श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता क्या हुआ…? ।)

☆ शशि साहित्य # ३१ ☆

? कविता – क्या हुआ…? ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

क्या हुआ…?

क्यों सूख गई तेरी स्याही?

जब मेरी किस्मत में “कुछ” लिखने की बारी आई…

खुद तो ना रह सका प्रीत बिना,

फिर तेरी रचना क्यों अधूरी,

जब रच रहा था तू मुझे,

क्या तुझको मुझ पर दया ना आई…?

 

इधर समुंदर, उधर मरु-थल,

तेरी लीला समझ ना आई…

मुझको तो दिया भर भर के,

क्यों दूसरों की भावनाएं सूख गई…

खुद को गढ़ने की दी नेमत तूने मुझको,

दूसरों को जिम्मेदारी समझ ना आई…?

 

खूब रोई, खूब बिलखी,

तब “तूने” यह राज बताया…

नहीं चाहता, सखी ..

तेरी सच्ची भावना और प्रेम प्रीत,

किसी और के हिस्से में जाएं

दुख दिया, बना स्वार्थी,

सिर्फ मुझे तुम अपना मानो,

इसलिए यह रास रचाई…

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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