श्री हेमंत तारे 

श्री हेमन्त तारे जी भारतीय स्टेट बैंक से वर्ष 2014 में सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्ति उपरान्त अपने उर्दू भाषा से प्रेम को जी रहे हैं। विगत 10 वर्षों से उर्दू अदब की ख़िदमत आपका प्रिय शग़ल है। यदा- कदा हिन्दी भाषा की अतुकांत कविता के माध्यम से भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त किया करते हैं। “जो सीखा अब तक,  चंद कविताएं चंद अशआर”  शीर्षक से आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका है। आज प्रस्तुत है आपकी एक कविता – इन दिनों.।)

☆ हेमंत साहित्य # ५६ ☆

✍ इन दिनों.… ☆ श्री हेमंत तारे  

बड़ी तपिश है यार

इन दिनों.

साफ़ आसमाँ,

चिलके मारती धूप

और मानो,

क़फ़स में कैद हो हवा,

इन दिनों.

आज,

वो, सूखे कण्ठ लगा रही थी गुहार,

मांग रही थी पानी

क्योंकि

रिता रह गया था,

गलियारे में रखा सकोरा

जो भर देता था लबालब

मैं, हर रोज

इन दिनों.

© श्री हेमंत तारे

मो.  8989792935

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted