श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “सावन आ गया है…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २७६ ☆
☆ # “सावन आ गया है…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆
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यह सावन का मौसम
यह रिमझिम फुहारें
भीगा हुआ तन मन
अब तुमको पुकारें
यह तरुवर से कैसी
लिपटती हुई बेलें
प्रीत का नया
सावन में खेल खेलें
यह अठखेलियां
कर रही तुमको इशारे
भीगा हुआ तन मन
अब तुमको पुकारें
वर्ष कि यह
लंबी लंबी झड़ियाँ
बूंदों की यह
लंबी-लंबी लड़ियाँ
यह लड़ियाँ यह झड़ियाँ
सब रंग है तुम्हारे
भीगा हुआ तन मन
अब तुमको पुकारे
सावन है मधुरस
पीने का मौसम
मदहोशी में गाफिल
जीने का मौसम
रस से भरे हैं
तुम्हारे नैन कटोरे
भीगा हुआ तन मन
अब तुमको पुकारे
सावन आ गया है
अब तुम भी आ जाओ
व्याकुल है मन
अब ना तरसाओ
भीगकर बारिश में
संग कुछ वक्त गुज़ारें
भीगा हुआ तन मन
अब तुमको पुकारे
यह सावन का मौसम
यह रिमझिम फुहारें
भीगा हुआ तन मन
अब तुमको पुकारे /
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© श्याम खापर्डे
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