हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ लेखनी सुमित्र की # ३०१ – ठंडे ये ज्वालामुखी करो…१ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र” ☆

स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता –  प्रायमरी का मास्टर…५।)

✍ साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # ३०१ ☆

☆ – ठंडे ये ज्वालामुखी करो…१ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र” ✍

आज

आम आदमी

संत्रस्त है, परेशान है

और है बेहद दुखी,

धैर्य के धिक्कार से

सहिष्णु मन भी

आतुर है

बन जाने को ज्वालामुखी।

याद आ रहा है

एक पुराना गीत-

‘मन के हारे हार है

मन के जीते जीत! ‘

गीत, आखिर गीत होता है

खण्डहर में गूँजते गीत से

आदमी भयभीत होता है।

हम,

खण्डहर में खड़े खड़े

भयभीत होते जा रहे हैं-

हमारी नियति-

होठों से गिरकर

पत्थर पर लिखे गीत होते जा रहे हैं।

हमारे नाकनक्श भूख

तराशे हैं,

हकीकत ये है –

हम कई दिनों से उपासे हैं, प्यासे हैं,

और

क्रमशः…

स्व डॉ. राजकुमार “सुमित्र” 

साभार : डॉ भावना शुक्ल 

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ अभिनव गीत # २९८ – “प्राण पखेरू उड़े अचानक…” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी ☆

श्री राघवेंद्र तिवारी

(प्रतिष्ठित कवि, रेखाचित्रकार, लेखक, सम्पादक श्रद्धेय श्री राघवेंद्र तिवारी जी  हिन्दी, दूर शिक्षा, पत्रकारिता व जनसंचार,  मानवाधिकार तथा बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं शोध जैसे विषयों में शिक्षित एवं दीक्षित। 1970 से सतत लेखन। आपके द्वारा सृजित ‘शिक्षा का नया विकल्प : दूर शिक्षा’ (1997), ‘भारत में जनसंचार और सम्प्रेषण के मूल सिद्धांत’ (2009), ‘स्थापित होता है शब्द हर बार’ (कविता संग्रह, 2011), ‘​जहाँ दरक कर गिरा समय भी​’​ ( 2014​)​ कृतियाँ प्रकाशित एवं चर्चित हो चुकी हैं। ​आपके द्वारा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए ‘कविता की अनुभूतिपरक जटिलता’ शीर्षक से एक श्रव्य कैसेट भी तैयार कराया जा चुका है। आज प्रस्तुत है आपका एक अभिनव गीत “प्राण पखेरू उड़े अचानक...”।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ # २९८ ☆।। अभिनव गीत ।। ☆

☆ “प्राण पखेरू उड़े अचानक...” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी ☆

☆

सारे बेटे रहे पालते

” पापा ” को स्नेह से

मरे एक दिन किन्तु पिताजी

हत्यारी मधुमेह से

 

कोई दवा काम ना

आयी तरह तरह बदली

जब भी जिस ने जो

बतलायी वह गोली निगली

 

सोया करते पूज्य पिता

तब बाहर की दालान में

जिस में भीग भीग जाते

थे चौमासे के मेह से

 

जब भी कोई व्यक्ति

माँगने दरवाजे आता

उसे मना की नहीं कभी

वह खुश होकर जाता

 

कीर्तिमान यह रहा पिता

का कुछ न कुछ देते

कहा किये थे याचक ना

खाली जाये इस गेह से

 

बहुत तसल्ली थी उनको

जायेंगे माघ मेला

तभी राम ने उन से था

खेला ऐसा खेला

 

प्राण पखेरू उड़े अचानक

रोक नहीं पाये

लगा कि सारा नेह चुक गया

उनका था इस देह से

 

☆

©  श्री राघवेन्द्र तिवारी

08-092024

संपर्क​ ​: ई.एम. – 33, इंडस टाउन, राष्ट्रीय राजमार्ग-12, भोपाल- 462047​, ​मोब : 09424482812​

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य ☆ चुभते तीर # १३९ – वरिष्ठ नागरिक – ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ☆

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

(‘उरतृप्त’ उपनाम से व्यंग्य जगत में प्रसिद्ध डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण उनके लेखन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से मिलता है। वे न केवल एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं, बल्कि एक कवि और बाल साहित्य लेखक भी हैं। उनके व्यंग्य लेखन ने उन्हें एक विशेष पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य ‘शिक्षक की मौत’ साहित्य आजतक चैनल पर अत्यधिक वायरल हुआ, जिसे लगभग दस लाख से अधिक बार पढ़ा और देखा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। उनका व्यंग्य-संग्रह ‘एक तिनका इक्यावन आँखें’ भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें उनकी कालजयी रचना ‘किताबों की अंतिम यात्रा’ शामिल है। इसके अतिरिक्त ‘म्यान एक, तलवार अनेक’, ‘गपोड़ी अड्डा’, ‘सब रंग में मेरे रंग’ भी उनके प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह हैं। ‘इधर-उधर के बीच में’ तीसरी दुनिया को लेकर लिखा गया अपनी तरह का पहला और अनोखा व्यंग्य उपन्यास है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान, 2021 (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के हाथों) से सम्मानित किया गया है। राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के द्वारा उनकी बाल साहित्य पुस्तक ‘नन्हों का सृजन आसमान’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इनके अलावा, उन्हें व्यंग्य यात्रा रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों साहित्य सृजन सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। डॉ. उरतृप्त ने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 पुस्तकों को लिखने, संपादन करने और समन्वय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना की विश्वविद्यालयी पाठ्य पुस्तकों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है। कई पाठ्यक्रमों में उनकी व्यंग्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। उनका यह सम्मान दर्शाता है कि युवा पाठक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लेखन की पहचान कर सकते हैं।)

