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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कवितेच्या प्रदेशात # 84 – इलाहींच्या आठवणी…. ☆ सुश्री प्रभा सोनवणे

सुश्री प्रभा सोनवणे (आप  प्रत्येक बुधवार को सुश्री प्रभा सोनवणे जी  के उत्कृष्ट साहित्य को  साप्ताहिक स्तम्भ  – “कवितेच्या प्रदेशात” पढ़ सकते  हैं।) (जन्म – 1 मार्च 1946 मृत्यु – 31 जनवरी 2021) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – कवितेच्या प्रदेशात # 84 ☆ ☆ इलाहींच्या आठवणी…. ☆ एकतीस जानेवारीला सुप्रसिद्ध गजलकार इलाही जमादार आपल्यातून निघून गेले. आणि मनात अनेक आठवणी जाग्या झाल्या...... तेवीस जानेवारीला मी त्यांना फोन केला होता तेव्हा त्यांच्या वहिनी ने फोन घेतला, मी म्हटलं, मी प्रभा सोनवणे, मला इलाहींशी बोलायचं आहे....त्यांनी इलाहींकडे फोन दिला, तेव्हा ते अडखळत म्हणाले, "आता निघायची वेळ झाली ......पुढे बोललेली दोन वाक्ये मला समजली नाहीत....मग त्यांच्या वहिनी ने फोन घेतला, त्या म्हणाल्या "आता त्यांना उठवून खुर्चीत बसवलं आहे, तब्बेत बरी आहे आता.".....त्या नंतर सात दिवसांनी ते गेले! मला इलाहींची पहिली भेट आठवते, १९९३ साली बालगंधर्व च्या कॅम्पस मधून चालले असताना अनिल तरळे या अभिनेत्याने माझी इलाहींशी ओळख करून दिली, मी इलाहीं च्या गजल वाचल्या होत्या, इलाही जमादार हे गजल क्षेत्रातील मोठं नाव होतं, मी त्यांच्यावरचा एक लेख ही त्या काळात वाचला होता, दारावरून माझ्या त्यांची वरात गेली मेंदीत...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ याद गली से, एक सत्यकथा- कैमला गांव — 62 साल पुराना ☆ श्री अजीत सिंह, पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन

श्री अजीत सिंह (हमारे आग्रह पर श्री अजीत सिंह जी (पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन) हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए विचारणीय आलेख, वार्ताएं, संस्मरण साझा करते रहते हैं।  इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं। आज प्रस्तुत है आपका एक अविस्मरणीय संस्मरण  ‘याद गली से, एक सत्यकथा- कैमला गांव … 62 साल पुराना। हम आपसे आपके अनुभवी कलम से ऐसे ही आलेख समय समय पर साझा करते रहेंगे।) ☆ संस्मरण  ☆ याद गली से, एक सत्यकथा- कैमला गांव -- 62 साल पुराना ☆ कैमला, जो चंद रोज़ पहले तक एक अज्ञात सा गांव था, अब मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। गत रविवार दस जनवरी को हरियाणा के मुख्य मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने वहां एक जनसभा को संबोधित करना था पर ग्रामवासियों के एक वर्ग तथा आस पास के गांवों से आए किसान आंदोलनकारियों ने भारी पुलिस बंदोबस्त के बावजूद उस जगह घुस कर धरना दे दिया जहां जनसभा होनी थी। खट्टर का हेलीकॉप्टर वहां नहीं उतर सका और वे वापस जिला मुख्यालय करनाल...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ हिमाचल से मेरा प्रेम और कुछ यादें… ☆ श्री कमलेश भारतीय

श्री कमलेश भारतीय (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता आदरणीय श्री कमलेश भारतीय जी से किसी भी रूप में जुड़ना एक रिश्ता बन जाने जैसा है। एक अनजान रिश्ता। मुझे यह सौभाग्य मिला डॉ मधुसूदन पाटिल सर के माध्यम से। उनके संस्मरण हमें स्मृतियों के उस संसार में ले जाते हैं जहाँ जाना अब संभव नहीं है। हम उस संस्मरण के एक तटस्थ पात्र बन जाते हैं। बिलकुल आर के लक्ष्मण के पात्र...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ तुम्हें याद हो कि न याद हो ☆ श्री कमलेश भारतीय

श्री कमलेश भारतीय (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता आदरणीय श्री कमलेश भारतीय जी का यह संस्मरण अपने साथ कई लघुकथाएं लेकर आया है जो वर्तमान में भी उतना ही सार्थक है जो अस्सी के दशक में था। लेखक और संघर्ष का एक रिश्ता रहा है। यह संस्मरण हमें एक ऊर्जा प्रदान करता है समय और समस्याओं से संघर्ष करने के लिए। प्रस्तुत है संस्मरण - तुम्हें याद हो कि न...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ मेरी स्मृति के कगार पर घुमक्कड़ ☆ डॉ प्रतिभा मुदलियार

