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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक साहित्य # 113 ☆ रंगमंच – नर्मदा परिक्रमा की कथा ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ”  में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल  (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) से सेवानिवृत्त हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। आपको वैचारिक व सामाजिक लेखन हेतु अनेक पुरस्कारो से सम्मानित किया जा चुका है। आज प्रस्तुत है श्री विवेक जी  द्वारा रचित नाटक नर्मदा परिक्रमा की कथा। इस विचारणीय विमर्श के लिए श्री विवेक रंजन जी की लेखनी को नमन।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # 113 ☆ नाटक - नर्मदा परिक्रमा की कथा (समाहित संदेश...  नदियो का सामाजिक महत्व) नांदी पाठ...   पुरुष स्वर... हिन्दू संस्कृति में धार्मिक पर्यटन का बड़ा महत्व है, नदियो, पर्वतो, वनस्पतियों तक को देवता स्वरूप में कल्पना कर उनकी परिक्रमा का विधान हमारी संस्कृति की विशेषता है.नदियो का धार्मिक महत्व प्रतिपादित किया गया है, जिससे जन मन में जल...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -9 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 9 ☆  संजय भारद्वाज *प्रवेश तीन* (अनुराधा चुपचाप बैठी है। विचारमग्न है। रमेश का प्रवेश।) रमेश- क्या हुआ अनुराधा? अनुराधा- कुछ नहीं।  यों...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -8 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 8 ☆  संजय भारद्वाज *प्रवेश दो* (रमणिकलाल नामक छुटभैया नेता का कमरा। पीछे किसी राष्ट्रीय नेता की तस्वीर लगी हुई है।...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -7 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 7 ☆  संजय भारद्वाज द्वितीय अंक - प्रवेश एक (विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पंत लेक्चर ले रहे हैं। केवल एक ब्लैकबोर्ड, मेज...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच/सिनेमा ☆ मुंबई में “का बा” के गीतकार – डॉ. सागर ☆ सुश्री मनिषा खटाटे

सुश्री मनिषा खटाटे  ☆ रंगमंच/सिनेमा ☆ मुंबई में "का बा" के गीतकार – डॉ. सागर ☆  सुश्री मनिषा खटाटे☆  पिछले वर्ष मुंबई में "का बा" यह गीत मशहूर हुआ. यह गीत प्रसिद्ध अभिनेता मनोज बाजपेयी ने गाया और उन्हीं के उपर फिल्माया गया. यह गीत भोजपुरी भाषा में हैं. परंतु यथार्थवाद और सामाजिक संघर्ष की कहानी व्यक्त करने में स्वयं ही सक्षम हैं. सिनेमा भी साहित्य की तरह एक संरचना हैं. डाँ.सागर सिनेमा, गीत और साहित्य के इंद्रधनुष  हैं. बॉलीवुड में बलिया, उत्तरप्रदेश से आकर डा. सागर अपने गीतों मे तितलियों के रंग भरते हैं और उन्हे बेचने के लिये वे जे.एन.यु. से बॉलीवुड आ जाते है. डॉ. सागर के दादी का यह सपना उनके दिल की धड़कन बन जाता है और बॉलीवुड  पर छा जाता है, यह गीतों का सपना श्रेया घौषाल से लेकर तमाम महान गायको की आवाज से गूँजता हैं. शोरगुल की इस मायानगरी मे डॉ. सागर एक अजूबा गीतकार है. डॉ सागर का यह सफर किसी फिल्मी कहानी...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -6 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 6 ☆  संजय भारद्वाज रमेश-  वाह मान गए मधु वर्मा। वेरी गुड शॉट विद क्लासिक टच ऑफ सेंटीमेंट्स एंड रियलिटी। मधु-थैंक्यू। रमेश- बाय...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -5 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टि  श्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 5 ☆  संजय भारद्वाज रमेश- भोसले संभालो खुद को, संभालो। (भोसले को लाकर उसकी कुर्सी पर बैठाता है। भोसले को यों...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ “एक भिखारिन की मौत” – एक दर्शक की दृष्टि से ☆ श्रीमती वीनु जमुआर

श्रीमती वीनु जमुआर "एक भिखारिन की मौत" निश्चित ही एक सार्थक मनोवैज्ञानिक कल्पना है जिसकी चर्चा आदरणीया श्रीमती वीनु जमुआर जी ने इस समीक्षा में किया है। इस नाटक के सन्दर्भ में  ई-अभिव्यक्ति में पूर्व प्रकाशित संस्मरण का लिंक दे रहे हैं जो श्री संजय भारद्वाज जी के रंगमंचीय अनुभव से आपको परिचित कराएगा। ☆ संजय दृष्टि  – समय कैसे पंख लगाकर उड़ जाता है! ☆ श्री संजय भारद्वाज जी की पुस्तकें "एक भिखारिन की मौत" एवं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर निम्न लिंक पर उपलब्ध हैं:  1- एक भिखारिन की मौत, गंगा स्तुति और अन्य एकांकियाँ, रंग बिरंगा मेरा छाता, बूँद-बूँद मोती  2- एक  भिखारिन  की  मौत, योंही, चहरे, मैं नहीं लिखता कविता   - संपादक ई अभिव्यक्ति  रंगमंच ☆ "एक भिखारिन की मौत" - एक दर्शक की दृष्टि से ☆ श्रीमती वीनु जमुआर विश्व रंगमंच दिवस की संध्या! आयोजन - बहुचर्चित नाटक  'एक भिखारिन की मौत ' के अंग्रेज़ी संस्करण का विमोचन ! जिसकी यादें मन के किसी कोने में अभी भी ठक-ठक करती हुई जीवित हैं।...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -4 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टि  श्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 4 ☆  संजय भारद्वाज नज़रसाहब- अच्छा, बहुत अच्छा। बहुत खूबसूरत थी वह। ग़ज़ब की ख़ूबसूरत। तीन दिन लगातार उसका एक-एक...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -3 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टि  श्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 3 ☆  संजय भारद्वाज नज़रसाहब- एक मिनट मियाँ। इस पेंटिंग के बारे में एक आइडिया आया है, ज़रा उसको पूरा कर...
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