जीवन के कुछ अनमोल क्षण 

  1. तेलंगाना सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री के. चंद्रशेखर राव के करकमलों से  ‘श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान’ से सम्मानित। 
  2. मुंबई में संपन्न साहित्य सुमन सम्मान के दौरान ऑस्कर, ग्रैमी, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, दादा साहब फाल्के, पद्म भूषण जैसे अनेकों सम्मानों से विभूषित, साहित्य और सिनेमा की दुनिया के प्रकाशस्तंभ, परम पूज्यनीय गुलज़ार साहब (संपूरण सिंह कालरा) के करकमलों से सम्मानित।
  3. ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल जी  से भेंट करते हुए। 
  4. बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट, अभिनेता आमिर खान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
  5. विश्व कथा रंगमंच द्वारा सम्मानित होने के अवसर पर दमदार अभिनेता विक्की कौशल से भेंट करते हुए। 

आप  डॉ सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ जी के स्तम्भ – चुभते तीर में उनकी अप्रतिम व्यंग्य रचनाओं को आत्मसात कर सकेंगे। इस कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका विचारणीय व्यंग्य – वरिष्ठ नागरिक।)  

☆  चुभते तीर # १३९ – व्यंग्य – वरिष्ठ नागरिक ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ☆

(तेलंगाना साहित्य अकादमी से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार

सभागार के वातानुकूलित कमरे के मुख्य द्वार पर अठहत्तर साल के विश्वंभर दयाल अपनी लाठी टेकते हुए सुबह ठीक दस बजे आकर बैठ जाते थे। उनके कांपते हाथों में जरी के गोटे वाला एक पुराना पीला शॉल और मखमली डिब्बे में रखा एक सूखा हुआ मुरझाया गुलाब का फूल रहता था जिसे वे अपनी हथेली पर रखकर लगातार सहलाते रहते थे। सभागार का नया सुरक्षाकर्मी जब भी उन्हें गेट के पास बैठा देखता तो चाय का कुल्हड़ मेज़ पर पटकते हुए ठहाका लगाकर कहता कि “बाबा जब आज इक्कीस अगस्त को वरिष्ठ नागरिक दिवस के मौके पर बड़े साहब खुद नए शॉल और सम्मान बांटने आ रहे हैं तो इस फटे पुराने शॉल को रोज़ अपनी छाती से लगाकर यहाँ अधिकारियों के आगे नुमाइश क्यों लगाते हो।” विश्वंभर दयाल अपनी पुरानी ऐनक के धुंधले शीशे को धोती से पोंछते और बहुत धीमी आवाज़ में मुस्कुराकर कहते कि “बेटा यह जरीदार कपड़ा केवल रेशम का टुकड़ा नहीं है बल्कि इस पूरे समाज की उस अंधी संवेदनहीनता का वो ढोंग है जिस पर साल में सिर्फ एक दिन भाषणों की माला पहनाई जाती है।” सभागार में आने वाले तमाम मुंशी और युवा कार्यकर्ता उनका उपहास उड़ाते हुए कहते कि “लगता है इस बुढ़ापे में बाबा की मति मारी गई है जो सम्मान के इस पावन उत्सव को अपनी हठ की भेंट चढ़ाने चले हैं।” विश्वंभर दयाल किसी की कड़वी बात का तनिक भी बुरा माने बिना उस सूखे गुलाब की पंखुड़ियों को अपनी कांपती उंगलियों से संभालते और चुपचाप गाड़ियों के काफिले का इंतज़ार करते रहते थे।

सभागार के तमाम कर्मचारी विश्वंभर दयाल की इस मूक उपस्थिति से पूरी तरह परिचित हो चुके थे और उन्हें एक सनकी बुजुर्ग मानकर पूरी तरह अनदेखा कर देते थे। आयोजन समिति का बड़ा सचिव जब भी गुलदस्तों और मोमेंटो का ढेर लेकर मुख्य मंच की तरफ बढ़ता तो विश्वंभर दयाल बहुत उम्मीद से अपनी लाठी के सहारे खड़े हो जाते और हाथ जोड़कर कहते कि “बाबू जी क्या आज उस बुजुर्ग पेंशन और भरण-पोषण वाले कागज़ पर साहब की मुहर लग गई।” सचिव गुस्से में अपने चश्मे को ठीक करते हुए डांटकर कहता कि “अरे बाबा जब तक डिजिटल पोर्टल पर सत्यापन पूरा नहीं होगा और तहसील से नई रिपोर्ट नहीं आएगी तब तक कागज़ आगे नहीं बढ़ेगा और तुम इस पुराने शॉल को लेकर ताउम्र यहाँ चक्कर काटते रहोगे।” विश्वंभर दयाल बिना किसी प्रतिवाद के वापस अपनी जगह पर जाकर बैठ जाते और उस मखमली डिब्बे के ढक्कन को बार-बार खोलने और बंद करने का निरर्थक प्रयास करने लगते थे। शहर के लोग आपस में खुसर-पुसर करते कि शायद बाबा अपने बेटे से संपत्ति का कोई पुराना विवाद सुलझाने के लिए यह स्वांग रच रहे हैं लेकिन किसी को भी उस सूखे गुलाब और वरिष्ठ नागरिक दिवस के इस भव्य तमाशे के बीच छुपे भयानक रहस्य की ज़रा सी भी थाह नहीं लग पा रही थी।

दोपहर में अचानक जिले के नए जिलाधिकारी महोदय और समाज कल्याण अधिकारी वरिष्ठ नागरिक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य समारोह का उद्घाटन करने सभागार पहुँच गए। साहब की गाड़ी का सायरन बजते ही पूरे परिसर में खलबली मच गई और आनन-फानन में स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाया जाने लगा ताकि कोई कमी न दिखाई दे। मंच पर दीप प्रज्वलन और बुजुर्गों के सम्मान में कसीदे पढ़ने के बाद जब जिलाधिकारी महोदय पत्रकारों की भीड़ के साथ बाहर निकले तो उनकी नज़र मुख्य द्वार के कोने में शांत बैठे विश्वंभर दयाल पर पड़ी जिनकी गोद में वही पीला शॉल और सूखा गुलाब रखा था। अपनी जनप्रिय और संवेदनशील छवि का प्रदर्शन करने के लिए साहब तुरंत मीडिया कर्मियों को साथ लेकर विश्वंभर दयाल के पास पहुँचे और बड़े आदर से बोले कि “बाबा आज वरिष्ठ नागरिक दिवस पर हम आप जैसे पूज्य बुजुर्गों को नमन करते हैं बताइए आपकी क्या पीड़ा है जिसे मैं तुरंत हल करवाऊँ क्या आपको वृद्धावस्था सम्मान का लाभ नहीं मिल रहा है।” विश्वंभर दयाल ने अपनी सूजी हुई आँखों से साहब को देखा और अपने कांपते हाथों से वह पीला शॉल और सूखा गुलाब साहब की हथेली पर रखते हुए बोले कि “साहब जी अगर वाकई न्याय करना चाहते हैं तो ज़रा इस शॉल के कोने पर छपा हुआ नाम और यह सूखा हुआ फूल पहचान लीजिए।”

साहब ने जब उस शॉल के कोने पर सुनहरे धागों से लिखी इबारत को पढ़ा तो उनके चेहरे का रंग पूरी तरह उड़ गया और हाथ कांपने लगे क्योंकि उस पर पिछले साल का तारीखवार सरकारी सम्मान और खुद उनके अपने दस्तखत दर्ज थे। विश्वंभर दयाल की आँखों से आंसुओं के दो मोटे कतरे ढलककर उस सूखे गुलाब पर गिर पड़े और वे रुंधे गले से बोले कि “साहब ठीक पिछले साल इसी इक्कीस अगस्त को आपने इसी मंच पर मुझे जिले का सबसे सम्मानित वरिष्ठ नागरिक घोषित करके यह शॉल और फूल पहनाया था। लेकिन अगले ही दिन जब मेरे अफ़सर बेटे ने मुझे घर से बाहर निकाल दिया तो मैं आपके दफ्तर में भरण-पोषण कानून की अर्जी लेकर साल भर भटकता रहा और आपके बाबू मुझसे फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगते रहे। मैं भूखा प्यासा फुटपाथ पर सोता रहा और कोई भी अफ़सर मेरी सुध लेने नहीं आया। मैं आज यह सरकारी शॉल और सूखा फूल आपको वापस लौटाने आया हूँ ताकि आपकी इस व्यवस्था को बता सकूँ कि साल में तीन सौ चौसठ दिन लावारिस छोड़ दिए जाने वाले बूढ़े बाप को साल के सिर्फ एक दिन मंच पर शॉल ओढ़ाकर देवता बना देना ही इस सभ्य समाज का सबसे घिनौना मज़ाक है।” यह सुनते ही जिलाधिकारी का सिर शर्म से पूरी तरह झुक गया और पूरे सभागार में ऐसा सन्नाटा छा गया जिसने वहाँ खड़े हर इंसान के ज़मीर को झकझोर कर रख दिया।

(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)

© डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

संपर्क : चरवाणीः +91 73 8657 8657, ई-मेल : drskm786@gmail.com

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८० ☆ # “चिंगारी…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “चिंगारी…”।) 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८० ☆

☆ # “चिंगारी…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

☆

चेहरे को चमकाने यह खेल सारा है

ना कभी वह तेरा था

ना कभी वह मेरा है

 

माया जाल में उसके

 हर कोई फँसा है

उसने ऐसा प्रपंच रचा है

उलझ गए हैं धागों में सब

छोटा बड़ा कोई नहीं बचा है

वह बेच रहा है रंगीन सपने

सोची समझी साजिश से अपने

खाकर यह मादक अफीम

सब लगे हैं माला जपने

 

चारों तरफ फैला है अंधेरा

सूरज भी अब नहीं है तेरा

दीपों पर भी है पाबंदी

कैसे रोशन होगा घर तेरा

चल उठ अपनी  मुट्ठियाँ भींच  

पत्थर पर पत्थर को घिस

जो निकली है यह चिंगारी

इस रोशनी से आंखों को मीच

 

अब तू सपनों से जाग

मृगतृष्णा के पीछे मत भाग

तेरा मुकद्दर यही बनेगी

जब चिंगारी बनेगी आग

तू चिंगारी को बचा के रखना

रोशनी का यह शस्त्र है अपना

पराजित होगा डरपोक अंधेरा

बस चिंगारी को मशाल है बनना /

☆

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ अभिव्यक्ति # -१२४ – राम कथा है अमृत वाणी… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘राम कथा है अमृत वाणी…‘।)

☆ अभिव्यक्ति # १२४ ☆

☆ राम कथा है अमृत वाणी… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

 

राम का नाम, सुमरि ले प्राणी,

राम कथा है अमृत वाणी।

*

जन्म अयोध्या राजमहल में,

सारी विद्या, सीखी पल में,

गाथा कहता, सरयू का पानी,

राम कथा है, अमृत वाणी।

*

वन में जाकर, ताड़का मारी,

गौतम नारी, अहिल्या तारी,

ऋषि मुनियों से बात ये जानी,

राम कथा है, अमृत वाणी।

*

जनकपुरी में धनुष को तोड़ा,

जनक सुता से नाता जोड़ा,

सिया राम मय, सब जग जानी,

राम कथा है अमृत वाणी।

*

वचन पिता के, वन को धाये,

संग संग सिया, लखन भी आए,

अपनी अपनी लिए कहानी,

राम कथा है अमृत वाणी।

*

जंगल जंगल डोल रहे थे,

कई बातों को खोल रहे थे,

शूर्पणखा की जिद न मानी,

राम कथा है अमृत वाणी।

*

सीता को रावण हर लीना,

दुखद, है मानव जीवन जीना,

सिय, वियोग की, करुण कहानी,

राम कथा है अमृत वाणी।

*

शोषित वंचित सबको जोड़ा,

ऊंच नीच के भ्रम को तोड़ा,

सागर पार करेंगे ठानी,

राम कथा है अमृत वाणी। 

*

लंका जाकर युद्ध किया,

रावण को भी मार दिया,

लिख दी जीत की नई कहानी,

राम कथा है अमृत वाणी,

*

सीता को संग लेकर आए,

ऋषि मुनि सब हर्षित गाए,

हुई अवध में भोर सुहानी,

राम कथा है अमृत वाणी.

☆

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३४८ ☆ व्यंग्य – बेमिसाल यूनिवर्सिटी के छात्र-हितकारी पाठ्यक्रम ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆

डॉ कुंदन सिंह परिहार

(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम व्यंग्य – ‘बेमिसाल यूनिवर्सिटी के छात्र-हितकारी पाठ्यक्रम‘। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # ३४८ ☆

☆ व्यंग्य ☆ बेमिसाल यूनिवर्सिटी के छात्र-हितकारी पाठ्यक्रम ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆

देश के मशहूरो-मारूफ़ शिक्षा संस्थान बेमिसाल यूनिवर्सिटी ने 20 जून को एक विज्ञप्ति निकाली जिसमें घोषणा की गयी कि यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए दो नये रोज़गारोन्मुख पाठ्यक्रम आरंभ करने जा रही है जिनका उद्घाटन राज्य के माननीय राज्यपाल के कर कमलों द्वारा शीघ्र होगा।

विज्ञप्ति में कहा गया कि पिछले साल यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए पन्द्रह दिन का अति उपयोगी ‘उपला मेकिंग‘ कोर्स चला चुकी है जो बहुत लोकप्रिय हुआ और जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विशेषकर छात्राओं का मत था कि यह कोर्स साधारण पढ़ाई की तुलना में बहुत दिलचस्प और उपयोगी साबित हुआ।

यूनिवर्सिटी ने अब निम्नलिखित दो उपयोगी पाठ्यक्रमों के आरंभ होने की घोषणा की है जिनकी अवधि एक वर्ष होगी और जिनमें सफल छात्रों को डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा। विज्ञप्ति में यह विश्वास दिलाया गया कि ये पाठ्यक्रम छात्रों को नौकरी या व्यवसाय करने में बहुत सहायक सिद्ध होंगे।

  1. एडवांस्ड कोर्स इन सायकोफ़ैंसी :-

इस पाठ्यक्रम को हिन्दी में ‘चाटुकारी का उन्नत पाठ्यक्रम‘ कहा जाएगा। यूनिवर्सिटी में बहुत समय से यह शिद्दत से महसूस किया जा रहा था कि- कोरी शिक्षा और डिग्री से जीवन में सफलता और तरक्की हासिल करना मुश्किल है। पढ़-लिख कर आदमी नौकरी तो पा सकता है, लेकिन प्रोमोशन के लिए कुछ और गुण आवश्यक महसूस होते हैं, वर्ना काबिल लोग पांव पीटते रह जाते हैं और चतुर गधे बुलन्दी पर पहुंच जाते हैं। इसी तरह बिज़नेस में ऊंचाई हासिल करने के लिए सत्ता के रसूखदारों को साधना ज़रूरी होता है, जिसके लिए चाटुकारी अत्यावश्यक होती है। इसलिए शैक्षणिक योग्यता में ठकुरसुहाती या ब्याजस्तुति की गोटा-किनारी लगाना ज़रूरी है। राजाओं के ज़माने में यह काम भाटों और चारणों के द्वारा किया जाता था।

