सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – सब रूपों में पूजित नारी..।
रचना संसार # १०३
☆ गीत – सब रूपों में पूजित नारी… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ☆
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कुलवंती दयमंती है वह
घर की लक्ष्मी हर नारी।
तीनों लोकों में यश उसका
सारा जग है बलिहारी।।
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उर विशाल माँ दुर्गा जैसा,
जगजननी कहलाती है।
जन्मे गर्भ से देवता हैं,
धरती स्वर्ग बनाती है।।
साहस करुणा की हे देवी,
अभिनंदन है अवतारी।
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आशा है विश्वास वही है,
दिव्य शक्ति है कल्याणी।
जगत् को संजीवनी देती,
मधुरस पूरित है वाणी।।
सब रूपों में पूजित नारी,
देखो सब पर है भारी।
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अपना धर्म निभाती हँसकर,
पीर जगत् की हरती है।
कर्म करे श्रद्धा से अपना,
धरा उर्वरा करती है।।
चहुँदिशि जय-जयकार उसी की,
संकल्पों की फुलवारी।
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कीर्तिमान नित नूतन रचती,
ध्वजा प्रगति की फहराती।
करती है उत्थान देश का,
अंतरिक्ष तक वह जाती।।
त्यागी लक्ष्मी स्वाभिमानिनी,
दुर्गावती कहाँ हारी।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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