श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी के साप्ताहिक स्तम्भ “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “सजल – चोरों के मन चोरी भाई…”। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।
मनोज साहित्य # २२८ ☆
☆ सजल – चोरों के मन चोरी भाई… ☆ श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” ☆
☆
चोरों के मन चोरी भाई।
अवसर मिलते करी सफाई।।
*
रामलला मंदिर के भीतर।
देख रहे उनकी चतुराई।।
*
फूट गया जब भाँडा उनका।
जेल गए जग हुई हँसाई।।
*
ऋद्धा जिनके रग-रग में थी।
भक्ति भाव की दौलत पाई।।
*
राजनीति के थके खिलाड़ी।
मिलकर सबने धूम मचाई।।
*
नहीं कभी विश्वास धर्म पर।
उनने भी किस्मत अजमाई।।
*
आस्था पर जब चोट लगी तो।
नेताओं में छिड़ी लड़ाई।।
☆
© मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002
मो 94258 62550
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