इस पाठ्यक्रम के सफल संचालन के लिए यूनिवर्सिटी देश के शीर्षास्थ चाटुकारों को ‘विज़िटिंग प्रोफेसर’ के रूप में आमंत्रित करेगी। सौभाग्य की बात है कि देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है। अनेक जन-प्रतिनिधि इस कला में सिद्ध हैं। नेता के मुख से कोई प्रस्ताव निकलते ही तुरंत समर्थन में हाथ उठाते हैं। सोचने-समझने की ज़रूरत नहीं।  इन्हें देखकर एक फिल्मी गीत याद आता है— ‘जो तुमको हो पसन्द वही बात कहेंगे, तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे।’ हमारे बॉलीवुड में इस कला में सिद्ध अनेक कलाकार बैठे हैं। एक बुज़ुर्ग कलाकार सार्वजनिक रूप से गर्व के साथ अपने को एक बड़े नेता का ‘चमचा’ घोषित कर चुके हैं। समझदार फिल्म निर्माता ऐसी फिल्में बना रहे हैं जिनसे सरकार खुश हो और टैक्स में छूट मिले, भले ही समाज में ज़हर फैले। इस गुण से संपन्न अनेक मीडिया चैनल भी हैं जिन्हें  ‘गोदी मीडिया’ नाम से विभूषित किया गया है।

कुछ लोगों में चाटुकारी की नैसर्गिक प्रतिभा होती है। वे हवा का रुख देखते ही अपने व्यवहार में पलटी मारते हैं। बनारस विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर साहब ने गोबर के उपले बनाने का प्रशिक्षण दिया, और  इस तरह छात्रों के दिमाग़ में भरपूर गोबर भरा। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज की प्रिंसिपल महोदया ने अंतरात्मा की पुकार पर छात्रों के क्लासरूम की दीवारों को गोबर से पुतवा दिया। परिणामत: छात्रों ने वही सलूक प्रिंसिपल महोदया के ऑफिस के साथ किया।

एक महंत जी हैं जो प्रभु के निर्देश पर एक राजनीतिक पार्टी में प्रवेश कर गये। फिर प्रभु के निर्देश पर दूसरी पार्टी में चले गये। फिलहाल वे अपनी नयी पार्टी के नेता में बुद्ध, महावीर और गांधी की छवि देख रहे हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया कि भगवान भी अपनी प्रशंसा सुनना पसंद करते हैं। अजामिल की कथा इसका प्रमाण है। इसीलिए चतुर लोग मन में भक्ति न होते हुए भी मुंह से नारायण का जाप करते रहते हैं ताकि उन्हें भी धोखे से स्वर्ग में ‘एंट्री’ मिल जाए।

‌यूनिवर्सिटी की विज्ञप्ति में निष्कर्ष स्वरूप कहा गया कि संसार की बड़ी बाधाओं को चाटुकारी के अमोघ अस्त्र से जीता जा सकता है, और अन्त में रामायण की चौपाई उद्धृत की— ‘सकल पदारथ हैं जग माहीं, करमहीन नर पावत नाहीं।’  मतलब यह कि जो जन चाटुकारी नहीं कर पाते, उन्हें संसार में कुछ नहीं मिलता। वे मुट्ठी बांधे आते हैं और हाथ पसारे संसार से विदा हो जाते हैं।

  1. एडवांस्ड कोर्स इन डिस्सिम्युलेशन :-

इस कोर्स को ‘वाक्छल का उन्नत पाठ्यक्रम‘ कहा जा सकता है। यह भी बहुत उपयोगी और ज़रूरी पाठ्यक्रम है, ख़ासकर राजनीतिज्ञों और अफसरों के लिए। राजनीति में जनता को छलने और उनका वोट लेने के लिए बड़े-बड़े वादे करने पड़ते हैं। फिर वादे पूरे न होने पर जब जनता जवाब मांगती है तो वाक्छल की कला जान छुड़ाने के लिए बहुत काम आती है। जब जनता देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल पूछने लगती है तो मंत्री जी फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था की बात करने लगते हैं। एक जन- प्रतिनिधि को देखा जो अपने चुनाव-क्षेत्र गये थे। जब जनता उनके सामने अपनी शिकायतें रखने लगी तो नेताजी मुट्ठी उठाकर ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम’ के नारे लगाने लगे। इसके बाद वे कार में बैठकर वहां से फुर्र हो गये।

जनसेवा के जज़्बे से भरे नेताओं को कई बार दुखी मन से दल बदलना पड़ता है। तब जनता का सामना होने पर वाक्छल की कला बहुत काम आती है।

वाक्छल का उत्तम नमूना महाभारत में युधिष्ठिर का वक्तव्य था जिसमें वे गुरु द्रोण को अश्वत्थामा की मृत्यु का झूठा समाचार देते समय ‘अश्वत्थामा हत:‘ के पीछे ‘नरो वा कुंजरो वा’ जोड़ देते हैं।

