श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “जिधर भी जाती है …“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६३ ☆
जिधर भी जाती है… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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जिधर भी जाती है फ़्ह्मो-नज़र तबाही है
ये कैसी आग की बरसात या इलाही है
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सभी के सामने करते हो तुम ज़लील मुझे
ज़फ़ा की बात नहीं ये तो कम- निगाही है
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वतन के वास्ते सरहद पै जो खड़ा मुस्तैद
वो देशभक्त है इस देश का सिपाही है
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यहाँ पै शाहो-गदा में नहीं है कोई फ़र्क़
ये मयकदा यहाँ इक जाम इक सुराही है
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करूँ मैं जुर्म से कैसे बरी भला तुझको
फ़्ररेबकारों की इस जा भी बादशाही है
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हक़ीक़तों पै अ‘मल कर रहा है कौन यहाँ
फ़ुज़ूल होठों पै लोगों के वाह- वाही है
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न बात दीन-धरम की “अरुण” अभी कर तू
ख़िलाफ़ तेरे बज़िद दिह्र की गवाही है
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈













