाहनों की गति बढ़ाकर स्पर्धा  करते हैं  और अचानक एक क्षण आता है जब स्पर्धा, दौड़ , शर्त और जीवन सब समाप्त हो जाता है. हम यह भी भूल जाते हैं क़ि हमारे साथ कई लोग जुड़े हुए हैं जो  जीवनपर्यन्त उस दुर्घटना को जीते हैं.  )   ☆ वेग वाढला आणि शर्यत संपली ☆   स्पर्धेच्या मैदानावर धावतांना वेग अतिशय महत्वाचा असतो. आणि त्या वेगाला संयमाची जोड असली कि स्पर्धक स्पर्धेत शेवटपर्यंत...
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मराठी साहित्य – कथा/लघुकथा – ☆ अडगळ ☆ – सौ. सुजाता काळे

सौ. सुजाता काळे (सौ. सुजाता काळे जी की कथा ‘अडगळ ’ इस भौतिकवादी एवं स्वार्थी संसार की झलक प्रस्तुत करती है। इस मार्मिक एवं भावुक कथा के एक-एक शब्द , एक-एक पंक्तियाँ एवं एक-एक पात्र हमें आज के मानवीय मूल्यों में हो रहे ह्रास का एहसास दिलाते हैं ।यह जीवन की सच्चाई है। क्या  'समय' के साथ 'संबंध'  भी पुरानी वस्तुओं की तरह 'कबाड़' में तब्दील हो जाते हैं?  मैं इस भावनात्मक सच्चाई को कथास्वरूप में रचने के लिए सौ. सुजाता काळे जी की लेखनी को नमन करता हूँ।) ☆ अडगळ ☆   काल रात्री आव्वाचा फ़ोन आला. 'ताई' म्हणून ओक्साबोक्शी रडायला लागली. मला वाटलं  की आप्पांबरोबर भांडण झालं की काय ? तीच रडणं एकूण मलाही  धक्का  बसला. परवा तिचा एकुलता एक मुलगा सार्थक त्याच्या बायको मुलाबरोबर त्याच्या नवीन घरी राहायला गेला होता. तिचे घर सुने सुने झाले होते. रिकामे झाले होते. तिच्या घरट्यातील पाखरे उडून गेली होती आणि तिचे घर रिकामे झाले होते. म्हातारपणात उतार वय झालेल्या आई बापाला सोडून तो गेला होता. ज्या...
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मराठी साहित्य – मराठी कथा – ☆ समतोल ☆ – श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे    (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है। आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है। एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते।  हम भविष्य में श्री कपिल जी की और उत्कृष्ट रचनाओं को आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। आज प्रस्तुत है  उनकी एक कहानी समतोल ।)   ☆ समतोल ☆   " काय होईल पुढच्या आयुष्यात काही कळत नाहीये यार. कुठली म्हणजे कुठलंही गणित जुळून येत नाहीये." आदिती राघवला बोलत होती. बाजुला बसलेली रागीणीही गंभीर होऊन एकत होती. रागीणी आणि राघव तिचे काॅलेजचे मित्र. पण त्यांच्यात एक जिवाभावाचं नातं बनलं होतं. माणसं जोडण्याची  किंवा जोडून ठेवण्यासाठी रक्ताच्या नात्यांची गरज नसते. हे त्यांच नातं गवाही देत होतं. त्यांचा गृपच एकंदर मस्तीखोर आणि अभ्यासूही तेवढाच होता. काॅलेज सोडून पाच वर्षापेक्षा अधिक काळ होऊनही त्यांची मैत्री घट्ट होती. कोणीही कोणालाही विसरलं नव्हतं. सुरूवातीला एकमेकांच्या...
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मराठी साहित्य – मराठी कथा / लघुकथा – ☆ गुलाम ☆ – श्री विक्रम मालन आप्पासो शिंदे

श्री विक्रम मालन आप्पासो शिंदे (श्री विक्रम मालन आप्पासो शिंदे जी की कथाओं  के पात्र समाज के प्रत्येक वर्ग से चुने हुए होते हैं।  श्री विक्रम जी भी  अपने आसपास के लोगों में अपनी कहानियों के पात्र चुनते हैं और उसके आधार पर  कथानक का ताना बाना बुनते हैं जिसके कारण उनकी कहानी सजीव प्रतीत होती है। "गुलाम " उनकी ऐसी ही एक कहानी है। हम भविष्य में श्री विक्रम जी से उनके ऐसे ही उत्कृष्ट साहित्य की अपेक्षा रखते हैं।)   ☆ गुलाम ☆    उन्हाळ्याचे दिवस होते.जेमतेम दुपारचे बार-साडेबारा वाजले असतील..रणरणत्या उन्हाचे अंगाला चटके बसत होते.मे महिन्यातील शेवटचा आठवडा सरत आला होता. आणि त्यातच उन्हाळी पावसाची चिन्हे घेवून, काळेभोर ढग आकाशात जमा होवू लागले होते. वारा स्तब्ध झाला होता.झाडांच्या पानांची सळसळ पूर्ण थांबली होती. भीषण उन्हाचा रकाटा आणि वातावरण दडपुन टाकणारे ढग यामुळे कोंडत्या निखाऱ्याच्या उष्णतेने अंगाचा दाह उसळला होता. पेटते अंगारे अंगावर ओतून अंघोळ केल्याचा भास होत होता. अंगाची लाहीलाही होत होती. किड्या मुंग्यांची राख-रांगोळी पडत होती.मानवेतर प्राणिमात्रांचे तर आभाळाच् झाल होत. तरीही;...
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