अफसरों को भी जनता की शिकायतों का सामना करते समय अपना और अपने आकाओं का बचाव करना पड़ता है। इसके लिए जनता को नाना प्रकार से बहलाना और बहकाना पड़ता है। जब जनता के तर्कों का जवाब नहीं सूझता तो अफसर अंग्रेजी और कथा वाचक संस्कृत बोलने लगते हैं। पंडितों के मंत्रों के बारे में एक लेख में परसाई जी लिखते हैं— ‘जिन मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, वे अगर संस्कृत से हिन्दी में कर दिये जाएं तो प्राइमरी स्कूल की किताब के लायक हैं।’

यूनिवर्सिटी की विज्ञप्ति में कहा गया है कि हमारे देश में वाक्छल में माहिर लोग बड़ी संख्या में हैं। देश में ज़्यादातर लोगों के अल्पशिक्षित होने के कारण इस कला में माहिर लोगों की जनता को बहलाने में सफलता निश्चित रहती है। यूनिवर्सिटी ने लिखा कि वह इस  कला में उच्च योग्यता प्राप्त विद्वज्जन को आमंत्रित कर छात्रों को इस कला में दीक्षित करेगी।

विज्ञप्ति के अन्त में लिखा गया कि यूनिवर्सिटी आगे भी इसी प्रकार छात्रोपयोगी पाठ्यक्रमों का अन्वेषण कर छात्रों का हित करने के उपक्रम में सन्नद्ध रहेगी।

© डॉ कुंदन सिंह परिहार

जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ११९ – बेबाकी… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– बेबाकी…” ।) 

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ११९ — बेबाकी — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

महात्मा गांधी संस्थान में साथ करने वाला हमारा एक मित्र कहता था सभी लेखक विद्वान नहीं होते। संस्थान में हम दो तीन लिखने वाले थे और वह लिखने वाला नहीं था। गजब यह कि वह यह कहते लड़ाई जैसे तेवर से हम पर हावी हो जाता था। तब मेरी पक्षधरता लेखकों के लिए ही होती थी। पर अब मुझे लगता है उतनी बेबाकी से कहने वाले उस मृत आदमी की समाधि पर श्रद्धा के दो फूल चढ़ा आऊँ।

 © श्री रामदेव धुरंधर

16 – 09 – 2026

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच # ३५३ – दरवाज़े ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।”

हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)

☆  संजय उवाच # ३५३ ☆

☆ दरवाज़े… ?☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

एक समय था जब लोगों के घरों के दरवाज़े दिन भर खुले रहते थे। समय के साथ विचार बदले, स्थितियाँ बदलीं और अब अधिकांश घरों के दरवाज़े बंद रहने लगे हैं।

सुरक्षा की दृष्टि से दरवाज़ा बंद रखना समकालीन आवश्यकता हो सकता है। तथापि स्थूल का प्रभाव, सूक्ष्म पर भी होता है।

एक प्रसंग सुनाता हूँ। एक धनी व्यक्ति एक महात्मा के पास आया। धनी का महल आलीशान था। उसके मन में इच्छा हुई कि अपना महल महात्मा को दिखाए। बहुत ना-नुकर के बाद महात्मा उसका महल देखने के लिए राजी हो गए। धनी ने जब अपना महल महात्मा को दिखाया तो वे हँस पड़े। धनी आश्चर्यचकित हुआ। फिर तनिक नाराज़गी के साथ बोला, ” महात्मन! यह दुनिया का सबसे सुरक्षित महल है।” महात्मा ने पूछा, “कैसे?” धनी बोला,” मैंने इसके सारे दरवाज़े चुनवा दिये हैं। इसमें केवल एक ही दरवाज़ा रखा है जिसके चलते शत्रु का भीतर प्रवेश करना असंभव-सा हो चला है।” इस बार महात्मा ठहाका लगाकर हँसे। फिर बोले, ” यह एक दरवाज़ा भी क्यों छोड़ दिया? यदि इसे भी बंद कर दो तो शत्रु का तुम तक पहुँचना असंभव-सा नहीं अपितु असंभव ही होगा।”  धनी ने महात्मा के ज्ञान के कई प्रसंग लोगों से सुने थे। उसे लगा, सारे प्रसंग झूठे हैं। महात्मा तो सामान्य बात भी समझ नहीं पाते। सो चिढ़कर बोला, “महात्मन, यदि यह एकमात्र दरवाज़ा भी बंद कर दिया तब तो मेरे प्राण जाना निश्चित है। ऐसी सूरत में यह महल, महल न रहकर कब्र में बदल जाएगा।”  इस बार  गंभीर स्वर में महात्मा बोले, ” जब तुझे बात का भान है कि एक दरवाज़ा बंद करने से तेरी मृत्यु हो जाएगी तो इतने सारे दरवाज़े बंद करके कितनी बार मर चुका है तू?”

