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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संस्मरण # 137 ☆ ओशो से एक मुलाकात ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆

श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी  की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा है।आज प्रस्तुत है आपका एक अविस्मरणीय संस्मरण  “ओशो से एक मुलाकात”।)   ☆ संस्मरण # 137 ☆ ओशो से एक मुलाकात ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆ इन दिनों झूठ, डर और अविश्वास ने हम सब की जिंदगी में ऐसा कब्जा जमा लिया है कि कुछ भी सच नहीं लगता, किसी पर भी विश्वास नहीं होता। कोई अपने पुराने यादों के पन्ने खोल कर किसी को बताना चाहता है तो सुनने वाला डर और अविश्वास की चपेट में लगता है।  जिस दोस्त को हम ये कहानी बता रहे हैं,वह इस कहानी के सच के लिए तस्वीर...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संस्मरण # 108 ☆ अमरकंटक का भिक्षुक – 1 ☆ श्री अरुण कुमार डनायक ☆

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. श्री अरुण कुमार डनायक जी ने अपनी सामाजिक सेवा यात्रा को संस्मरणात्मक आलेख के रूप में लिपिबद्ध किया है। आज प्रस्तुत है इस संस्मरणात्मक आलेख श्रृंखला की प्रथम कड़ी – “अमरकंटक का भिक्षुक”। ) ☆ संस्मरण # 108 – अमरकंटक का भिक्षुक – 1  ☆ श्री अरुण कुमार डनायक ☆ साँवला रंग, पांच फीट के...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संस्मरण # 135 ☆ अंखियों के झरोखे से – कथाकार ज्ञानरंजन जी ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆

श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी  की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा है।आज प्रस्तुत है आपका एक संस्मरण “अंखियों के झरोखे से - कथाकार ज्ञानरंजन जी”।)   ☆ संस्मरण # 135 ☆ "अंखियों के झरोखे से - कथाकार ज्ञानरंजन जी" ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆ उन दिनों पहल पत्रिका के संपादक एवं कहानी जगत के जबरदस्त हस्ताक्षर ज्ञान रंजन जी हमारे पड़ोसी थे। कलाई में आज तक घड़ी न पहनने वाले ज्ञान जी समय के बड़े पाबंद, घड़ी भले फेल हो जाए पर वे समय को पकड़ कर चलते हैं।अतिथि सत्कार और अपनेपन का भाव तो कोई उनसे सीखे। बीच बीच में टाइपराइटर में खटर पटर...
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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ दीवार ☆ श्री राकेश कुमार ☆

श्री राकेश कुमार (श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है संस्मरणात्मक आलेख – “दीवार” की अंतिम कड़ी।) ☆ आलेख ☆ दीवार ☆ श्री राकेश कुमार ☆ दीवार शब्द सुन कर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की पुरानी फिल्म में उनके द्वारा किया गया उत्कृष्ट अभिनय की स्मृति मानस पटल पर आ जाती है। हमारे जैसे यात्राओं के शौकीनों को चीन स्थित विश्व की सबसे बड़ी दीवार देखने की इच्छा प्रबल हो जाती हैं। देश भक्ति का सम्मान करते हुए, मन में विचार आया कि हमारे देश की  सबसे बड़ी दीवार खोजी जाए। भला हो गूगल महराज का उन्होंने ज्ञान दिया की विश्व की दूसरी बड़ी दीवार हमारे राजस्थान में कुंभलगढ़ किले की है।...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ पुस्तक दिवस पर एक पुस्तक प्रेमी की याद… ☆ श्री अजीत सिंह, पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन

श्री अजीत सिंह (हमारे आग्रह पर श्री अजीत सिंह जी (पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन) हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए विचारणीय आलेख, वार्ताएं, संस्मरण साझा करते रहते हैं।  इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं। आज प्रस्तुत है अविस्मरणीय संस्मरण  ‘पुस्तक दिवस  पर एक पुस्तक प्रेमी की याद…’। हम आपसे आपके अनुभवी कलम से ऐसे ही आलेख समय समय पर साझा करते रहेंगे।) ☆ संस्मरण ☆ पुस्तक दिवस पर एक पुस्तक प्रेमी की याद… ☆  श्री अजीत सिंह ☆ परिजनों, मित्रों आदि से बातचीत के लिए तो अनेकों संपर्क साधन आ गए हैं, पर अपने शहर  की जीवनधारा का पूर्ण परिचय, खास तौर पर अनजान व्यक्तियों की दिल छूने वाली कहानियां, तो अखबार से ही मिल पाती है। कुछ ऐसी ही कहानी हिसार की प्रसिद्ध वर्मा न्यूज एजेंसी के मालिक प्रभुदयाल वधवा की है, जो यूं तो इन दिनों कनाडा के शहर टोरंटो में  परिवार से अलग वैरागी जीवन बिता रहे हैं, पर हिसार  को वे भूल ही नहीं पाते। बाहर जाने पर घर की याद कुछ...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संस्मरण # 133 ☆ अच्छा ही हुआ…! ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆

श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी  की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा है।आज प्रस्तुत है एक विचारणीय संस्मरण “अच्छा ही हुआ…! ”।)   ☆ संस्मरण  # 133 ☆ अच्छा ही हुआ…! ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆ मेरे व्यंग्य के पहले गुरु आदरणीय हरिशंकर परसाई रहे हैं, बात उन दिनों की है जब आदरणीय श्री प्रताप सोमवंशी (संप्रति -संपादक, हिन्दुस्तान, दिल्ली) के निर्देश पर मैंने स्व हरिशंकर परसाई जी से लम्बा इंटरव्यू लिया था जो इलाहाबाद की पत्रिका 'कथ्य रूप' में सोमवंशी जी के संपादन में छपा था। इलाहाबाद की उस पत्रिका में छपने के कुछ साल बाद परसाई जी का निधन हो गया था। इस प्रकार...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ राजी सेठ : बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ है बाकी ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

श्री कमलेश भारतीय  (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी, बी एड, प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । ‘यादों की धरोहर’ हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह – ‘एक संवाददाता की डायरी’ को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह- महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता) ☆ संस्मरण ☆ राजी सेठ : बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ है बाकी ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆ राजी सेठ जिनसे बहुत कुछ सीखा और जाना व समझा। सन् 1975 फरवरी माह की बात है। मेरा चयन केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा अहिंदी भाषी लेखकों के लिए लगाये जाने वाले लेखन शिविर में हुआ था और यह शिविर अहमदाबाद में गुजरात विश्विद्यालय में होने जा रहा था। मैं उस समय मात्र तेईस वर्ष का था...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संस्मरण # 132 ☆ चिंता और चिंतन… ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆

श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी  की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा है।आज प्रस्तुत है एक विचारणीय संस्मरण “चिंता और चिंतन... ”।)   ☆ संस्मरण  # 132 ☆ चिंता और चिंतन... ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆ गांव का खपरैल स्कूल है, सभी बच्चे टाटपट्टी बिछा कर पढ़ने बैठते हैं। फर्श गोबर से बच्चे लीप लेते हैं, फिर सूख जाने पर टाट पट्टी बिछा के पढ़ने बैठ जाते हैं। मास्टर जी छड़ी रखते हैं और टूटी कुर्सी में बैठ कर खैनी से तम्बाकू में चूना रगड़ रगड़ के नाक मे ऊंगली डालके छींक मारते हैं फिर फटे झोले से सलेट निकाल लेते हैं। बड़े पंडित जी...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ मोबाइल है, या मुसीबत – भाग – 3 ☆ श्री राकेश कुमार ☆

श्री राकेश कुमार (श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है संस्मरणात्मक आलेख – “मोबाइल है, या मुसीबत” की अगली कड़ी। ) ☆ आलेख ☆ मोबाइल है, या मुसीबत  – भाग – 3 ☆ श्री राकेश कुमार ☆ दिल्ली से वापसी के लिए हम स्टेशन पर स्थित आरक्षण काउंटर पर पहुंचे वहां एक दम pin drop silent जैसा माहौल था। जब फार्म मांगा तो उसने ऐसे देखा जैसे बैंक में आज कोई ड्राफ्ट बनवाने का फार्म मांगता है। काउंटर वाले बाबूजी भी कान से डोरी निकालते हुए बोले, क्यों मोबाइल नहीं है क्या ? जब पूरी दुनिया नेट से टिकट निकाल रही है, आप तो बाबा आदम के जमाने के लगते हो।...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संस्मरण # 131 ☆ जलेबी वाले जीजा ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆

श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी  की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा है।आज प्रस्तुत है एक अविस्मरणीय संस्मरण “जलेबी वाले जीजा”।)   ☆ संस्मरण  # 131 ☆ जलेबी वाले जीजा ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆ हम पदोन्नति पाकर जब बिलासपुर आए तो हमारे बचपन के खास मित्र मदन मोहन अग्रवाल  ने बताया कि जीजा बिलासपुर में रहते हैं, गोलबाजार की दुकान में बैठते हैं और लिंक रोड की एक कालोनी में रहते हैं, बिलासपुर नये नये गए थे तो बैंक की नौकरी के बाद कोई बहाना ढूंढकर गोलबाजार की दुकान जीजा से मिलने पहुंच जाते, जीजा शुरु शुरु में डरे कि कहीं ये आदमी उधार -...
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