श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “चल रही राह ऐसी कुछ दुनिया…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६५ ☆
चल रही राह ऐसी कुछ दुनिया… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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ख़त्म होगी मेरी सज़ा कब तक
ज़िंदगी की करूँ दुआ कब तक
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दर्दे-दिल दूर करने पी तो लूँ
रंग लाएगी ये दवा कब तक
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हार मानी नहीं अभी मैंने
तू करेगा ग़ज़ल-सरा कब तक
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रह गुज़र ज़ीस्त की थका डाली
जिस्म अपना निचोड़ता कब तक
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मैं जलाता ही जा रहा दीपक
चल बुझाती है तू हवा कब तक
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चल रही राह ऐसी कुछ दुनिया
आख़िरश रुकना ज़लज़ला कब तक
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रंगे ज़िद्दत में जी रहा है तू
ज़ीस्त का समझे फ़लसफ़ा कब तक
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बेवफ़ाई के घन चलाते अरुण
प्यार का घर रहे टिका कब तक
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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