ध्यान देनेवाली बात है कि  दरवाज़े सर्वदा बंद रखने के लिए होते तो बनाये ही क्यों जाते? उनके स्थान पर भी दीवारें ही खड़ी की जातीं।

दरवाज़े बार-बार खुलते रहने चाहिएँ, ताज़ा हवा का झोंका भीतर आते रहना चाहिए। खुले दरवाज़ों से नयापन और ताज़गी भीतर आते रहते हैं, प्रफुल्लता बनी रहती है।

…अंतिम बात,  घर के हों या मन के, यह सूत्र दोनों प्रकार के दरवाज़ों पर लागू होता है।

© संजय भारद्वाज 

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️ श्रीगणेश साधना, गणेश चतुर्थी तदनुसार सोमवार 14 सितंबर को आरम्भ होकर अनंत चतुर्दशी तदनुसार शुक्रवार 25 सितम्बर तक चलेगी। 🕉️

💥 इस साधना का मंत्र होगा – ॐ गं गणपतये नमः।💥

💥 साधक को इस मंत्र की कम से कम एक माला (108 जप) का संकल्प लेना होगा। इस मंत्र के मालाजप के साथ ही कम से कम एक पाठ अथर्वशीर्ष का भी करना है। जिन्हें अथर्वशीर्ष बहुत कठिन लगे, वे इसे सुनें अवश्य।🕉️

💥 हमारा प्रयास है कि महत्वपूर्ण स्तोत्रों का अधिकाधिक प्रसार हो।

≈≈हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सलिल प्रवाह # २९३ – दोहा सलिला ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – दोहा सलिला।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २९३ ☆

☆ दोहा सलिला ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

☆

घाट लहर से कह रहा, दो पल की मेहमान।

लहर कहे- युग युग जिए, तू होकर बेजान।।

.

दिल दिलवर के नाम कर, कहता है दिलदार।

दिल सुकून पाए बजा, जरा दिलरुबा यार।।

.

नादां कली अनार की, हो गुलाब पर मुग्ध।

सावन की बरसात मेँ, हाय हो गई दग्ध।।

.

पैंजन घुँघरू से कहे, मत कर तू झंकार।

गाँव न जागे पाँव से, पाँव मिले ले प्यार।।

.

पगडंडी पग चूमकर, करती दूर थकान।

राज मार्ग पर बढ़ थके, पैर हुए बेजान।।

.

गमले में पौधा हरा, झुलसा तरु सह घाम।

यह बारिश में गल गया, वह पनपा बेदाम।।

.

मुझसे मुझको ले दिया, मुझको मुझको मौन।

जिसने उससे बढ़ कहो, कारीगर है कौन?

.

खुदको खुद मुझको दिया, खुद होकर चुप दूर।

दूर उसे जो मान लें, आँखें रहते सूर।।

.

तूतूमैंमैं  कर थके, तू-तू मैं-मैं रोज।

तू मैं मैं तू हम हुए, है चहरे पर ओज।।

☆

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

६.९.२०२६

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (21 सितंबर से 27 सितंबर 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (21 सितंबर से 27 सितंबर 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम। मैं पंडित अनिल पांडे आपको हर सप्ताह साप्ताहिक राशिफल के साथ-साथ हनुमान चालीसा के एक चौपाई के बारे में बताता हूं। इसी तारीख में इस बार मैं आपको 21 सितंबर से 27 सितंबर 2026 तक के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताऊंगा। हनुमान चालीसा की इस सप्ताह की चौपाई है:-

जो सत बार पाठ कर कोई |

छूटहि बन्दि महा सुख होई ||

इस चौपाई के पढ़ने से ज्ञात होता है कि जो कोई श्री हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा। उसे महासुख और मोक्ष की प्राप्ति होगी। श्री हनुमान जी की कृपा से उसके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। उसे परमानन्द मिलेगा। कुछ लोग सत शब्द का अर्थ सात बार भी लगाते हैं। एक और बात में आप सभी को बताना चाहूंगा कि अगर आप इस चौपाई का संपुट पाठ करते हैं तो आपको ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होगी।

“नासे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

आईये अब मैं आपको 21 सितंबर से 27 सितंबर 2026 तक के सप्ताह के राशिफल के बारे में बताऊंगा। परंतु राशिफल के पहले मैं आपको इस सप्ताह में ग्रहों के गोचर के बारे में पूरी जानकारी दूंगा।

इस सप्ताह सूर्य कन्या राशि में मंगल और गुरु कर्क राशि में, शुक्र तुला राशि मेंवक्री शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। बुद्ध प्रारंभ में कन्या राशि में रहेंगे तथा 26 तारीख के 12:38 दिन से तुला राशि में प्रवेश करेंगे। आइए अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। आपको अपने संतान से सहयोग मिलेगा। परीक्षार्थियों के लिए भी है सप्ताह ठीक है। आपको इस सप्ताह अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को इस सप्ताह अतिरिक्त रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहकर काम करना चाहिए। परंतु उनका कोई भी नुकसान इस सप्ताह नहीं होगा। इस सप्ताह आपके लिए 21 22 और 23 तारीख सफलता दायक हैं। 26 और 27 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

