प्रो. नव संगीत सिंह
☆ लघुकथा ☆ चालान ☆ प्रो. नव संगीत सिंह ☆
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जारी था। कोई भी देश पीछे हटने को तैयार नहीं था। हर तरह के शांति समझौते विफल हो रहे थे। भारत और अन्य देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की हालत बेहद गंभीर थी। सोने-चांदी की कीमतें आसमान छू रही थीं। अमेरिका जैसे देशों में भी तेल और गैस की ऊंची कीमतों को लेकर हंगामा मचा हुआ था। प्रधानमंत्री और देश की राज्य सरकारों ने इन समस्याओं से निपटने के लिए कई तरह की योजनाएं बनाईं। तेल और गैस की खपत कम करने और सोना-चांदी न खरीदने के लिए सूचना जारी की गई। आम लोग सोना-चांदी तो कम खरीद लेते, लेकिन तेल और गैस के बिना उनका गुजारा कैसे होता! सरकारों ने इसका एक समाधान यह निकाला कि सभी कार्यालय सप्ताह में दो दिन घर से ऑनलाइन काम करें, वाहनों का उपयोग कम किया जाए – यानी पेट्रोल और डीजल का कम इस्तेमाल किया जाए, साइकिल को प्राथमिकता दी जाए…। एक दिन हरिंदर ने संजीव और मनदीप से फोन पर बात की, “यार, क्यों न हम लोग अलग-अलग मोटरसाइकिल पर यूनिवर्सिटी जाने के बजाय, एक ही वाहन पर जाया करें! किसी दिन एक अपनी मोटरसाइकिल निकाल ले, तो कभी दूसरा।” “तुम सही कह रहे हो, इस तरह हम ईंधन की खपत कम करने में योगदान दे पाएंगे।” संजीव और मनदीप ने अपनी सहमति जताई। एक दिन रास्ते में यातायात पुलिस ने एक चेकपॉइंट पर रोककर एक ही मोटरसाइकिल पर बैठे तीन लोगों का चालान काट दिया, तो संजीव ने तुरंत कहा, “देखिए साहब, हमने यह कदम सिर्फ पेट्रोल बचाने के उद्देश्य से उठाया है। हमारे बाकी सभी दस्तावेज पूरे हैं, हेलमेट भी पहने हुए हैं। अगर सरकारी कर्मचारी ही पेट्रोल बचाने के काम में बाधा बनते हैं, तो हम आगे से अपनी-अपनी मोटरसाइकिलों पर आ जाया करेंगे…” यातायात पुलिस कर्मी दुविधा में था कि चालान काटें या नहीं…
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© प्रो. नव संगीत सिंह
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