श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘सुभोर…’।)

☆ शशि साहित्य # ३३ ☆

? कविता – सुभोर… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

तारे भी गंतव्य चले,

आंचल थामे रात का…

 

रश्मिरथी आ गए,

संग ले अलौकिक प्रकाश का…

 

आल्हादित हो भंवरे भी,

सुर निकालें गान का…

 

चटक कर कलियां खिल उठीं,

बिखरे रंग बहार का…

 

आसमान भी पटल बन,

बिखेरे रंग उल्हास का…

 

खुशबुओं को गले लगा,

देखो, डोलना बयार का…

 

छोड़ो कल की चिंताओं को,

पलकों में सजाओ सपना आज का…

 

सूर्य देव को नमन करो,

आशीष ले लो खुशहाली का…

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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