वृष राशि

यह सप्ताह आपके संतान के लिए उत्तम रहेगा। उनको सफलताएं प्राप्त होगी। उनका अच्छा सहयोग आपको प्राप्त होगा। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक रहेगा। व्यापार में उन्नति होगी। धन लाभ में वृद्धि होगी। अधिकारी एवं कर्मचारियों को इस सप्ताह थोड़ा शांत रहकर कार्य करना चाहिए। फालतू की बहस बाजी में नहीं पड़ना चाहिए। भाई बहनों के साथ खट्टे मीठे संबंध रहेंगे। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख सफलता दायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपको जन समर्थन मिलेगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई में लाभ होगा। परीक्षाओं में सफलता प्राप्त हो सकती है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपको भाग्य के स्थान पर अपने कर्म पर विश्वास करना उचित रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 26 और 27 तारीख सफलता प्राप्त करने के लिए उपयोगी हैं। 21 22 और 23 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

कर्क राशि

इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों के साथ संबंध अच्छा रहेगा। आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भाग्य से भी लाभ मिल सकता है। यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए उत्तम है। उनको सफलताएं प्राप्त होगी। आपको दुर्घटनाओं से इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। व्यापारियों को व्यापार में लाभ होगा। जनप्रतिनिधियों को लाभ होगा। इस सप्ताह आपके लिए 21, 22 और 23 तारीख कार्यों को करने के लिए मददगार हैं। 24 और 25 तारीख को आपको होशियारी से अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

सिंह राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने की पूरी उम्मीद है। व्यापारियों को व्यापार में बहुत सफलता प्राप्त हो सकती है। बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। भाइयों के साथ थोड़ी तकरार हो सकती है। इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। आपके थोड़े से प्रयास से ही आपके शत्रु भाग जाएंगे। इस सप्ताह आपके माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख विशेष रूप से उपयोगी है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सजग रहकर कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन चावल का दान करें और शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

कन्या राशि

यह सप्ताह आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा। व्यापार में आपको सफलता प्राप्त होगी। धन आने का सुंदर योग है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से थोड़ा सा सहयोग प्राप्त हो सकता है। अपने शत्रुओं को आप इस सप्ताह थोड़े से प्रयास से पराजित कर सकते हैं। भाग्य का आपके साथ मिलेगा। इस सप्ताह आपके लिए 26 और 27 तारीख लाभदायक है। 24 और 25 तारीख को आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवारहै।

तुला राशि

यह सप्ताह आपके लिए ठीक रह सकता है। कचहरी के कार्यों में आपको प्रयास करने पर सफलता प्राप्त होगी। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे। आपको अपने संतान से इस सप्ताह कम सहयोग प्राप्त होगा। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है। इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में थोड़ी वृद्धि हो सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 21 22 और 23 तारीख फलदायक है। 26 और 27 तारीख को आपको सतर्कता पूर्वक कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह आपके पास धन लाभ का अच्छा योग है। अगर आप प्रयास करेंगे तो आपको अधिक धन लाभ प्राप्त होगा। आपको इस सप्ताह का उपयोग करना चाहिए। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा है। उनके व्यापार की उन्नति होगी। भाग्य से भी आपको मदद मिलेगी, परंतु पिछले सप्ताह से कम। आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख परिणाम दायक हैं। अगर आप लॉटरी में अपना पैसा लगाते हैं तो 24 और 25 तारीख को आपको लाभ हो सकता है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान सूर्य को तांबे के पात्र में जल अक्षत और लाल पुष्प लेकर जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

धनु राशि

इस सप्ताह आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। व्यापार में धन लाभ होगा। अगर आप धन हानिका भी प्रयास करेंगे तो भी व्यापार में आप धन हानि नहीं कर पाएंगे। अगर धन लाभ का प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से धन लाभ में वृद्धि होगी। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए सप्ताह अच्छा है। उनको अपने कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। लंबी यात्रा का योग भी बन सकता है। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 26 और 27 तारीख विशेष रूप से उपयोगी है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

मकर राशि

अधिकारी और कर्मचारियों के लिए सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको सफलता प्राप्त होगी। भाग्य से आपको इस सप्ताह मदद मिलेगी। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक रहेगा। उनको व्यापार में लाभ होगा। इस सप्ताह आपके पास गलत रास्ते से धन आने का योग बन सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 21 22 और 23 तारीख शुभ है सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

कुंभ राशि

 इस सप्ताह भाग्य आपकी मदद करेगा। अगर आप थोड़ा भी प्रयास करेंगे तो भाग्य के कारण आप कई कार्यो में सफल हो सकते हैं। इस सप्ताह आपको डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसे खून संबंधी रोगों से सावधान रहना चाहिए। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। माता और पिताजी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। अधिकारी और कर्मचारियों के लिए सप्ताह ठीक-ठाक है। व्यापारियों को इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहकर कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख लाभदायक है। 2122 और 23 तारीख को आपको सचेत रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

मीन राशि

व्यापारियों को इस सप्ताह काफी लाभ होगा। उनके थोड़े से प्रयास से भी लाभ में वृद्धि होगी। दुर्घटनाओं से आप इस सप्ताह पूरी तरह से बचेंगे। आपके माता-पिता जी और जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपके संतान को थोड़ा कष्ट हो सकता है। उनका सहयोग आपको कम मात्रा में प्राप्त होगा। इस सप्ताह आपके लिए 26 और 27 तारीख परिणाम मूलक है। 24 और 25 तारीख को आपको सावधान रहकर के अपने कार्यों को करना चाहिए। 26 और 27 तारीख को आपके संतान को लाभ हो सकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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