डॉ प्रतिभा मुदलियार (डॉ प्रतिभा मुदलियार जी का अध्यापन के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव है । वर्तमान में प्रो एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मैसूर विश्वविद्यालय। पूर्व में  हांकुक युनिर्वसिटी ऑफ फोरन स्टडिज, साउथ कोरिया में वर्ष 2005 से 2008 तक अतिथि हिंदी प्रोफेसर के रूप में कार्यरत। कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत।  इसके पूर्व कि मुझसे कुछ छूट जाए आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया डॉ प्रतिभा मुदलियार जी की साहित्यिक यात्रा की जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें – जीवन परिचय – डॉ प्रतिभा मुदलियार ☆ मेरी स्मृति के कगार पर घुमक्कड़ ☆ आज फिर तुमसे रुबरु हो रही हूँ। कोविड के भय से जन जीवन धीरे धीरे मुक्त हो रहा है। लोग बाग अपने अपने जीवन का रुख अपना कर आगे बढ़ रहे हैं। आखिर जीवन एक ही पटरी पर कितनी देर रुका रह सकता है ? चलना ही तो जीवन है ना। जीवन चलने का नाम!! कल मेरी एक छात्रा की पुस्तक का लोकार्पण समारोह था। मैं उस समारोह में वक्ता के...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ स्मृति शेष डॉ गायत्री तिवारी – मेरी ममतामयी माँ ☆ डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं आपकी माताश्री डॉ गायत्री तिवारी जी के लिए साहित्यिक पत्रिका 'प्राची'  के नवम्बर 2015 अंक में प्रकाशित आपकी शब्दांजलि । )  💐 ई- अभिव्यक्ति परिवार की और से गुरुमाता डॉ गायत्री तिवारी जी को सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि 💐 ☆ स्मृति शेष डॉ गायत्री तिवारी - मेरी ममतामयी माँ - डॉ भावना शुक्ल ☆ (साहित्यिक पत्रिका ' प्राची' नवम्बर 2015 अंक से साभार)    मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर नगरी की प्रतिदिन प्रसिद्ध शिक्षा सेवी, कथा लेखिका, कवयित्री तथा संगठन कर्मी स्व. डॉ. गायत्री तिवारी मेरी पूज्या माता थीं. वे मेरी मां थीं, मुझे प्रिय थीं, यह सहज स्वाभाविक है. विशेष यह कि वे सर्वप्रिय थीं, अजातशत्रु थीं. जो भी उनसे एक...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ प्याला बदल यार….. ☆ श्री अजीत सिंह, पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन

श्री अजीत सिंह   (हमारे आग्रह पर श्री अजीत सिंह जी (पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन) हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए विचारणीय आलेख, वार्ताएं, संस्मरण साझा करते हैं।  इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं। आज प्रस्तुत है 90 के दशक में श्रीनगर आल इण्डिया रेडिओ / दूरदर्शन केंद्र में आपके द्वारा दी गई सेवाओं के दौरान एक अविस्मरणीय संस्मरण  'प्याला बदल यार.....'। हम आपसे उनकी अनुभवी कलम से ऐसे ही आलेख समय समय पर साझा करते रहेंगे।) ☆ संस्मरण  ☆ प्याला बदल यार..... ☆  वे बड़े सीनियर अफसर रहे आकाशवाणी में 90 के दशक में और बिगड़ते हालात को संभालने के लिए अक्सर श्रीनगर आते थे जहां दशक के शुरू में ही आतंकवादी घटनाएं शुरू हो गईं थीं। आकाशवाणी व दूरदर्शन भी इनसे बच न सके। दूरदर्शन के डायरेक्टर स्व लासा कौल जी की आतंकवादियों द्वारा हत्या के बाद श्रीनगर से रेडियो के बुलेटिन दिल्ली शिफ्ट कर दिए गए और दूरदर्शन के बुलेटिन जम्मू से चालू किए गए। श्री बी जी वर्गीज की अध्यक्षता में मीडिया...
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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ गांधी चर्चा # 44 – बापू के संस्मरण-24 – गांधीजी की  राय ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है.  लेख में वर्णित विचार  श्री अरुण जी के  व्यक्तिगत विचार हैं।  ई-अभिव्यक्ति  के प्रबुद्ध पाठकों से आग्रह है कि पूज्य बापू के इस गांधी-चर्चा आलेख शृंखला को सकारात्मक  दृष्टिकोण से लें.  हमारा पूर्ण प्रयास है कि- आप उनकी रचनाएँ  प्रत्येक बुधवार  को आत्मसात कर सकें। आज प्रस्तुत है “गांधीजी की  राय”) ☆ गांधी चर्चा...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ अमरकंटक का भिक्षुक – 6 ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है। आज से हम एक नई  संस्मरणात्मक आलेख श्रृंखला आरम्भ कर रहे हैं।  इस श्रृंखला में श्री अरुण कुमार डनायक जी ने अपनी सामाजिक सेवा यात्रा को संस्मरणात्मक आलेख के रूप में लिपिबद्ध किया है। हम  आपके इस संस्मरणात्मक आलेख श्रृंखला को अपने पाठकों से साझा करने हेतु श्री डनायक जी के ह्रदय  से...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ अमरकंटक का भिक्षुक -5 ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है। आज से हम एक नई  संस्मरणात्मक आलेख श्रृंखला आरम्भ कर रहे हैं।  इस श्रृंखला में श्री अरुण कुमार डनायक जी ने अपनी सामाजिक सेवा यात्रा को संस्मरणात्मक आलेख के रूप में लिपिबद्ध किया है। हम  आपके इस संस्मरणात्मक आलेख श्रृंखला को अपने पाठकों से साझा करने हेतु श्री डनायक जी के ह्रदय  से...
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