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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
न्यूयार्क से ~ विश्व हिंदी दिवस और हिंदी दिवस: भाषा के दो उत्सव ~
श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
भारत की आत्मा उसकी भाषाओं में बसती है, और उन सबमें हिंदी का स्थान केन्द्रीय है। हिंदी केवल राष्ट्रभाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान, संवेदना और अभिव्यक्ति का माध्यम है। इसी गौरव को मनाने के लिए हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस और 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। दोनों का उद्देश्य एक ही है ,भाषा के प्रति सम्मान और उसके विस्तार के संकल्प को जन जन में जगाना, फिर भी इनके परिप्रेक्ष्य अलग हैं।
हिंदी दिवस का राष्ट्रीय संदर्भ
14 सितंबर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी थी। तभी से हिंदी दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। यह दिन हिंदी को प्रशासन और शासन की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रतीक है। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में आयोजित कार्यक्रम हिंदी के औपचारिक संवर्धन के प्रयासों को प्रेरणा देते हैं। 14सितंबर का दिन इंगित करता है कि हिंदी केवल बोलचाल की नहीं, बल्कि शासन और संवाद की प्रमुख धारा है।
विश्व हिंदी दिवस का अंतरराष्ट्रीय अर्थ
विश्व मंच पर हिंदी की पहचान को प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। उसी घटना की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विदेशों में बसे भारतीय, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के हिंदी प्रेमी सभी मिलकर हिंदी के वैश्विक विस्तार का उत्सव मनाते हैं। यह केवल भाषा का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को साझा करने का अवसर है।
न्यूयॉर्क काउंसलेट में विश्व हिंदी दिवस का रंगारंग आयोजन
विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय वाणिज्य दूतावास, न्यूयॉर्क में एक भव्य और रंगारंग आयोजन हुआ। विदेश की धरती पर हिंदी की गूंज सुनना अपने आप में एक अनमोल अनुभव रहा। इस अवसर पर मैंने स्वयं अपनी हिंदी रचना प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित जनों ने बड़े मनोयोग से सुना।
कविता यह रही…
☆ विदेश की धरती पर हिंदी ☆
हिंदी है अस्मिता ,पहचान भारतीय
परदेश में, जन गण की शान भारतीय
भारत की राष्ट्र भाषा है, अभिमान है
विदेश की धरती पर हिंदी,पूरा हिन्दुस्तान है
प्राची की वाणी, शब्दों की गंगा है
एकता का सूत्र, संस्कृति का डंका है
विदेश में शाश्वत भावों की धारा है
विदेश की धरती पर हिंदी व्यवहार हमारा है
गिरमिटिया संग, रामचरित मानस
दुनियां भर में, बहती पुरवाई है
दूर देश में नई पीढ़ी की उड़ती पतंग है
विदेश की धरती पर हिंदी, मन की उमंग है
फिल्मी गीतों में, रुनझुन संगीत है
विदेशी धरती पर मनचाहा मीत है
प्रवासी मन का, देशी परिधान है
विदेश की धरती पर हिंदी देशज सम्मान है
यूनीकोड में हिंदी, स्क्रीन आसमान है
डिजिटल दुनियां में, हिंदी का वितान है
इंस्टा की रील डायस्पोरा की मुस्कान है,
विदेश की धरती पर हिंदी नेह प्रावधान है
एकता का सूत्र, शाश्वत संचार है
“वसुधैव कुटुंबकम्” का प्रसार है
भारत के भाल की बिंदी , श्रृंगार है
विदेश की धरती पर हिंदी,नेह का संसार है
मां बाप आते हैं मौसम की तरह
परदेश में बच्चों के पास
खुशनुमा मुकाम है
विदेश की धरती पर हिंदी
प्यार का पैगाम है
आरजू है, इल्तिज़ा है ,
दुआ है सलाम है !
कार्यक्रम में झिलमिल, हिंदी यूएसए, गुलमोहर, डॉ. सोनिया शर्मा अकादमी तथा अल्फ्रेड स्कूल जैसी संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता रही, जिन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से हिंदी प्रेम को स्वर दिया। सजीव मंचन, गीत-संगीत, और वक्तव्यों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
इस अवसर पर मेरे सुपुत्र अमिताभ और श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव भी सहभागी रहीं, जिनकी उपस्थिति ने इस क्षण को और भी आत्मीय बना दिया। रात्रिभोज के उपरांत यह प्रेरणादायक आयोजन सम्पन्न हुआ।
विदेश की भूमि पर हिंदी के प्रति ऐसा उत्साह देखकर मन में गर्व और भावुकता का संगम उमड़ पड़ा… जय हिंदी, जय भारती।
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
ई-अभिव्यक्ति, सम्पादक (हिन्दी)
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈























