श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें।)

☆ अभिव्यक्ति # ११२ ☆

☆ आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें,

हम फिर से लौट चलें, सुरमई बचपन में,

सुप्त हुई बचपन की भावना, अब तो जागें,

आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें,

*

नाव बनाकर कागज की, पानी में तैरा दें,

बच्चों के संग, बच्चे बन, फिर मुस्कान दिखा दें,

आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें,

*

छत पर जाकर, पतंग उड़ाएं, कटी पतंगें लूटें,

जल्दी से मान भी जाएं, जल्दी से फिर रूठें,

समय के पीछे न चलकर, समय के आगे भागें,

आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें,

*

निष्कलंक हो, निश्छल हो, निष्कपट हो जाएं,

बच्चों जैसे, बच्चों के संग, बच्चों के हो जाएं,

क्षणभंगुर जीवन का सपना, सपनों से अब जागें,

आओ फिर हम तितलियों के पीछे पीछे भागें.

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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