सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता जरा इतिहास को पढ़ लो !!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # १३ ☆
☆ जरा इतिहास को पढ़ लो !! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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चुकाई है बड़ी कीमत, हुए आजाद तब जानो ।
करो रक्षा वतन की सब, सुनो अब बात यह मानो ।
बहा है खून वीरों का, किसी ने लाल खोया है ।
लुटा कर दौलतें सारी, विजय का हार पोया है ।।
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चरण में शीश देकर भी, बचाई मातु की गरिमा ।
जवानी भेंट कर दी थी, बढ़ाने देश की महिमा ।
सजा ये थाल जो पाया,रखो अब मान भी प्यारे ।
सजग जो आज हो जाओ, मिटेंगे कष्ट फिर सारे ।।
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भुला संस्कार को अपने, विदेशी गीत गाते हो ।
मिटाकर देश की समता, महज ही बड़बड़ाते हो ।।
किया क्या देश के खातिर, स्वयं से प्रश्न यह कर लो।
नहीं काटो जड़े अपनी,जरा इतिहास को पढ़ लो ।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






