सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’ जी का ई-अभिव्यक्ति में स्वागत। लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता मन और वाणी।)
☆ कविता ☆ मन और वाणी ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
☆
हो कमान जब वाणी पर तो, दे अलग पहचान।
सोच समझकर मीठा बोलो, जग में मिले मान।।
०
क्यों लड़ना है प्यारे तुझको, जीवन क्षणभंगुर।
पल का भी क्या तनिक भरोसा, किस नशे में चूर।।
प्रेमभाव की बोली से ही, तेरी बढ़े शान।
सोच समझकर मीठा बोलो, जग में मिले मान।।
०
शब्द चीर देते हैं मन को, गहरा लगे घाव।
बरसों के संबंध मिटाता, कुछ पलों का ताव।।
करो मौन ये वाणी जब हो, मन में घमासान।
सोच समझकर मीठा बोलो, जग में मिले मान।।
०
बातें सुन मिश्री सी मीठी, मन में जगे आस।
हो अवसाद दूर जीवन से, सारा मिटे त्रास।।
त्याग करें कटुता का हम भी, दो हमे वरदान।
सोच समझकर मीठा बोलो, जग में मिले मान।।
☆
© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






