डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “आशनाई…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३०
आशनाई… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
=1=
क्यों आप मेरी ओर कभी झाँकते नहीं
चाहत की कीमतों को कभी आँकते नहीं
=2=
है साथ निभाने का अटल वादा हमारा
हम इश्क़ में कभी भी डींग हाँकते नहीं
=3=
हम इश्क के धागे में पिरोते हैं मुहब्बत
पर आप कभी उसमें वफ़ा टाँकते नहीं
=4=
अपना पड़ाव दिलरुबा की रहगुजर में है
हम दूसरी गलियों की धूल फाँकते नहीं
=5=
अपनी खुली क़िताब है ‘राजेश’ ज़िन्दगी
हम अपनी आशनाई कभी ढाँकते नहीं
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
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