श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘सपनों को तुम ना सोने देना…।)
☆ शशि साहित्य # २७ ☆
कविता – सपनों को तुम ना सोने देना… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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चाहे हों बोझिल नींद से पलकें…
सपनों को तुम ना सोने देना…
लंबी दूरी तय करना है,
कदमों को ना थकने देना…
श्रम को अपना हथियार बना लो,
सफलता… सन्मुख शीश नवाने देना…
कल उसको पुनः उदय होना है,
तो सूरज को ढल जाने देना…
नयी है आभा, नई बहारें,
राह के कांटे, बिसरा देना…
चाहे तूफानों से हो जाए सामना,
डोर आशा की थामें रहना…
विपरीत हो जाए सब राहें…
दीपक लगन का, जलाए रखना…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




