श्री संतोष नेमा “संतोष”

(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी  कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप  कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपकी एक  विचारणीय कविता  – घर-घर दस्तक देती टोली आप  श्री संतोष नेमा जी  की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)

☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # ३०४ ☆

कविता – घर-घर दस्तक देती टोली☆ श्री संतोष नेमा ☆

(जनगणना पर एक कविता)

घर-घर  दस्तक   देती  टोली |

लेकर  प्रश्नों  की  इक  झोली ||

नाम  पता  और  उम्र  पूछती |

वह  पूछती   आपकी   बोली ||

*

कितने   बच्चे   कितनी   बेटी |

क्या   पढ़ते   क्या  रोजी रोटी ||

धर्म  कौन  सा  भाषा  क्या  है |

कितनी   दूर   केंद्र  मत – पेटी ||

कब  से   रहते  इसी  पते  पर |

कब   की बनी   तुम्हारी  खोली  ||

घर-घर    दस्तक   देती   टोली |

*

एक  दशक   में   ये   है   होती |

पर   विश्वास   कभी  ना  खोती ||

भारत    की   तस्वीर   दिखाती |

जब  भी  यह  जनगणना  होती ||

गणना   से   ही    बनें   नीतियाँ |

चले    न    झूठमूठ     बड़बोली  ||

घर-घर     दस्तक   देती   टोली |

*

इसे  महज  गणना  मत  समझो |

प्रगणक को छलना मत समझो ||

इससे  चले   देश   की  धड़कन |

आफत  से  लड़ना मत समझो ||

दें  विवरण  सब  जनगणना  में |

जनता  भी  अब  बने  न भोली ||

घर-घर     दस्तक   देती   टोली |

*

कश्मीर       से      कन्याकुमारी |

एक    सूत्र    में   गणना    सारी ||

शालाएं,    अस्पताल    कितनी |

ताल  कुंए  नल   बिजली  भारी ||

गणना    के    रंगों   से   सजती |

भारत    माँ   की    नई   रँगोली ||

घर-घर     दस्तक   देती   टोली |

*

अलग – अलग   भाषा  भाषी  हैं |

फिर   भी   सब  भारत  वासी  हैं ||

बने   महान   देश  हम  सब  का  |

जिसके  सब  अब अभिलाषी  हैं ||

अब “संतोष”  प्रगति के  पथ पर |

जनता  खुद ही  शामिल  हो  ली ||

घर-घर     दस्तक    देती   टोली |

© संतोष  कुमार नेमा “संतोष”

वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार

आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 70003619839300101799

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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