सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – चक्रव्यूह

? रचना संसार # १०७ ?

☆ गीत – चक्रव्यूह… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ?

थोथे सारे वादे निकले,

सच्चाई के लाले।

आँखों बँधी लोभ की पट्टी,

होते नित घोटाले।।

*

उबड़-खाबड़ सड़क कोसती,

व्यस्त सभी चौराहे।

डामरीकरण का नाटक बस,

होता जब जी चाहे।।

*

मन में क्षोभ हज़ारों लेकिन,

ख़ुद ही दुश्मन पाले।

**

टौल-टैक्स भारी ले-लेकर

भरते रोज़ ख़ज़ाने।

सड़क सुधरती कागज़ पर ही,

काम सभी मनमाने।।

*

सच्चाई पर मौन भीष्म बन,

काम करें सब काले।

**

दुर्घटनाएँ होतीं प्रतिदिन,

रोतीं हैं माताएँ।

थोड़े दिन आन्दोलन होते,

चक्रव्यूह रचनाएँ।।

*

अंधी नगरी चौपट राजा,

 बुनता रहता जाले।

**

औरँगज़ेबी आदेशों से,

दिल पर चले कुल्हाड़ी।

गहरी चोट कुशासन देता,

उलट-पुलट हर गाड़ी।।

*

बस नीलामी आदर्शों की

करते टोपी वाले।

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted